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Thursday, December 30, 2010

Enjoy Free Calling in Gmail from 2011

When they launched calling in Gmail back in August, we wanted it to be easy and affordable, so we made calls to the U.S. and Canada free for the rest of 2010. In the spirit of holiday giving and to help people keep in touch in the new year, we’re extending free calling for all of 2011.

In case you haven’t tried it yet, dialing a phone number works just like a regular phone. Look for “Call phone” at the top of your Gmail chat list and dial a number or enter a contact’s name.


To learn more, visit gmail.com/call. Calling in Gmail is currently only available to U.S. based Gmail users.

Happy New Year and happy calling!

Sunday, October 31, 2010

Happy Diwali Banam tamso ma jyotirgamaya

बचपन की यादें अभी शेष हैं. शहरों से दूर हम छोटे कस्बों में किस तरह दीपावली का त्योहार आते ही घरों की साफ-सफाई में लग जाते थे. आस-पड़ोस के लोग भी अपनी पसंद और पॉकेट के हिसाब से घरों का रंग बदलते थे. धनतेरस के दिन खूब खरीदारी करते थे.
हम बच्चे जमकर पटाखा चलाते. हिंदू धर्म में यह फाइनेंशियल ईयर के समाप्त होने और नया बही-खाता शुरू होने का भी समय होता था जिसका अहसास दुकानों के रंग-रोगन से मिलता था. मतलब साफ है, शुरू से ही यह टोटल हैप्पी मोड में रहने वाला त्योहार रहा है. यह परंपरा तब की थी जब बाजार या सीधे शब्दों में कहें तो कॉरपोरेट व‌र्ल्ड और बाजारवाद का हमारी आम-जिंदगी में प्रवेश नहीं हुआ था.उनका उतना प्रभाव नहीं था. सालों से दीपावली के समय काम करने वाले लोगों के घरों में बोनस आने की भी परंपरा थी. फेस्टिव सीजन में हमारी फैमिली में छुट्टी का भी वक्त होता था. मतलब यह कि यह पर्व ही कुछ ऐसा था जहां बाजार को संभावना लगी. बाजार और कॉरपोरेट जगत दीपावली की इमोशन और इससे जुड़ी चीजों को अपने हितों के साथ कंबाइन कर दिया. हमारे कायदे-संस्कार को एक ग्लैम लुक दे दिया. परिणाम यह हुआ कि दीपावली पूरे व‌र्ल्ड में क्रिसमस की तरह बाजार के लिए भी फेस्टिव ईवेंट बन गया. हर तरफ दीपावली बोनांजा नजर आने लगा है. मल्टीनेशनल कंपनी हो या फिर टीवी या सिनेमा, दीपावली के मौके पर लोगों के पॉजिटिव सेंटिमेंट को कैश कराने लगे. हमने भी टीवी पर दीपावली के मौके पर कई बड़े शो शुरू किए. इसमें कुछ गलत भी नहीं था. समृद्धि के पर्व के रूप में हम दीपावली को मनाते हैं. अगर यह दिखे तो फिर हर्ज क्या है. कॉरपोरेट फेस्ट के रूप में दीपावली मनाई जाने लगी. एक रिसर्च के अनुसार दीपावली का बाजार हर साल जिस तेजी से बढ़ रहा है उसके अनुसार आने वाले समय में यह पूरे व‌र्ल्ड के मार्केट का भी फेस्टिव ईवेंट हो सकता है.
समीर नायर,एनडीटीवी इमैजिन के सीईओ हैं. कौन बनेगा करोड़पति को टीवी स्क्रीन पर लाने का क्रेडिट इन्हें जाता है.
(आई नेक्स्ट से बातचीत पर आधारित)

bollywood diwali connection

इस दीपावली दो बड़ी फिल्में एक्शन री प्ले और गोलमाल-3 रिलीज होंगी. अगर गौर करें तो दोनों ही फिल्में फनी मूड की हैं. गोलमाल सिरीज ने हॉलीवुड की अमेरिकन पाई की तरह अपनी फ्रेंचाइजी डेवलप कर ली है. हिंदी में यह पहली फिल्म है जिसका दूसरा सीक्वेल बना है. वहीं एक्शन री प्ले के निर्देशक विपुल शाह भी लाइट मूड की फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं.
इस बीच कुछ छोटे बजट की फिल्में जो रिलीज होने की बाट-जोह रही थीं, फटाफट दीपावली से पहले वाले हफ्ते में थिएटर में पहुंच गई. यानी एक बात साफ है कि दीपावली में सीरियस स्टफ के लिए कोई जगह नहीं. सूरज बड़जात्या ने अभी हाल में अपने एक इंटरव्यू में कहा कि वे अपनी फिल्में दीपावली के मौके पर ही रिलीज करना पसंद करते हैं. उनका मानना है कि दीपावली का समय फेमिली मूवीज के लिए सबसे बेहतर होता है. लोग फेमिली के साथ सिनेमा देखने जाना पसंद करते हैं. पिछले कुछ सालों में फेमिली फिल्मों का जोर कम हुआ है. उसकी जगह कॉमेडी या रोमांटिक कॉमेडी ने ली है. आम तौर पर यह माना जाता है कि हर साल की सबसे बड़ी फिल्म दीपावली के मौके पर ही रिलीज होती है. दक्षिण में, खास तौर पर तमिलनाडु में दीपावली पर कई बड़े बजट की फिल्में मैदान में होती हैं. दीपावली पर फिल्में रिलीज करने का चलन रजनीकांत की दलपति से बढ़ा.
दिलचस्प बात यह है कि भले ही फिल्म इंडस्ट्री को अपनी बड़े बजट की फिल्मों के साथ सेफ गेम खेलने के लिए दीपावली का इंतजार रहता हो, फिल्मों में कभी भी दीपावली को होली जितनी अहमियत नहीं मिली. दीपावली कहानी का हिस्सा बनकर बहुत कम आता है. हां, सत्तर के दशक में साउथ के एक्टर दीपावली की आतिशबाजी के बीच गीत गाते दिख जाते थे.

Friday, October 15, 2010

भक्तों की लगी है कतार

मंगलवार को दुर्गा पूजा पंडालों में मां के दर्शनों के लिए दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही. शाम को भव्य आरती हुई, इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए है. कई पंडालों में फैंसी ड्रेस कंप्टीशन, मैजिक शो, बंगाली प्ले आदि प्रोग्राम भी हुए.

श्री श्री शारदीय दुर्गापूजा कमेटी के उज्जवल मुखर्जी ने बताया कि सुबह सप्तमी पूजन किया गया और महाभोग आरती हुई. फैमिली के साथ पहुंचकर लोगों ने मां के दर्शन किए. भोपाल से आए मैजेशियन ने हैरतअंगेज कारनामे दिखाकर लोगों को ताज्जुब में डाल दिया. वहीं बच्चों ने फैंसी ड्रेस कंप्टीशन में भाग लिया. उधर चकेरी कालीबाड़ी दुर्गापूजा उत्सव में बंगाली प्ले स्वयंबरा पेश किया गया. यहां बच्चों ने गुब्बारा फुलाने, सुई धागा दौड़ आदि गेम्स में भाग लिया. इस दौरान दिलीप कुमार घोष, विवेकानंद दास मौजूद थे. उधर, पांडुनगर में शाम को आरती में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. पांडाल मां के जयकारों से गूंजता रहा.
शाम को अंधेरे में डूबे
शाम को गीतानगर के पास इंसुलेटर टूटने से जवाहरनगर और जरीबचौकी सबस्टेशन ठप हो गए. ब्रेकडाउन अटैंड करने के लिए शटडाउन से चमनगंज और चीना पार्क सबस्टेशन भी बंद हो गए. वहीं रात में अर्थिग टूटने से आर्यनगर, स्वरुपनगर की लाइट गुल हो गई. इससे दुर्गापूजा पांडालों में अंधेरा छा गए. आईआईपीआर और पनकी बी ब्लाक ई ब्लाक में अंडरग्राउंड फाल्ट के कारम लोगों को पॉवर क्राइसिसस से जूझना पड़ा.

Monday, October 4, 2010

Why They Are Hide

गायब हुए या कर दिए गए?


NEW DELHI (3 Oct, Agency): इन दिनों अगर आप दिल्ली जाएं तो एक खास बात नोटिस करेंगे. दिल्ली की सूरत तो बदली है ही साथ ही इन दिनों दिल्ली की सड़कों से भिखारी गायब हो गए हैं. सबसे बड़ी बात कि यह सबकुछ अचानक हुआ है. सिर्फ भिखारी ही नहीं ट्रैफिक सिग्नल्स पर अक्सर बैलून, पेन और मैगजीन बेचने वाले भी इन दिनों नजर नहीं आ रहे हैं. इस बात को लेकर ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स और एनजीओ ने दिल्ली गवर्नमेंट पर ब्लेम किया है. उनका कहना है कि गवर्नमेंट ने गेम्स खत्म होने तक भिखारियों को शहर से बाहर रहने के लिए कहा है. उधर स्टेट ऑफिशियल्स ने इस बात का खंडन किया है.
भेज दिया दूसरे शहर
इंडो ग्लोबल सोशल सर्विस सोसायटी की इंदू प्रकाश सिंह का कहना है कि इस बात की पुख्ता सूचना है कि गरीबों को रेलवे स्टेशन ले जाया गया. यहां उन्हें दूसरे शहरों की तरफ जाने वाली ट्रेनों में बैठा दिया गया. साथ ही इन्हें इंस्ट्रक्शंस भी दिए गए कि जब तक कॉमनवेल्थ गेम्स खत्म नहीं हो जाते तब तक वे वापस लौट कर शहर में ना आएं. सिंह ने कहा कि एडमिनिस्ट्रेशन ने गरीब लोगों पर सरकारी डर पैदा किया गया. नॉन गवर्नमेंट ऑर्गनाइजेशन (एनजीओ) आश्रय अधिकार अभियान के संजय कुमार ने भी सिंह की बात से सहमति जताई है.
भिखारियों को किया वॉर्न
संजय ने कहा कि हमारे पास इंफॉर्मेशन है कि कई भिखारियों को ट्रकों में लादकर शहर से बाहर भेज दिया गया है. इन भिखारियों को वॉनिंग भी दी गई है कि वे गेम्स के खत्म होने तक वापस नहीं लौटें. उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. सबसे पहले तो गवर्नमेंट पॉवर्टी की प्रॉब्लम सॉल्व नहीं कर पाई.

Tuesday, September 28, 2010

Doctors agree after died 29 patient

29 मौतों के बाद माने डॉक्टर

i next reporter
KANPUR (27 Sept): तीन दिन में दो दर्जन से ज्यादा बेगुनाह बीमार लोगों की जान लेने के बाद आखिरकार डॉक्टरों की हड़ताल खत्म हो गई. प्रशासनिक अफसरों के अनुसार कमिश्नर अमित घोष ने नर्सिगहोम्स में तोड़फोड़, डॉक्टरों से मारपीट और अभद्रता करने वालों को चिन्हित कर, उनपर एनएसए लगाए जाने के निर्देश दिए.
इसके बाद ही मंडे को देर शाम आईएमए भवन में हुई बैठक के बाद 72 घंटे की हड़ताल खत्म करने की घोषणा की गई. इसी के साथ पैथॉलॉजी और मिशनरी व चैरिटेबिल अस्पतालों में भी काम शुरू हो गया जो समर्थन में मंडे मार्निग से हड़ताल पर थे.
नाराज थे पिटाई से
कल्याणपुर के डॉक्टर गोपाल गुप्ता की पिटाई से गुस्साए शहर भर के प्राइवेट डॉक्टर्स ने सैटरडे सुबह से हड़ताल कर दी थी. संडे को मेडिकल एसोसिएशन की कॉल पर की स्ट्राइक में पैथॉलजी वाले भी शामिल हो गए थे. सैटरडे से इलाज को मरीज पूरे शहर में भटकते फिरे. पैथॉलॉजियों में भी लोगों की रिपोर्ट तो दी गई लेकिन जांच के लिए सैंपल नहीं लिए गए. मंडे को आईएमए ने मिशनरीज हॉस्पिटल्स को भी स्ट्राइक में शामिल हो लिए थे.
तीन दिनों तक चली डॉक्टर्स की ये स्ट्राइक मंडे की शाम तक 29 मरीजों की जानें निगल गई थी. शहर के हालत बद से बदतर होते चले गए. संडे को एडमिनिस्ट्रेशन से बातचीत के बाद भी कोई हल नहीं निकल सका. हर नर्सिगहोम में नो एडमीशन के पर्चे चस्पा थे. इलाज के लिए भटकते कई लोगों ने गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स पहुंचने से पहले ही दम तोड़ते रहे.
देर शाम decision
मंडे शाम आईएमए टेंपल ऑफ सर्विस में मीटिंग ऑर्गनाइज की गई. इसमें सभी पदाधिकारी शामिल हुए. डॉ. अवध दुबे, डॉ. एसी अग्रवाल, डॉ. अलका शर्मा ने सभी मैम्बर्स के साथ हुई मीटिंग के बाद मंडे नाइट स्ट्राइक खत्म करने का डिसीजन लिया. डॉ. अवध दुबे ने बताया कि एडमिनिस्ट्रेशन ने उनकी सभी मांगें मान ली है. उन्हें पूरी तरह से सिक्योरिटी देने को कहा है. देर रात नर्सिग होम में नए मरीज एडमिट करने का सिललिला शुरू हुआ.

इनकी गई जान

शकुंतला-68 आर्यनगर, सुनील-25 हरवंशमोहाल, श्यामकुमार-32 बर्रा, ओमप्रकाश-70 बर्रा, धनीराम-40 उन्नाव, अनीता-27 औरैया, दिव्या भदौरिया-9 रोशन नगर, रामू- 40 केडीए कालोनी, परवीन- 40 बिठूर, नेहा-12 चौबेपुर, महादेव- 70 जरीब चौकी, सुभद्रा-40 उस्मानपुर, रुबीना-23 नदीहा, कविता-8 बिल्हौर, नौशीन-21 फतेहपुर, रामनरेश-35 कर्रही, प्रभू दयाल-55 फरुर्खाबाद, कीर्तन-14 उन्नाव, दौलतखान-60 बिल्हौर, कुसुमा देवी- 35 उत्तरीपुरा, पुष्पलता-47 कन्नौज, निलिमा- 17 उरई, गुलाब सिंह- 38 कन्नौज, राजू वर्मा-27 गोविन्द नगर, नंदनी-15 महीने लाल डिग्गी, जुगुल नरायण- 55 चंदारी, अमित- 27 ऊगू, छोटू-5 काकूपुर, छक्कू- 37 शाहपुर.

Dead - are dead patient wandered and Timardar


 मारे-मारे फिरते रहे मरीज और तीमारदार

KANPUR (27 Sept): सड़क ने जख्मी किया लेकिन डॉक्टर्स की स्ट्राइक ने जान ले ली. हैलट इमरजेंसी के बाहर बिलख रहे बच्चों की मां की जान बच सकती थी, लेकिन इलाज न मिलने के कारण मौत हो गई. मासूम रोते और गुहार लगाते रहे लेकिन डॉक्टर्स नहीं पसीजे, सुभद्रा घंटों तड़पती रही जब इलाज मिला तब तक बहुत देर चुकी थी. सुभद्रा की सांसें थम चुकीं थी और बच्चों के सिर से हमेशा-हमेशा के लिए मां का साया उठ चुका था.
नहीं किया admit
सिटी के उस्मानपुर में रहने वाली सुभद्रा पति तेज सिंह के साथ बाइक से चौबेपुर सिटी लौट रही थी. नारामऊ के पास हुए सड़क हादसे में सुभद्रा जख्मी हो गई. फैमिली मेंबर्स आनन-फानन में उसे रामा हॉस्पिटल ले गए, तो गार्ड ने गेट से ही लौटा दिया. बदहवास फैमिली मेंबर्स सुभद्रा को लेकर रीजेंसी और मधुराज पहुंचे तो वहां भी हड़ताल की बात कहकर वापस कर दिया. घबराए फैमिली मेंबर्स आखिर में सुभद्रा को लेकर हैलट पहुंचे. हैलट में भारी भीड़ होने के कारण सुभद्रा बाहर ही तड़पती रही, मासूम बच्चे मां की हालत देख कर रोते रहे लेकिन चाह कर भी सुभद्रा को इलाज नहीं मिल सका.
पति तेज सिंह ने हैलट के सीआईएस वीएन त्रिपाठी से गुहार लगाई. जब तक हैलट में सुभद्रा का इलाज होना शुरू हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी. ऑक्सीजन लगाए जाने के कुछ ही देर बाद सुभद्रा की मौत हो गई.
हड़ताल ने छीन ली मां
सुभद्रा की मौत की खबर सुन कर इमरजेंसी के बाहर मौजूद सुभद्रा की मां तो जमीन पर गिर पड़ी, बेटी की मौत पर मां बेसुध हो गई. बच्चों को चुप करा रहा भाई भी अपने को नहीं संभाल सका और फफक कर रो पड़ा. रजोल ने बताया कि हड़ताल न होती तो बहन की जान बच जाती. बड़ों को रोते देख खामोश बच्चे भी रो पड़े.

Monday, September 27, 2010

सफलता का गुरूमंत्र जानते हैं धौनी

नई दिल्ली। महेंद्र सिंह धौनी विश्व क्रिकेट एकमात्र ऎसे कप्तान बन गए हैं जिनके नेतृत्व में खेलने वाली टीमें ट्वेंटी-20 क्रिकेट की तीन सबसे ब़डी प्रतियोगिताओं में खिताबी जीत हासिल कर चुकी हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान धौनी के नेतृत्व में टीम इंडिया ने जहां 2007 में ट्वेंटी-20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था वहीं इस वर्ष उनकी कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स टीम ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के तीसरे संस्करण का खिताब जीता। सफलता के इस सफर को आगे बढ़ाते हुए धौनी की सुपर किंग्स टीम ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित चैम्पियंस लीग ट्वेंटी-20 चैम्पियनशिप में खिताबी जीत हासिल की। इससे साबित होता है कि धौनी के पास सफलता का अचूक गुरूमंत्र है। यह गुरूमंत्र दरअसल कुछ और नहीं बल्कि खुद पर और अपने साथियों पर भरोसा करना है। चाहें वह टीम इंडिया हो या फिर चेन्नई सुपर किंग्स, धौनी ने हमेशा अपने साथियों को बिना दबाव के खेलने की प्रेरणा दी है। यही नहीं, एक कप्तान के तौर पर वह विकेट के पीछे और बल्ले के साथ भी प्रेरणादायक प्रदर्शन करते रहे हैं।

मारपीट के आरोप में पांच डाक्टर गिरफ्तार

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में प्रतिष्ठित एसएसकेएम अस्पताल के पांच डाक्टरों को मरीजों के रिश्तेदारों के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। सरकारी अस्पताल एसएसकेएम के इन जूनियर डाक्टरों के खिलाफ रविवार रात भारतीय दंड संहिता की दो गैर जमानती धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए है। डाक्टरों की ह़डताल के तीसरे दिन कुछ मरीजों को आपातकालीन और अन्य वाडरें में भर्ती करने से मना कर दिया गया और इन डाक्टरों ने उनके रिश्तेदारों के साथ मारपीट की। अस्पताल प्रशासन ने ह़डताल की वजह से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के लिए आपात बैठक बुलाई है। ह़डताल की वजह से न केवल एसएसकेएम अस्पताल बल्कि नेशनल मेडिकल कॉलेज और अन्य सरकारी अस्पताल में कामकाज बूरी तरह से प्रभावित हुआ है। चार दिन पहले लापरवाही के कारण एक मरीज की मौत के बाद कुछ लोगों ने एक डाक्टर के साथ मारपीट की थी जिसके बाद इन अस्पतालों के डाक्टर सुरक्षा की मांग करते हुए ह़डताल पर चले गए। राज्य के स्वास्थ्य सचिव ने इस संबंध में मेडिकल कॉजेलों के प्रमुखों की बैठक बुलाई है।

Wednesday, September 22, 2010

Now come the next year Ganapati

अब अगले बरस आएंगे गणपति


बारह दिन तक हमारे घर में मेहमान बनकर विराजे गणपति को अब विदा करने का समय आ ही गया. इतने दिनों तक उनकी सेवा करने के बाद आज गणपति की प्रतिमा को सिटी के कई घाटों पर विसर्जित किया जाएगा. बुधवार को हर सड़क और गली में गणपति बप्पा मोरया की गूंज के साथ उड़ेगा गुलाल.
महाराष्ट्र मण्डल से सिद्धिविनायक
यूं तो गणेश उत्सव के दूसरे दिन से ही विसर्जन होने लगता है लेकिन आज उत्सव के आखिरी दिन सिटी में विसर्जन होगा. आज दोपहर एक बजे महाराष्ट्र मण्डल में महाआरती होने के बाद गणपति को सिद्धिविनायक मंदिर ले जाया जाएगा. वहां से शुरू होगी शोभा यात्रा, उनकी सुंदर सी प्रतिमा को देखने के लिए लगभग दो से तीन हजार भक्तों की भीड़ होती है. गणपति को घाट तक ले जाने के लिए रथ भी तैयार किया गया है. यात्रा जनरल गंज, हटिया, मेस्टन रोड, बड़ा चौराहा होते हुए सरसइया घाट जाएगी. रास्ते में ढोल ताशे के साथ सभी भक्त नाचते-झूमते पूरे जोश के साथ गणपति का विसर्जन करेंगे.
महाराष्ट्र मण्डल के सेक्रेटरी सुभाष देव का कहना है कि गंगा किनारे भी आरती होगी. जैसा कि गंगा का पानी खतरे के निशान को पार कर चुका है इसलिए नाव से ज्यादा दूर नहीं जाएंगे. वहीं बीएनएसडी में प्रसाद वितरण होगा. इसी के साथ ही 24 सितंबर का दिन शांति से बीते इसके लिए भी प्रार्थना करेंगे.

I am like that

मैं ऐसा ही हूं..

पेशेंस, डिसिप्लिन और सही ट्रेनिंग. यही वो चीजें हैं जो किसी व्यक्ति को सक्सेसफुल बनाती हैं. बस इसमें राइट न्यूट्रीशन और जोड़ दीजिए, तो आप बन सकते हैं सक्सेसफुल बॉडी बिल्डर. यह मानना है सन 2004 में मिस्टर व‌र्ल्ड का टाइटल जीतने वाले बॉडी बिल्डिर, मलेशिया के वांगहांग का. छह बार एशियन चैम्पियनशिप के विनर वांगहांग के मुताबिक बॉडी कट्स और शेप में लाना एक दिन का काम नहीं है. काफी वक्त लगता है इसमें.
इसलिए बॉडी बिल्डर स्पेशली यंगस्टर्स को पेशेंस के साथ एक्सरसाइज करनी चाहिए. हर इंसान के जेनेटिक्स अलग-अलग होते हैं. इसलिए युवा मूवीज, सीरियल्स या डब्लूडब्लूई में रेसलर्स की तरह बनने या दिखने की कोशिश न करें. अपनी क्षमताओं को पहचानकर डाइट और एक्सरसाइज करें.
ऐसे मिला मोटिवेशन
सन 1988 में आई हॉलीवुड मूवी इनक्रेडिबल हल्क को देखने के बाद उन्हें बॉडी बिल्डिंग का चस्का लगा. फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. हफ्ते में पांच बार एक्सरसाइज करते हैं. एक ट्रेनिंग सेशन डेढ़ घंटे का होता है. अरनाल्ड श्वाजनेगर को आइडियल मानने वाले वांग मलेशियन मूवी टुआ केम्बली में एक्टिंग भी कर चुके हैं. अमेरिका की फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी से ह्यूंमन साइंस में एमएससी कर चुके वांग भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी की फिल्म शहीद में भी एक्टिंग कर रहे हैं. वांग के मुताबिक बॉडी बिल्डिंग में प्रोफेशनलिज्म हावी हो चुका है. इसीलिए व‌र्ल्ड फेम प्रोफेशनल्स तक बॉडी बनाने के लिए ड्रग्स और प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. वांग ने कहा, आजकल जिम में युवाओं को तरह-तरह की दवाएं और पाउडर खाने को दिए जाते हैं, जोकि काफी खतरनाक होते हैं. इससे हार्ट अटैक, लिवर डैमेज, किडनी फेल्योर और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा रहता है. उन्होंने कहा कि ट्रेनिंग के लिए अच्छे ट्रेनर का सेलेक्शन बहुत जरूरी है

Not sick in town

सारा शहर बीमार है. एक के बाद एक लोग बीमार हो रहे हैं. शहर में बीमारी से कई मौतें भी हो चुकी हैं. डेंगू, वायरल, स्वाइन फ्लू, चिकुनगुनिया और कंजक्ंिटवाइटिस जैसी बीमारियां फैल रही हैं. इसके बाद भी हेल्थ डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड में कोई बीमार नहीं है. सिर्फ स्वाइन फ्लू को छोड़ दें तो शहर में किस बीमारी के कितने पेशेंट हैं किसी को नहीं पता.
हर रोज 15 से 20 पेशेंट
नाम न छापने की शर्त पर एक प्राइवेट डॉक्टर ने बताया कि वो लगातार डेंगू के पेशेंट्स को ट्रीट कर रहे हैं. उनका कहना है कि ये बात सही है कि इस बार डेंगू हेम्रेजिक फीवर के पेशेंट की संख्या कम रही है, लेकिन अभी भी डेली दो से तीन पेशेंट क्लासिक डेंगू के आ जाते हैं. हर रोज डेंगू के 15 से 20 नए मरीज आ रहे हैं.
नहीं कोई रिकॉर्ड
इसे शहर का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि यहां स्वाइन फ्लू के अलावा किसी अन्य बीमारी का प्रॉपर रिकॉर्ड नहीं है. सरकारी स्तर पर डेंगू की जांच सिर्फ मेडिकल कॉलेज में होती है. पर यहां भी लापरवाही हो रही है. जब हेल्थ डिपार्टमेंट ने जीएसवीएम से रिकॉर्ड मांगा, तो वो सिर्फ 15 दिन का ही रिकॉर्ड दे पाए, जिसमें 6 पेशेंट्स पॉजिटिव पाए गए. इससे पहले का उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है. सूत्रों की मानें तो मेडिकल कॉलेज की लापरवाही से डेंगू की जांच बंद पड़ी थी. डिपार्टमेंट पर प्रेशर पड़ने पर 20 दिनों पहले ही टेस्टिंग शुरू हो सकी.
हो चुकी हैं दर्जनों मौतें
शहर में अब तक बीमारियों से दर्जनों मौतें हो चुकी हैं. इन मौतों के बाद भी हेल्थ डिपार्टमेंट मजबूर है. सीएमओ डॉ. अशोक मिश्रा कहते हैं कि उनके डिपार्टमेंट की तरफ से कई बार पैथोलॉजी और प्राइवेट हॉस्पिटल्स को लिखा गया कि वो उन्हें बीमारियों का ब्योरा दें लेकिन वो ऐसा नहीं कर रहे. वो कहते हैं कि कोई एक्ट न होने के कारण वो सिर्फ इंस्ट्रक्शन दे सकते हैं.

Friday, August 13, 2010

झारखंड में एक लाख नियुक्तियों को हरी झंडी

रांची राज्य में सरकारी नौकरियों की बहार आने वाली है। सब कुछ ठीक रहा तो एक लाख बेरोजगारों को जल्द सरकारी नौकरी मिलेगी। शासन ने रिक्त पदों पर नियुक्तियों की तैयारी शुरू कर दी है। विभिन्न विभागों से रिक्तियों का ब्योरा मांगा गया है। शासन ने 10वीं, 12वीं और स्नातक अर्हता वाले रिक्त पदों को कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से भरने का फैसला किया है। ऐसे पदों की संख्या करीब 30 हजार है। इसके लिए कर्मचारी चयन आयोग के जरिए परीक्षा कराई जाएगी। मुख्य सचिव डा. एके सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य कर्मचारी चयन आयोग की ओर से की जाने वाली नियुक्तियों की विभागवार समीक्षा की। शासन ने पहली बार कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से विभिन्न विभागों के लगभग 10 हजार पदों पर नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। इसके तहत वीएलडब्ल्यू, राजस्व कर्मचारी, पंचायत सेवक सहायकों की नियुक्ति की जा सकती है। करीब 70 हजार पदों पर समुचित विधि से नियुक्तियां की जानी हैं। इनमें लगभग 20 शिक्षकों और 10 हजार पुलिसकर्मियों की बहाली शामिल है।

Tuesday, August 10, 2010

Oil spill wrecks havoc

MUMBAI (9 Aug, Agency ): मुंबई से दस समुद्री मील (करीब 16 किलोमीटर) की दूरी पर अरब सागर में शनिवार को हुई दो जहाजों में टक्कर से फैला तेल अरब सागर में पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन गया है. महाराष्ट्र से सटे अरब सागर में पर्यावरण पर एमएससी चित्रा से रिसा तेल बुरा असर डाल रहा है. महाराष्ट्र के सीएम अशोक चव्हाण ने समुद्र में तेल फैलने से मछलियों के जहरीले हो जाने की आशंका के चलते लोगों से मछलियां न खाने की अपील की है. इस घटना से अरब सागर में विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकीं हमबैक वेल और कछुओं के वजूद पर संकट पैदा हो गया है.
मर रही हैं मछलियां
जानकार इस बात से चिंतित हैं कि चित्रा से रिस रहा तेल मुंबई के समुद्र तट पर मौजूद मैंग्रोव बेल्ट पर भी बुरा असर डाल रहा है. इससे पर्यावरण संतुलन पर भी बुरा असर पड़ रहा है. मुंबई के पास मौजूद समुद्र में करीब 200 तरह की समुद्री प्रजातियां पाई जाती हैं. समुद्र में मौजूद जीवों और वनस्पतियों पर इसके बुरे असर की आशंका है. सबसे बुरा असर छोटी मछलियों ओइस्टर और लॉबस्टर पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है. जानकारों के मुताबिक अरब सागर में विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी हमबैक वेल (एक स्टडी के मुताबिक वेल की यह प्रजाति अब सिर्फ 400 की संख्या में अरब सागर में मौजूद है) के वजूद पर समुद्र में तेल फैलने से बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. छोटी मछलियों जैसे, ओइस्टर पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ रहा है.
मछुआरों को नुकसान
15 अगस्त से शुरू हो रहे मछलीपकड़ने केसीजन में बॉम्बे डक व पॉम्फ्रे मछलियां पकड़ी जाएगी. मुंबई के पासअरब सागर में मछलियों के मरने की आशंका है, मछुआरों को करोड़ों रुपए का नुकसान होगा.
हमबैक वेल
वेल के शिकार पर पूरी दुनिया में रोक लगाए जाने से पहले हमबैक वेल 1500 तक की संख्या तक सिमट गई थी, लेकिन प्रतिबंध के बाद इनकी संख्या बढ़ी है, लेकिन अरब सागर में इनकी संख्या लगातार गिरती जा रही है और इसे विलुप्त प्राय समुद्री जीवों की श्रेणी में रखा गया है.
पर्यावरणविद् बिट्टू सहगल के मुताबिक हजारों लीटर तेल पानी में फैलने से लाखों समुद्री जीवों के अस्तित्व पर गंभीर ख़तरा मंडरा रहा है.

Wetern lifestyle behind breast cancer

LONDON NEWS: वे महिलाएं जो वेस्टर्न लाइफ स्टाइल में रम गई हैं, यह उन्हें सावधान करने वाली खबर है. नई स्टडी की मानें, तो बिंदास लाइफ स्टाइल ब्रेस्ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को निमंत्रण दे सकती है. व‌र्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड द्वारा जारी ताजा आंकड़ों में यह चौंकाने वाली बात कही गई है. इसमें स्पष्ट पर कहा गया है कि महिलाओं के वेस्टर्न लाइफ स्टाइल से प्रभावित होने और एक्सरसाइज न करने की आदत से बेस्ट कैंसर के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है. वेबसाइट डेलीमेल डॉट को डॉट यूके के अनुसार इस संस्था ने ब्रिटेन में ब्रेस्ट कैंसर के आंकड़े पेश किए हैं. 2008 में ब्रेस्ट कैंसर के एक लाख केस लगभग 88 मामले ब्रिटेन के थे. इस मामले में बेल्जियम सबसे आगे रहा. यहांकैंसर के प्रति लाख मामलों में 109 मामले ब्रेस्ट कैंसर के पाए गए. 100 मामलों के साथ फ्रांस दूसरे स्थान पर रहा. जबकि गरीबी की मार झेल रहे पूर्वी अफ्रीका में यह संख्या सिर्फ 19 थी. डब्ल्यूसीआरएफ के अनुसार ब्रेस्ट कैंसर के मामलों के संदर्भ में अमीर और निर्धन देशों के बीच यह अंतर लाइफस्टाइल के कारण है.

जुलाई में नई ऊंचाई पर पहुंचा कार बाजार

आम आदमी भले ही महंगाई की तपिश से झुलस रहा हो, लेकिन व्हीकल बनाने वाली कंपनियों के मुनाफे को न तो मंदी छू पाई और न ही महंगाई. पिछले महीने जुलाई के दौरान डॉमेस्टिक मार्केट में सभी तरह के व्हीकल्स की रिकार्ड सेल इसका सबसे बेहतर एग्जांपल है. आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले व्हीकल्स की सेल 31.50 परसेंट बढ़कर 12,37,461 यूनिट्स पहुंच गई. इंडियन व्हीकल मैनुफैक्चरिंग एसोसिएशन (सियाम) के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2010 में कुल 12,37,461 व्हीकल्स बिके, जो इससे पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 31.50 परसेंट अधिक है.
मार्च को भी पीछे छोड़ा
सियाम के जनरल डायरेक्टर विष्णु माथुर ने बताया कि नए मॉडल्स के पेश होने, रूरल एरियाज में कंपनियों के प्रवेश के साथ फाइनेंस की फैसिलिटी से जुलाई में कारों, स्कूटर और मोपेड की ज्यादा सेल हुई है. इससे पहले सबसे ज्यादा व्हीकल्स की सेल इस साल मार्च महीने में हुई थी. उस दौरान 12,26,944 व्हीकल्स बिके थे.

नॉर्थ इंडिया में होती है ऑनर किलिंग

NEW DELHI : I Next Report- ऑनर किलिंग को रोकने के लिए सरकार कानून बनाने की प्रक्रिया में लगी है, वहीं एक स्टडी में सामने आया है कि झूठी शान के लिए हत्याएं मुख्य रूप से नॉर्थ इंडिया में ही होती हैं. महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री कृष्णा तीरथ ने राज्य सभा को बताया कि राष्ट्रीय महिला आयोग और गैर-सरकारी संगठन शक्ति वाहिनी ने यह स्टडी की है. इसमें ऐसे 560 मामलों की जानकारी जुटाई गई जिसमें यह सामने आया कि ऑनर किलिंग मुख्य रूप से नॉर्थ इंडिया की समस्या है. स्टडी के अनुसार 560 में से 88.93 परसेंट केस में लड़की के परिवार वालों ने ही इन हत्याओं को अंजाम दिया.
नरेगा में मिली गंभीर खामियां
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप कुमार जैन ने लोक सभा में जानकारी दी कि देश के नक्सल प्रभावित 35 जिलों में गंभीर खामियां पाई गई हैं. नरेगा में खराब बैंकिंग सुविधाओं, मजदूरी के भुगतान में देरी, नरेगा व पीएम ग्राम सड़क योजना में तालमेल नहीं होने को लेकर टिप्पणी की है. इन जिलों में औसतन 17 से 40 दिन ही रोजगार दिया गया.
जजों के 266 पद रिक्त
ला मिनिस्टर एम वीरप्पा मोइली ने बताया कि देश के 21 हाईकोर्ट में जजों के 266 पद रिक्त हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट में चार पद रिक्त हैं.इलाहाबाद हाईकोर्ट में सबसे अधिक 84 पद रिक्त हैं जबकि कलकत्ता और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में 21-21 पद रिक्त हैं.

चीन में भी टिकट टू बॉलीवुड

चीन व‌र्ल्ड की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बन चुका है. इंडिया से उसके बिजनेस रिलेशन भी लगातार विकसित हो रहे हैं. ऐसे में चीन से सांस्कृतिक घनिष्ठता बढ़ाने और वहां ब्रांड इंडिया को पॉपुलर बनाने के लिए इंडियन गवर्नमेंट रंग-बिरंगे बॉलीवुड की हेल्प ले रही है. इस मिशन की शुरुआत करते हुए रविवार को यहां इंडियन गवर्नमेंट की विभिन्न संस्थाओं और चीनी फॉरेन मिनिस्ट्री द्वारा प्रायोजित एक डांस ग्रुप ने लोगों का दिल जीत लिया. करीब 800 दर्शकों से भरे एक सभागार में इस ग्रुप के प्रर्दशन पर जोरदार तालियां बजी. 46 सदस्यों का यह ग्रुप एक महीने तक चीन के 16 शहरों में 22 प्रदर्शन करेगा.
एक गंभीर प्रयास
बिजनेस के साथ इंडियन फिल्मों और कल्चर को पॉपुलर बनाने के लिए यह भारत की ओर से पहला गंभीर प्रयास माना जा रहा है. मुंबई के इस ग्रुप के शो का नाम टिकट टू बॉलीवुड है. ये शो दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 60 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में किए जा रहे हैं.
क्या है फंडा
टिकट टू बॉलीवुड डेढ़ घंटे का परफॉरमेंस है, जिसमें बॉलीवुड के चार दशकों की झलक देखने मिलती है. खास बात यह है कि टिकट टू बॉलीवुड का जहां-जहां प्रदर्शन होगा, वहां-वहां इंडियन एंबेसी के अफसर बिजनेस सेमीनार आयोजित करेंगे. इनमें भारतीय उद्योग की जानकारी चीन के लोगों को उपलब्ध कराई जाएगी. इनमें खास तौर पर आईटी, इंजीनियरिंग, सर्विस और एग्रीकल्चर पर ध्यान दिया जा रहा है. भारत की कोशिश है कि वह चीन में अपना एक्सपोर्ट बढ़ा सके. अब तक के व्यापार संबंधों में चीन का निर्यात अधिक है. भारत चाहता है दोनों देशों के बीच इंपोर्ट व एक्सपोर्ट का संतुलन बने. चीन में भारत के राजदूत एस. जयशंकर का कहना है, चीन ने भारत को अपने यहां बाजार उपलब्ध कराने का वादा किया है.

रेलवे को ‘Pied Piper’ की तलाश

आपने बचपन में पाइड पाइपर की स्टोरी जरूर पढ़ी होगी. जर्मनी की सिटी हेमलिन के लोग चूहों के आतंक से बेहद परेशान थे. तभी सिटी में एक व्यक्ति आया. उसने लोगों से कहा कि वह शहर से सभी चूहों को भगा देगा. उसने एक म्यूजिकल पाइप तैयार किया और शहर में बजाते हुए दाखिल हुआ. उसके म्यूजिक की धुन पर शहर के सभी चूहे उसके पीछे-पीछे चलने लगे. उसने सभी चूहों को नदी में ले जाकर डूबो दिया और सिटी को चूहों के आतंक से मुक्त कराया. इन दिनों रेलवे भी चूहों से निजात पाने के लिए ऐसा ही कोई उपाए तलाशने में लगा है.
जल्द ही निकलेगा टेंडर
सेंट्रल स्टेशन पर चूहों ने रेलवे की रातों की हराम कर दी है. अबतक लाखों के सामान चट कर गए हैं. अब रेल अफसरों ने इन चूहों से निपटने के लिए नायाब तरीका खोजा है. शीघ्र ही चूहों का सफाया करने के लिए टेंडर निकाला जाएगा. डिपार्टमेंट शीघ्र ही एक कंपनी को ठेका देने के लिए ग्रीन सिग्नल दे देगा.
सिक्योरिटी सिस्टम ध्वस्त
रेलवे की सिक्योरिटी सिस्टम के फैले संजाल को ध्वस्त करने में चूहे कोई कोताही नहीं बरतते हैं. संडे को ही सेन्ट्रल के सीसीटीवी कैमरों के तार चूहों ने काट डाले थे. इससे हड़कंप मच गया. करीब ढाई माह से सेन्ट्रल के जीआरपी थाने में सिक्योरिटी के लिए लगाए गए सीसी टीवी सेट बंद पड़े हैं. पार्सल सेक्शन में रखे लगेज पर भी चूहे रियाज करते हैं और विभाग को जमकर चूना लगाते हैं. रेलवे के माल गोदामों में डे लाइट में ही गदर मचाते रहते हैं. कभी-कभी तो ये चूहे रेल कर्मियों के अलावा पल्लेदारों को काट तक खाते हैं.
रेल प्रशासन के लिए चैलेंज
रेल प्रशासन के लिए चूहे चैलेंज बन गए हैं. इन चूहों को रेलवे स्टेशनों से हटाने के लिए रेलवे डिपार्टमेंट काफी समय से प्लान बना रहा था. लेकिन प्राब्लम का कोई सटीक निदान अफसरों को नहीं सूझ रहा था. एनसीआर(उत्तर मध्य रेलवे)के अधिकारियों ने फ‌र्स्ट टाइम इन चूहों को हटाने के लिए इलाहाबाद में ठेका देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
डिपार्टमेंट सोर्सेज से मिली जानकारी के अनुसार इलाहाबाद स्टेशन के लिए सेंट्रल वेयर हाउसिंग कारपोरेशन को टेंडर दिया गया है. यह 24 महीने का कॉन्ट्रैक्ट है जिसमें ट्रैक, रेलवे यार्ड, गोदाम आदि शामिल हैं. डिप्टी सीटीएम शिवेन्द्र शुक्ला ने बताया कि सेन्ट्रल से भी चूहे हटाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर ली जाएगी.

Sunday, August 8, 2010

Updates to Contacts and a (slightly) new look for Gmail

The News Published in http://gmailblog.blogspot.com check more gmail feature


Updates to Contacts and a (slightly) new look for Gmail

Tuesday, August 10, 2010 | 10:01 AM


We're constantly reviewing user feedback about Gmail, and for a while now the number one request has been for a better contacts experience. You’ve asked us to generally make Contacts easier to use, as well as for specific improvements like sorting by last name, keyboard shortcuts, and custom labels for phone numbers. So, by popular request, we're happy to announce that an overhauled version of Gmail Contacts will be rolling out today.

Contacts now works more like the rest of Gmail, so if you know how to use Gmail, now you should automatically feel comfortable in Contacts too. And you'll see a bunch of the features you've requested, including:
  • Keyboard shortcuts (go to Contacts and hit "?" for the full list)
  • Sort by last name (look under "More actions")
  • Custom labels for phone numbers and other fields
  • The ability to undo changes you've just made
  • Automatic saving
  • Structured name fields, so you can adjust titles, suffixes, and other name components
  • A bigger, more prominent notes field

While we were at it, we also improved our layout and made it easier to get to Contacts and Tasks. You'll see these links are now up at the top left corner of your account (along with a link for "Mail" that takes you back to your inbox).


If you’re not interested in Contacts or Tasks, you can hide these links by clicking near the right edge of "Mail." Overall, there's now a smaller header area that puts the first message in your inbox about 16 pixels higher on the screen than before.

If you use Google Apps, you won't see these updates to Contacts quite yet. We’re actively working on making domain-specific features work well in the new interface and plan to make this new version of Contacts available to Google Apps customers too.

Please keep the feedback coming, we are always working hard to make Contacts, and all of Gmail, better.

Saturday, July 31, 2010

शहर की हर गली में मिलेगी डिंपी

KANPUR NEWS 30 July : सात फेरों के साथ राहुल महाजन और डिंपी ने जीवन भर साथ निभाने की कसमें खाई थी. उनकी ये कसमें चार महीनें में ही तार-तार हो गईं. राहुल महाजन ने डिंपी की इतनी पिटाई की कि वो घर छोड़ने को मजबूर हो गई. हालांकि वह फिर लौट आई. यह तो थी डिंपी की बात, लेकिन शहर में डिंपी जैसी कई लड़कियां हैं. इन लड़कियों ने घर छोड़ा नहीं बल्कि इन्हें घर से निकाल दिया गया या इतना मजबूर कर दिया गया कि वो घर छोड़ने को मजबूर हो गई.
वो मेरे स्टैंडर्ड की नहीं.
रतनलाल नगर के शोभराज केसवानी ने अपनी बेटी सारिका की शादी 13 दिसम्बर 2004 में बनारस के भरत छाबड़ा से की थी. बनारस में एकाउंट्स का काम करने वाले भरत ने शादी की पहली रात को ही सारिका की पिटाई की. इसके बाद भरत के लिए सारिका को पीटना रोज की बात हो गई. शादी के छह महीने भी नहीं बीते की भरत ने एक रात सारिका को मारपीटकर घर से निकाल दिया. उस समय सारिका के पास एक फूटी कौड़ी तक नहीं थी जिससे वो अपने घर वापस आ सकती या घर वालों को सूचना दे पाती.
रात में सड़क पर कराहती सारिका को देखकर भरत के कुछ पड़ोसी उसे घर तक छोड़ गए. सारिका के घर वालों ने कई बार भरत के घर वालों से बात करनी चाही पर वो बात करने को राजी नहीं हुए. उन्होंने डोमेस्टिक वॉइलेंस का मामला दर्ज कराया. सारिका अपनी ससुराल जाना चाहती है पर भरत का कहना है कि सारिका उसके और अपनी फैमली के स्टैंडर्ड की नहीं है. उसके घर के माली हालत इतनी अच्छी नहीं. पिता कब तक उसे रख सकेंगे. इसलिए वो कोर्ट में हर बार भरत से चीख-चीखकर घर ले जाने को कहती है.
शादी के चार साल बाद रंग बदला
किदवई नगर की मीनू की शादी चार साल पहले लखनऊ के आशीष से हुई थी. आशीष उस समय कम्पटीटिव एग्जाम्स की तैयारी कर रहा था. शादी के बाद उसका सलेक्शन आईआरएस में हो गया. ऑफीसर की पोस्ट मिलते ही आशीष ने अपना रंग बदला और मीनू को प्रताड़ित करना शुरु कर दिया. मीनू को प्रेगनेंट हुए दो महीने हुए थे. आशीष ने मीनू के पेट में इतनी जोर से लात मारी की उसका मिसकैरेज हो गया. मीनू की हालत बिगड़ते देख आशीष उसे जयपुर के एक हॉस्पिटल में एडमिट कराकर चला गया. दो दिनों बाद जब मीनू की हालत में सुधार हुआ तो उसने अपने घरवालों को सूचना दी. उसके पिता उसे लेकर घर आ गए. मीनू के पिता ने आशीष के खिलाफ मामला दर्ज कराया. लेकिन आजतक कुछ नहीं हो पाया. मीनू कहती है कि आशीष की तरफ से उसके घरवालों को आए दिन धमकियां मिलती है. वो चाहती है कि आशीष उसे अपना ले क्योंकि उसके मम्मी पापा के बाद वो दुनिया में अकेली हो जाएगी. पर आशीष उसे अपनाना नहीं चाहता. मीनू का आरोप है कि आशीष ने दूसरी शादी भी कर ली है.
ग्यारह साल तक टॉर्चर
शास्त्री नगर की सुमन की शादी रामबाबू से 12 साल पहले हुई थी. रामबाबू ने शादी के बाद से ही सुमन को पीटना शुरु कर दिया. रोज रात में रामबाबू शराब पीकर आता और सुमन को पीटता. यह सिलसिला रोज चलता रहा. इस दौरान उसे दो बेटे शिवम और शुभम हुए. बेटे एक-एक बूंद दूध के लिए रोते तो उससे देखा नहीं गया. उसने दूसरों के घरों में चौका-बर्तन शुरु किया. रामबाबू की प्रताड़ना कम नहीं हुई सुमन जब भी घरों में काम करके लौटती तो उसे सड़क पर ही पीटना शुरु कर देता. इसके बाद सुमन दोनों बेटों को लेकर मौसी के घर चली आई.
दर्ज हुआ मुकदमा
सुमन को स्वीपर की नौकरी मिल गई इस पर रामबाबू ने उसे इज्जत का हवाला देते हुए जमकर पीटा. इस बार सुमन ने उसके खिलाफ डोमेस्टिक वॉइलेंस का मुकदमा दर्ज करा दिया. पिछले आठ दिनों से सुमन का बीमार है. वह कई लोगों से उधार ले चुकी है. उसे लगता है कि उसके जीवन में सिर्फ संघर्ष ही लिखा है.

Underage driving का license है ?

Nupur Jaiswal : - स्टूडेंट्स पर स्कूल के बनाए रूल्स से कोई फर्क नहीं पड़ता. स्कूल में भले ही बाइक न लाने के इंस्ट्रक्शंस दिए जाते हों, वो करते अपनी मर्जी हैं. क्लास 8 में आते ही स्कूटी व 9 क्लास में स्पोर्ट्स लुक वाली बाइक्सस्टूडेंट्स का पैशन है.
कुछ ऐसा था हाल  Read Below More
स्कूल ओवर होते ही वहां का हाल कुछ और ही था. बाइक से एक नहीं बल्कि तीन-तीन स्टूडेंट्स राउंड लगा रहे थे, स्टंट भी कर रहे थे. कुछ बाइक में नंबर ही नहीं था.

क्या नाम है?
स्टूडेंट : हुजैफा
कौन सी क्लास में पढ़ते हो,क्या ऐज है?
स्टूडेंट-नाइंथ में पढ़ते हैं, ऐज 16 साल है.
 कब से बाइक ला रहे हो. स्कूल में चेकिंग नहीं होती, क्या तुम्हारे पास लाइसेंस है?
स्टूडेंट- लाइसेंस नहीं है. स्कूल में चेकिंग नही होती लेकिन कभी-कभी न लाने के इंस्ट्रक्शंस दिए जाते हैं. पिछले एक साल से बाइक ला रहे हैं.


क्या नाम है. कौन सी क्लास में पढ़ते हो?
स्टूडेंट- गोपाल माहेश्वरी, क्लास नाइंथ में पढ़ता हूं.
कितने साल से बाइक ला रहे हो?
स्टूडेंट- पिछले दो साल से बाइक ला रहे है.
स्कूल में चेकिंग होती है?
स्टूडेंट- कभी नहीं हुई, बाइक गेट के बाहर खड़ी होती है.


क्या नाम है. कौन सी क्लास में हो?
स्टूडेंट- अब्दुल्लाह नाम है. क्लास 8 में है.
अभी तो तुम्हारा लाइसेंस भी नहीं है, फिर कैसे बाइक ला रहे हो,ये क्या बाइक में नंबर भी नहीं है.
स्टूडेंट- मैं पिछले एक साल से बाइक ला रहा हूं. आज तक किसी ने नहीं रोका. लाइसेंस की क्या जरूरत. अब तो सभी चलाते है.

क्या नाम है. कौन सी क्लास में हो?
स्टूडेंट- जैद नाम है. क्लास टेंथ में पढ़ रहा हूं.
बाइक स्कूल में अंदर खड़ी करते हो या बाहर?
स्टूडेंट- चेकिंग होती है. लाइसेंस की जरूरत नहीं पड़ती. इसलिए गेट के बाहर ही खड़ी करते है. उसके लिए मना नहीं है.

क्या नाम है. कौन से वेहिकल से आते हो, स्कूल में लाइसेंस चेक होता है?
स्टूडेंट- प्रशांत भट्ट. बाइक से आते हैं. चेकिंग होती है.
च्छा लाइसेंस है, दिखाओ?
स्टूडेंट- हां, लाइसेंस है. लेकिन अभी लर्निग है इसको रिन्यू कराना है.

क्या नाम है. कौन सी क्लास में हो?
स्टूडेंट- पुलकित, क्लास 12 में है.
लाइसेंस है, तुम्हारी ऐज क्या है?
स्टूडेंट- 17 साल का हूं, मेरे पास फिलहाल लर्निग लाइसेंस ही है.
18 साल से पहले लाइसेंस कैसे
स्टूडेंट- लर्निग तो बन सकता है न.


Parests Should Ensure Rules Are Followed

सिटी में रूल्स की कोई वैल्यू नहीं है. सड़कों पर फरार्टा लगाते बाइक सवारों को देखकर तो यही कहा जा सकता है. वैसे कई टीन एजर्स ऐसे भी हैं जो बहुत सेफली ड्राइव करते हैं, लेकिन फिर भी हादसे होते हैं. ऐसे हादसों में कई बार उनकी जान तक चली जाती है. सिर्फ बाइक व कार ड्राइव करने वालों के साथ ही हादसे नहीं होते साइकिल से जाने वालों को भी भयानक हादसों का शिकार होना पड़ जाता है. सबसे पहले जरूरी है यहां के ट्रैफिक को कंट्रोल करना, किसी तरह की कोई स्पीड लिमिट न होने के चलते सभी अपनी रफ्तार से ड्राइव करते हैं. एक बाइक पर तीन-तीन लोग सवार होकर ट्रैवेल करते हैं, लेकिन उनको कोई नहीं रोकता यहां तक पुलिस भी नजर अंदाज कर देती है. कई बार चौराहों से ही पुलिस नदारत रहती है जिससे अक्सर ट्रैफिक जाम लग जाता है. ऐसे में कई बार मारपीट तक होने लगती है. अगर स्ट्रिक्ट रूल बन जाए और उसको फॉलो करना अनिवार्य कर दिया जाए तो कुछ हद तक यहां के हालात में सुधार हो सकता है. वहीं स्कूल में बाइक लेकर आने वाले स्टूडेंट्स पर स्कूल से ज्यादा पैरेंट्स को सख्ती करनी होगी. स्टूडेंट्स को भी समझना होगा कि तेज ड्राइव करना व रेस लगाने से उन्हीं की जान को खतरा है. अपनी सेफ्टी के लिए यही बेहतर है कि खुद ही अलर्ट हो जाए.

KESCO ने बनाया नया record

गर्मी व बारिश से निपटने के लिए केस्को की तैयारी की पोल खुल गई है. केवल जुलाई महीने में ही दो सौ ट्रांसफॉर्मर फुंक गए. केस्को की हिस्ट्री में कभी भी दो सौ ट्रांसफॉर्मर नहीं फुंके हैं. इतने अधिक ट्रांसफॉर्मर फुंकने से केस्को ऑफिसर्स के माथे पर चिंता की लकीरें उभरी हैं.
अब भगवान से प्रार्थना करो
ईश्वर से शुक्र मनाइए कि आपके इलाके का ट्रांसफॉर्मर अब डैमेज न हो. अगर ऐसा हुआ तो बिजली के साथ ड्रिकिंग वाटर क्राइसिस भी झेलनी पड़ेगी, क्योंकि केस्को के स्टॉक में ट्रांसफॉर्मर निल हो चुके हैं. सबसे अधिक डिमांड वाले 400 केवी के ट्रांसफॉर्मर भी गिनती के ही बचे हैं. जिस स्पीड में ट्रांसफॉर्मर्स का जलना जारी है, वह जबरदस्त बिजली संकट का साफ इशारा कर रहे हैं. केस्को के चीफ इंजीनियर केशवराम ने बताया कि डैमेज ट्रांसफॉर्मर के रिपेयर में तेजी लाई गई है. बारिश के कारण संख्या बढ़ी है. बावजूद इसके 24 घंटे के भीतर ट्रांसफॉर्मर बदले जा रहे हैं.

ATM में लगी आग, लाखों के नोट खाक

थर्सडे मिड नाइट गुमटी नंबर पांच में एक बैंक एटीएम से अचानक आग की लपटें उठने लगी. लपटों मे घिरा एटीएम पूरी तरह जलकर खाक हो गया और उसने रखी लाखों की रकम भी जल गई. आग लगने की वजह शार्ट-सर्किट से बतायी जा रही है.
अचानक उठीं लपटे
नजीराबाद के गुमटी नंबर पांच एरिया में बैंक आफ बड़ौदा के शाखा परिसर के एक एटीएम मशीन से थर्सडे रात दो बजे अचानक धुंआ निकलने लगा. अंदर सो रहे सेक्योरिटी गार्ड छेदीलाल के होश फाख्ता हो गए और उसने शोर मचाना शुरू कर दिया. लोग कुछ समझ पाते तबतक भीषण आग की लपटे उठने लगी और एटीएम मशीन राख हो गया. हादसे के वक्त एटीएम मशीन खाली था आग की लपटे थोड़ी दूरी पर मौजूद एक रेडीमेड शो रूम तक जा पहुंची. भीषण आग में शोरूम की एसी ने भी आग पकड़ ली. आधी रात मौके पर पहुंचे फायर आफिसर्स ने शार्ट-सर्किट की वजह से आग लगने की बात कही है. सूत्रों के मुताबिक एटीएम में तीन लाख से भी ज्यादा का कैश था. नकदी का कितना नुकसान हुआ इस बारे में बैंक प्रबंधन अभी नहीं बता पा रहा है. बैंक अधिकारियों का कहना हैं कि एटीएम मशीन काटने वाले लोग आ जाएंगे और उसे काटा जाएगा, तभी नुकसान हुई नगदी का सही आकलन लग पाएगा.

Thursday, July 15, 2010

राजनीति की नई स्टाइल

अपने प्रचार के लिए राजनेता क्या-क्या हथकंडे नहीं अपनाते. फिर चाहे वे महिला हों या पुरुष, लेकिन चेक गणराज्य में ऐसा कुछ हुआ है, जो अब तक कहीं नहीं देखा गया. यहां महिला सांसदों ने देश की राजनीति पर दबदबा दिखाने के लिए 2011 के कैलेंडर पर अपनी ग्लैमरस तस्वीरें छपवाई हैं. इस कैलेंडर में पब्लिक अफेयर्स पार्टी की चार महिला सांसदों की कम कपड़ों में उत्तेजक तस्वीरें छपी हैं. इन कैलेंडरों को बेचकर मिलने वाली रकम का इस्तेमाल चैरिटी के लिए किया जाएगा. वर्तमान में चेक संसद में महिला सांसदों की संख्या पिछले सभी चुनावों के मुकाबले सबसे ज्यादा है. इन सभी महिलाओं ने कम से कम दो फोटो खिंचवाए हैं. इन्हीं में से एक महिला सांसद लेंका एंड्रसोवा ने कहा कि हमने लोगों को आकर्षित करने के लिए ऐसा किया है. हम लोगों को बता देना चाहती हैं कि राजनीति में महिलाओं का दौर फिर से आ चुका है.
चेक संसद के निचले सदन की डिप्टी स्पीकर 32 वर्षीया कैट्रीना क्लासनोवा ने बैड पर सेक्सी तस्वीर खिंचवाई है. पब्लिक अफेयर पार्टी की 42 वर्षीया सांसद मार्केटा रीडोवा ने कहा कि राजनीति में महिलाओं का वर्चस्व बढ़ रहा है. लोगों को यह बताने में भी क्या बुराई है कि हमें सेक्सी दिखने में भी कोई डर नहीं लगता.

जब चाहें, सिलेंडर पाएं

अब आपको गैस सिलेंडर पाने के लिए इंतजार करने की जरुरत नहीं होगी. क्योकि पेट्रोलियम मिनिस्ट्री एक नई स्कीम शुरू करने जा रहा है जिसके तहत आपके बताए दिन और समय पर सिलेंडर की डिलीवरी होगी. फिलहाल इस सेवा की शुरुआत दिल्ली मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और बंगलुरू में की जा रही है. अगले चरण में इस सेवा का विस्तार 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में किया जाएगा.
लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज
यह फ्री सर्विस नहीं है. इसके लिए टाइम भी फिक्स है अगर आप सुबह 8 बजे से लेकर 6 बजे के बीच अपने सिलेंडर की डिलीवरी चाहते हैं तो आपको 25 रुपए ज्यादा देने होंगे लेकिन अगर आप सुबह आठ से पहले या शाम के छह बजे के बाद सिलेंडर की डिलीवरी चाहते हैं तो आपको 50 रुपए ज्यादा देने होंगे. साथ ही अगर सिलेडंर की डिलीवरी तय समय पर नहीं होती तो कंपनी आपको 20 रुपये का की छूट भी देगी.
टाइम और डेट भी आपका
पहले सिलेंडर बुक कराने के दो या तीन दिन बाद डिलीवरी होती थी जिसके कारण उपभोक्ताओ को परेशानी का सामना करना होता था. कई बार सिलेंडर बुक कराने के डिलीवरी के समय उपभोक्ता घर पर नहीं होता था जिसके कारण सिलेंडर वापिस चला जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. आप सिलेंडर बुक कराते समय कंपनी के एजेंट को सिलेंडर डिलीवरी की डेट और टाइम बता कर डिलीवरी ले सकते है.

जंक फूड जेनरेशन

ब्रिटेन पहले ही वहां पर बच्चों में बढ़ते मोटापे से परेशान है. यहां पर 5 से 13 साल का हर तीसरा बच्चा मोटापे से परेशान है. इस बीच एक रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि यहां पर हर साल एक बच्चा भारी मात्रा में जंक फूड कंज्यूम करता है. इसको देखते हुए अगर इस जेनरेशन को जंक फूड जेनरेशन कहा जाए तो कोई भी अतिशयोक्ति नहीं होगी. हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि इस रिपोर्ट के बावजूद गवर्नमेंट उस वॉचडॉग को हटाने जा रही है जो पिछले एक दशक से जंक फूड कंपनीज को रेगुलेट करने का काम कर रही थी. 2000 में जब यह खबर आई थी कि बड़ी संख्या में लोग फूड बॉर्न डिजीज की वजह से मर गए.

उधर कुछ दिन पहले ही डॉक्टर्स ने कहा था कि इन फूड्स पर फैट टैक्स लगा देना चाहिए और पैकेट्स पर सिगरेट स्टाइल में वॉर्निग भी चस्पा होनी चाहिए कि किस फूड का ज्यादा सेवन नुकसान देह हो सकता है. बगल में दिए गए टेबल में दिखाया गया है बच्चे किस रूप में कितना जंक फूड खा रहे हैं.

खून नहीं पीता था ड्रैकुला

पश्चिमी जगत में सदियों से ड्रैकुला लोगों की जिज्ञासा का विषय रहा है. खून के प्यासे इस दरिंदे पर न जाने कितनी कहानियां, कितने किस्से गढ़े गए. उपन्यासों से लेकर फिल्मों तक, ड्रैकुला का डर लोगों को रोमांचित करता रहा. लगभग पांच पीढि़यां, तो ड्रैकुला की कहानियां सुनकर ही बड़ी हुई हैं. सिलसिला बदस्तूर जारी है. बच्चों को आज भी ड्रैकुला की कहानियां सुनाई जाती हैं. वह आज भी उपन्यासों और फिल्मों में अमर बना हुआ है. क्या है ड्रैकुला की सच्चाई?
ऑस्ट्रिया में लगी एक प्रदर्शनी ने इस रहस्य पर से पर्दा उठाने की कोशिश की है. इस प्रदर्शनी में वह सारे प्रमाण मौजूद हैं, जो ड्रैकुला के इतिहास को बयां करते हैं. ड्रैकुला पर केंद्रित इस विशेष प्रदर्शनी के आयोजक माग्रेट रॉक बताते हैं कि यह यह किस्सा 15वीं सदी से शुरू हुआ. 1456 से 1462 के मध्य वलीशिया (रोमानिया) में व्लाद तेपेस नाम का एक युवा शासक था, जो अपने विरोधियों के लिए बेहद क्रूर था. उसने लगभग 50 हजार लोगों को बुरी तरह मौत के घाट उतारा था. बस, यहीं से उसे लोगों ने व्लाद द इम्पेलर और व्लाद ड्रैकुला कहना शुरू कर दिया. इसके बाद वह खून के प्यासे दरिंदे के रूप में भय का पर्याय बना दिया गया. रॉक कहते हैं कि व्लाद अपने विरोधियों को बहुत बुरी मौत देता था, लेकिन वह खून नहीं पीता था. वह सभी के लिए क्रूर भी नहीं था. उसकी प्रजा उसे हीरो मानती थी.

रॉक का मानना है कि कुछ यूरोपीय इतिहासकारों ने जानबूझकर या अनजाने में व्लाद को खून पीने वाला दरिंदा घोषित कर दिया और यह किस्सा सदियों के लिए अमर हो गया. आधुनिक जगत में सन 1897 में ड्रैकुला पर पहला उपन्यास लिखा गया. ब्राम स्टोकर के इस उपन्यास का शीर्षक ही ड्रैकुला था. इसके बाद न जाने कितने उपन्यास और कितनी ही फिल्में अब तक इस किरदार को जीवंत बनाए हुए हैं.

Tuesday, July 13, 2010

Save tigers before it’s too late

अगर हम यूं ही अनदेखी करते रहे, तो एक दिन आएगा जब धरती पर बाघ का नामोनिशान तक नहीं बचेगा. इंडोनेशियन फॉरेस्ट्री मिनिस्ट्री द्वारा रविवार को जारी की गई रिपोर्ट में सामने आया है कि पूरे व‌र्ल्ड में अब केवल 3200 बाघ ही बचे हैं.
बचीं छह प्रजातियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में बाघों की मात्र छह प्रजातियां बची हैं. सुमात्राई, बंगाल टाइगर, अमूरसी, इंडो-चाइनीज, दक्षिणी चीनी और मलेशियाई. यह रिपोर्ट सोमवार को यहां बाघ बचाओ अभियान के लिए सोमवार को हुई 13 देशों के सदस्यों की बैठक से एक दिन पहले जारी की गई.
तस्करी बनी अभिशाप
रिपोर्ट के अनुसार, बाघों के प्राकृतिक आवास नष्ट होने के कारण उनकी संख्या तेजी से घट रही है. गैर कानूनी तौर पर इनका शिकार और तस्करी भी किसी अभिशाप से कम नही है. लोग बाघों के रहने के स्थान जंगलों को उजाड़कर अपने रहने के ठिकाने बना रहे हैं. बाली में हुई बैठक का उद्घाटन इंडोनेशिया के वन मंत्री जुल्फिकार हसन ने किया. इस मुद्दे पर अगली बैठक इस साल सितंबर के महीने में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में 15 से 18 तारीख तक आयोजित होगी.

Demat matters a lot

What is Demat account
डीमैट अकाउंट को डीमैटरीयलाइज्ड अकाउंट कहते हैं. किसी भी इंडियन सिटिजन को सेबी में लिस्टेड स्टॉक्स के ट्रेडिंग के लिए डीमैट अकाउंट मेनटेन करना आवश्यक होता है. डीमैट अकाउंट में शेयर्स और सिक्यूरिटीज इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में रहते हैं. ट्रेडिंग के लिए ब्रोकर के पास रजिस्ट्रेशन के समय यह अकाउंट खोलना पड़ता है. इसके लिए पैन कार्ड होना जरूरी है, साथ में एक इंटरनेट पासवर्ड और ट्रांजैक्शन पासवर्ड होना चाहिए. एक बार ट्रांजैक्शन कंप्लीट होने के बाद शेयर्स की परचेजिंग और सेल अपने आप अकाउंट में मेनटेन होती रहती है.
How to open
आप डीमैट अकाउंट किसी बैंक, ब्रोकर्स और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन में ओपन कर सकते हैं. अगर बैंक में आपका सेविंग अकाउंट है तो डीमैट अकाउंट ओपन करने के लिए बैंक अट्रैक्टिव रेट ऑफर करते हैं. अगर आप स्टॉक्स की ट्रेडिंग ऑनलाइन करना चाहते हैं तो आपको एक डीपी और ट्रेडिंग अकाउंट उस ब्रोकर या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट के पास खोलना होता है.
Who is DP
डीपी इनवेस्टर्स और डिपॉजिटरी के बीच मीडिएटर की तरह काम करता है. डीपी एक रेगुलर इंटरवल में आपको कई तरह की फैसिलिटी देते हैं. जैसे-आपके अकाउंट में कितने शेयर्स बैलेंस हैं, ट्राजैक्शंस, स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेड का इलेक्ट्रॉनिक सेटलमेंट और बैंक लोन के लिए शेयर्स गिरवी रखना. इसके लिए डीपी को मेंटिनेंस चार्ज देना पड़ता है.
Benefit to company
डीपॉजिटरी सिस्टम से न्यू इश्यूज की कॉस्ट कम की जा सकती है. इससे रजिस्ट्रार, ट्रांसफर एजेंट्स और कंपनी के सेक्रेटेरियल डिपॉर्टमेंट की इफिसियेंसी तेज होती है. यह कम्यूनिकेशन की बेटर फैसिलिटी प्रोवाइड करता है और शेयर होल्डर्स या इनवेस्टर्स को टाइमली सर्विस प्रोवाइड कराता है.
Benefit to investor
डिपॉजिटरी सिस्टम से फिजिकल सर्टिफिकेट लेने में आने वाला रिस्क कम होता है, जैसे-चोरी, फोर्जरी या डॉक्यूमेंट्स का फट जाना. यह ट्रांसफर सेटलमेंट को आसान बनाता है और रजिस्ट्रेशन में होने वाला डिले कम होता है. शेयर्स के सेल होने पर इससे हमें पेमेंट टाइमली मिल जाता है. इसके कारण शेयर ट्रांसफर पर स्टांप ड्यूटी भी नहीं देनी होती है. जो जनरल केस में 0.5 परसेंट है.
Benefit to brokers
ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ने पर ब्रोकर्स को ज्यादा प्रॉफिट होता है. इससे फॉर्जरी के चांस कम होते हैं व ट्रेड और प्रॉफिट दोनों ही बढ़ते हैं. ट्रेडिंग और इनकम वॉल्यूम में जितनी बढत होती है उसमें उतना ही ज्यादा लाभ ब्रोकर्स को होता है.

How do you respond?

कुछ लोग मुस्कुराते हुए आप से कांफिडेंटली मिलते हैं वहीं कुछ लोग अपनी खुद की बनाई परेशानियों में उलझे और दूसरों पर गुस्सा करते दिख जाते हैं. दरअसल इन दोनों तरह के लोगों के सामने सिचुएशन एक जैसी ही होती है लेकिन उनका रिएक्शन डिफरेंट होता है. अपने रिएक्शन के साथ ही ये तय कर लेते हैं कि आज का दिन उनके लिए सक्सेसफुल होने वाला है या स्ट्रेसफुल. आइए इसे एक एग्जाम्पल के जरिए समझते हैं. आप ऑफिस जाते हैं और आपका एक को-वर्कर आपको घूरता है और आपके गुड मॉर्निग का जवाब भी नहीं देता है. आप किस तरह रिस्पांड करेंगे?

क्या आपके दिमाग में कुछ ऐसे सवाल आ रहे हैं.....
4मैंने उसके साथ क्या गलत किया है?
4उसकी परेशानियों के लिए मैं ही जिम्मेदार हूं क्या? मेरे ही साथ उसने ऐसा बिहेव क्यों किया?
4वह मुझे पसंद क्यों नहीं करता? यहां मुझे कोई पसंद नहीं करता.
4ठीक है, मैं उससे दोबारा कभी बात करने नहीं जाऊंगा.
4ऑफिस के ऐसे दूसरे लोगों से भी दूर ही रहूंगा.
या फिर आप इस तरह से सोच रहे हैं..
4आप इसे पर्सनली नहीं लेंगे. यह समझेंगे वह खुद किसी परेशानी में भी हो सकता है.
4आपके अंदर कोई रिएक्शन नहीं होगा और आप कूल बने रहेंगे.
4को-वर्कर से बिना बातचीत के सीधे अपने काम में लग जाएंगे.
..आप इन दोनों में से खुद को किससे रिलेट कर रहे हैं ये पूरी तरह आप पर डिपेंड करता है. एक का रिजल्ट पॉजिटिव होगा और आपका दिन बेहतर साबित होगा वहीं दूसरा रिस्पांस पूरे दिन को स्ट्रेसफुल बना सकता है.

Situation+Thought =Response
नेक्स्ट टाइम जब इससे सिमिलर कोई सिचुएशन आए तो गहरी सांस लें और रियलाइज करें कि थॉट्स आपके कंट्रोल में
हैं. किसी भी सिचुएशन का आपके लिए कोई मतलब नहीं है जब तक कि आप उस पर रिएक्ट नहीं करते. रिएक्शन के बाद सिचुएशन पॉजिटिव हो सकती है, निगेटिव हो सकती है या ज्यों की त्यों बनी रह सकती है. हो सकता है कि आप सिचुएशन के कंट्रोल में आ जाएं और निगेटिव रिस्पांस देने लगें या खुद सिचुएशन को कंट्रोल में ले लें और पीसफुल तरीके से रिएक्ट करें.
We don’t respond automatically
लोग अक्सर सोचते हैं कि हमारे रिस्पॉन्स सडेनली और ऑटोमैटिकली होते हैं जिसमें हमारा कोई रोल नहीं होता. लेकिन ऐसा नहीं है. ये हमारे थॉट्स होते हैं जो हमारे रिस्पॉन्स को डिसाइड करते हैं. हम किस तरह सोचते हैं, यह पूरी तरह हमारे कंट्रोल में होता है. हम लोगों को नहीं बदल सकते लेकिन उनको लेकर अपने रिएक्शन बदल सकते हैं.

Compartment exam 15-16 को

यूपी बोर्ड के हाईस्कूल स्टूडेंट्स का कम्पार्टमेंट एग्जाम 15 व 16 जुलाई को ऑर्गेनाइज किया जाएगा. पहली बार हो रहे इस एग्जाम में 1691 स्टूडेंट्स शामिल होंगे. यूपी बोर्ड में इस बार से लागू किए गए कम्पार्टमेंट एग्जाम की तारीख घोषित कर दी गई है.
इस एग्जाम में 15 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स एलिजिबल थे. इसके बाद भी सिर्फ 1691 स्टूडेंट्स ने ही अप्लाई किया. अधिकारियों की मानें तो एग्जाम के बारे में कई स्टूडेंट्स को प्रॉपर जानकारी न होने से ऐसा हुआ है. मात्र 885 ब्वॉयज और 816 ग‌र्ल्स ही एग्जाम देंगे. डीआईओएस एसएस सिंह ने बताया कि ब्वॉयज का सेंटर बीएनएसडी इंटर कॉलेज चुन्नीगंज में रखा गया है, जबकि ग‌र्ल्स के लिए कैलाश नाथ बालिक इंटर कॉलेज माल रोड में व्यवस्था की गई है. एग्जाम सुबह साढ़े सात बजे से शुरू होगा. स्टूडेंट्स को नियत तारीख को सब्जेक्ट के अकॉर्डिग टाइम पर पहुंचना होगा. अभी तक जिसके एडमिट कार्ड नहीं पहुंचे हों, वो अपने एडमिट कार्ड जीआईसी चुन्नीगंज से कलेक्ट कर सकते हैं.

सिटी की टिया top six में पहुंची

सुनिधि चौहान को अपना ऑयडल मानने वाली सिटी की टिया अपनी बेहतरीन सिंगिंग की बदौलत इंडियन ऑयडल की टॉप सिक्स फाइनलिस्ट बन चुकी है. फिलवक्त वो मुम्बई में अपनी फैमिली के साथ सेटल है. टिया का सिटी से पुराना रिश्ता है.
Happy b’day to you
मानस विहार जेके कॉलोनी की टिया के फादर दिपन कुमार प्लेबैक सिंगर हैं और मदर कोलकाता यूनिर्वसिटी में टीचर हैं. दोनों बाहर रहते हैं, इसलिए टिया मुम्बई में सेटल हो गई. लेकिन बचपन बुआ के घर पर ही बीता. हाई स्कूल तक का एजूकेशन टिया ने किदवई नगर के सेंट थॉमस स्कूल से पूरी की. अपने फादर के ड्रीम को पूरा करने के लिए उसने इस कॉम्पटीशन में पार्टिसिपेट किया. टिया के बड़े भाई का कहना है कि इंडियन ऑयडल के प्लेटफॉर्म पर उसे अन्नू मलिक का बहुत सपोर्ट मिला. टिया का बर्थ डे आज वाकई खास होगा, इंडियल ऑयडल के प्लेटफार्म पर होगा सेलिब्रेशन.

स्वदेश की चाहत

पाकिस्तान में हिंदुओं को होने वाली मुश्किलों के मामले तो पहले भी आते रहे हैं, पर अब मामला और बिगड़ता जा रहा है. वहां हिंदुओं के साथ-साथ सिखों का भी फाइनेंशियल, रिलीजियस और सोशल एक्सप्लायटेशन हो रहा है. इनकी संख्या तकरीबन 15 से बीस लाख है. देश के विभाजन के समय यह लोग वहीं रह गए थे. अब ये वापस भारत आना चाहते हैं. वैसे पाकिस्तान से हिंदुओं और सिखों का पलायन पहले भी होता रहा है. वहां से बड़ी संख्या में आए ये लोग गुजरात, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, पंजाब, दिल्ली और अन्य राज्यों में अपने अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं. जालंधर में ऐसे तकरीबन दो सौ परिवार रहते हैं. उन्हें यहां रहते दस से पंद्रह साल हो गए हैं. वह भारत की नागरिकता दिए जाने की मांग कर रहे है. सीनियर बीजेपी लीडर और सांसद अविनाश राय खन्ना की अगुवाई में पार्टी ने एक कमेटी गठित की है. यह ऐसे लोगों की प्रॉब्लम्स दूर करने की कोशिश करेगी. खन्ना ने प्रत्येक विस्थापित परिवार को दो हजार रुपए दिए जाने की मांग पंजाब गवर्नमेंट से की है. बीजेपी इन लोगों को नागरिकता दिए जाने की भी मांग कर चुकी है. पाकिस्तान के पेशावर से 1998 में परिजनों सहित जालंधर आए सम्मख राम की बातों में दर्द साफ झलकता है.
कोई नहीं सुनता
सम्मख राम ने कहा कि वहां रह रहे लोगों को धार्मिक आजादी नहीं है. यही कारण है कि कराची और स्यालकोट के तकरीबन 15 से बीस लाख हिंदू और सिख पाकिस्तान छोड़ कर अपने मुल्क लौट आना हैं. कराची से अपना घर बार छोड़ कर यहां आए 70 साल के बिजनेसमैन मुल्कराज ने कहा गवर्नमेंट की शह पर वहां मंदिर और गुरुद्वारों को तोडा जाता है. उन्होंने कहा कि मेरे भाई का बिजनेस सिर्फ इसलिए बंद करा दिया है क्योंकि मैं यहां भारत में हूं. मुल्कराज ने कहा कि हिंदू और सिख वोट नहीं दे सकते. उनके लिए अलग से एक इसाई सांसद तय कर दिया जाता है, जो उनकी समस्याओं को सुनता है. स्यालकोट से यहां आए ठक्कर सपाल ने कहा कि हिंदुओं और सिखों के लिए वहां श्मशान तक नहीं है. जो हैं भी वह शहर से तकरीबन तीन से चार सौ किलोमीटर दूर. सम्मख कहते हैं कि हिंदुओं को तो छोड़िए जितनी आजादी हिंदुस्तान में मुसलमानों को हैं उतनी आजादी वहां (पाक में) के मुसलमानों को भी नहीं है.
ज्यादतियों की इंतेहा
वहां पर ज्यादतियों का आलम क्या है इसका अंदाजा इस घटना से लगाया जा सकता है कि वहां के सिंध प्रांत में एक हिंदू लड़के ने एक मस्जिद के बाहर लगे कूलर से पानी पी लिया. इस बात से नाराज प्रभावशाली कबायलियों ने हमले किए और अनेक हिंदू परिवारों को घरबार छोड़ कर भागना पड़ा.

पॉल बाबा की जय!

 फीफा व‌र्ल्ड कप का टाइटल तो स्पेन को मिला, पर पॉल ऑक्टोपस को कहीं ज्यादा सुर्खियां मिलीं. ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी की सभी प्रेडिक्शंस बिल्कुल सटीक साबित हुई हों. पॉल की सभी आठ प्रेडिक्शंस सच साबित हुई. पॉल के इस कमाल पर बॉलीवुड स्टार्स भी उस पर फिदा हो गए हैं. स्पेन की जीत के बाद बॉलीवुड के सितारों ने ट्वीट पर पॉल के लिए कुछ इस तरह ट्वीट्स कीं..
 Some Tweets on Twitter ---->>




Paulie Baba zindabad !! Didn’t kick a single ball and lifted WorldCup..
-Amitabh Bachchan

Paul proved more powerful than me. Congratulations Spain! Well done. A well deserved win. Dear Paul, aap purush nahi... Octopus ho.
-Aamir Khan
Why do I need to know paul’s predictions, I have john the octopus! He predicted rt from d start spain would win.They did! Yay!
-Bipasha Basu
And if all else fails, Paul deserves the golden boot.. All 8 of them.
-Mandira Bedi
So impressd with Pauls predictions tht i wanna bring him down 4 next yrs Ipl4,wil help 2 kno how Rajasthan Royals wil fare be4hand!;) ;)ha
- Shilpa Shetty
Octopus baba tusi great ho!! Congratulations spain you deserved to win!! Goodnight
-Yuvraj Singh
No Indian astrologer has yet managed a 100% track record like him. Congrats2Spain. Trivandrum is celebrating!

Real Rajneeti in Allahabad

कैबिनेट मिनिस्टर नंद गोपाल गुप्ता उर्फ नंदी अपने चंद समर्थकों के साथ घर से करीब पचास मीटर दूरी पर स्थित मंदिर में मत्था टेकने के लिए निकले थे. वह घर से निकल कर चंद कदम की दूरी ही तय कर पाए थे कि अचानक एक ब्लास्ट ने पूरे मोहल्ले को दहला दिया. ब्लास्ट सुनकर जब तक लोग मौके पर पहुंचते मंत्री के अलावा छह और लोग गंभीर रूप से जख्मी होकर स्पॉट पर गिर चुके थे. ब्लास्ट इतना जबर्दस्त था कि वहां खड़ी तीन अन्य गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए. आनन-फानन में सभी घायलों को जीवन ज्योति नर्सिग होम पहुंचाया गया. देर शाम तक तीन लोगों की हालत गंभीर बनी हुई थी. इस घटना से जिले ही नहीं प्रदेश के अफसरों को भी हिलाकर रख दिया है. कुछ ही घंटों के भीतर डीजीपी कर्मवीर सिंह और प्रमुख सचिव गृह फतेह बहादुर सिंह यहां पहुंच गए.
घायलों में एक रिपोर्टर भी
शहर दक्षिणी से बसपा के टिकट पर विधायक बनने वाले नंद गोपाल गुप्ता उर्फ नंदी सिटी के बहादुरगंज एरिया में रहते हैं. वह जब भी वह सिटी में होते हैं, सुबह मंदिर में दर्शन करने के बाद स्थानीय लोगों की प्रॉब्लम सुनते हैं. नहाने के बाद वह घर से बाहर निकले व मंदिर की तरफ बढ़े. नंदी घर से चंद कदम ही आगे बढ़े थे कि अचानक पास खड़ी बाइक में ब्लास्ट हो गया. एडीजी बृजलाल के मुताबिक नंदी के घर के समीप खड़ी एक मोपेड में एक्सप्लोसिव को फिट किया गया था.

Monday, June 21, 2010

Just formality

पाकिस्तान और बांग्लादेश की टीमें एशिया कप के फाइनल से बाहर हो चुकी हैं और मंडे को अब इनके बीच होने वाला मुकाबला महज फॉर्मेलिटी ही रह गया है, लेकिन इसके बावजूद दोनों टीमें अपनी रेपुटेशन बचाने के इरादे से उतरेंगी. इस वर्थलेस मैच में पाकिस्तान अपने कुछ सीनियर प्लेयर्स को रेस्ट देकर युवाओं को आजमा सकता है. वहीं बांग्लादेश की चिंता उसका मिडिल ऑर्डर है. आफरीदी के मुताबिक टीम मैनेजमेंट और खुद वो भी चाहते हैं कि शोएब 2011 व‌र्ल्ड कप टीम का हिस्सा हों,

आम की ये मिठास असली नहीं नकली है

समर सीजन में फलों के राजा आम की मिठास सभी की फेवरिट होती है. लेकिन ये मिठास आपको कितनी महंगी पड़ सकती है शायद आपको इसका अंदाज भी नहीं. आम की ये मिठास असली नहीं नकली है. कैल्सियम कार्बाइड से पका आम आपको सांस से लेकर कैंसर जैसी बीमारियों का शिकार बना सकता है. सिर्फ 15 रुपए किलो कैल्शियम कार्बाइड से 200 किलो आम कुछ ही घंटो में पकाया जा सकता है. 1954 से कैल्शियम कार्बाइड बैन है लेकिन आज खुले आम इसका यूज फलों और सब्जियों को पकाने में किया जा रहा है.
एक्सपर्ट्स की माने तो कैल्शियम कार्बाइड से आर्सेनिक और फास्फोरस होता है. जिससे पके आम खाने से आपको सांस, ब्रीदिंग प्राब्लम, चक्कर, उल्टी, सिर दर्द, नसे खराब होना, कैंसर और नर्वस डिसीसेज हो सकती हैं.
अगर आम की डंडी हरी है और वो ऊपर से हरा और नीचे से पीला है तो उसे कैल्शियम कार्बाइड से पकाया गया है. ऐसे आम में कहीं कहीं पर व्हाइट पाउडर भी नजर आता है. दशहरी, चौसा, सफेदा और लंगड़ा मार्केट में अभी से अपनी मिठास घोल रहे हैं. जबकि हुस्नआरा, आम खास, लंगड़ा लेट वेराइटी के आम हैं. लेकिन मार्केट में ये आसानी से मिल रहे हैं. इन सभी वैराइटीज को कैल्शियम कार्बाइड से पकाया जा रहा है.
हैलट आईसीयू इंजार्च डॉ. आरती लाल चंदानी बताती हैं कि कैल्शियम कार्बाइड से पका आम कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है. वहीं फिजीशियन डॉ. संजय मेहरोत्रा बताते हैं कि कई बार कैल्शियम कार्बाइड से पके फल खाने से ब्रीदिंग प्राब्लम और सांस की प्रॉब्लम हो जाती है.
डॉक्टर्स का कहना है कि कैल्शियम कार्बाइड की सहायता से पके आम को नहीं खाना चाहिए. सिटी में उन सभी वैराइटी के पके आम मिल जाएंगे, जिनका पकने का अभी मौसम भी नहीं हुआ है.

फुटबाल सी उछली DTH और केबिल कनेक्शनों की संख्या

फीफा व‌र्ल्ड कप का जादू कानपुराइट्स के सिर चढ़कर बोल रहा है. स्पो‌र्ट्स लवर्स इस फास्ट और एक्शन पैक्ड गेम को एंज्वॉय करने का चांस मिस नहीं करना चाहते. इसे फुटबाल की दीवानगी ही कहेंगे जो पिछले दो महीनों में डीटीएच और केबल कंज्यूमर्स की संख्या डेढ़ गुना तक बढ़ गई है.
फीफा फीवर
मनोरंजन कर विभाग के आंकड़ों के अनुसार सिटी में 27,127 डीटीएच और 1.54 लाख केबल कंज्यूमर्स हो गए हैं, जबकि लास्ट फाइनेंशियल इयर में डीटीएच कंज्यूमर्स 21,012 और 1.10 लाख केबल कंज्यूमर्स थे. कंज्यूमर डीटीएच सर्विस को ज्यादा प्रेफर कर रहा है. इसकी मुख्य वजह है केबल की तुलना में ज्यादा चैनल्स. डिप्टी कमिश्नर राम संवारे ने बताया कि केबल की तुलना में डीटीएच सर्विस लाइफ टाइम होती है. जिसे कहीं भी मूव कराया जा सकता है. दूसरा, रिचार्ज कूपन के माध्यम से मनमाफिक रिचार्ज फैसिलिटी लोगों को पसंद आ रही है. पब्लिक को अट्रेक्ट करने के लिए कुछ कंपनियों ने डिश एंटीना और सेट टाप बॉक्स के दाम घटा दिये हैं. जबकि कई कंपनियां कुछ चैनल्स के लिए फ्री रिचार्ज की सुविधा मुहैया करा रही हैं. जवाहर नगर, गुमटी, गुरूदेव पैलेस, आर्य नगर, आचार्य नगर, जूही, लाजपत नगर, विनायकपुर आदि इलाकों में कुछ केबल ऑपरेटर्स ने व‌र्ल्ड कप तक मंथली रेंटल तक घटा दिया है.

आफत बनकर आती है बरसात

एक ओर जहां मानसून का लोगों को बेसब्री से इंतजार है, वहीं बरसात का नाम सुनते ही वार्ड-57 (नवीन नगर) में रहने वाले लोगों की बेचैनी बढ़ जाती है. ड्रेनेज सिस्टम सही न होने के कारण बरसात उनके लिए किसी आफत से कम नहीं साबित होती. एरिया में जबरदस्त वाटरलागिंग होती है. दुकानों के अंदर तक पानी भरने से शॉपकीपर्स को भी नुकसान उठाना पड़ता है. अंधेरे में डूबी रहने वाली खस्ताहाल रोड से उनकी परेशानियां और भी बढ़ जाती है.
रावतपुर गांव रोड पर रहने वाले राजेश अग्निहोत्री ने कहा कि बारिश में रोड तालाब बन जाती है. घर पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है. रफ रोड की वजह से बाइक, रिक्शे पलट जाते हैं. शॉपकीपर अशोक कुमार के मुताबिक बारिश नुकसान लेकर आती है. रोड पर ही नहीं दुकानों के अंदर तक पानी भरने से सामान खराब हो जाता है. शिक्षक नगर में रहने वाले टीचर श्रीकांत शुक्ला गुस्से में कहते है कि यहां सही क्या है. वाटर सप्लाई व सीवेज सिस्टम है नहीं, सड़कें पैदल चलने लायक भी नहीं है. समस्याएं ही समस्याएं है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है. वहीं गणेश नगर के अनिल भाटिया कहते हैं कि सफाई का हाल बहुत ही खराब है. बारिश का सीजन आने वाला है लेकिन नाला सफाई आधी-अधूरी हुई है. ऐसे में वाटर लागिंग से कोई नहीं रोक पाएगा. प्रकाश चंद्र कहते हैं कि कर्बला, आनंदनगर हो फिर रावतपुर गांव के सभी मोहल्लों का हाल खराब है.
पार्षद सुमन गुप्ता के पति धर्मेश कहते हैं कि बेटरमेंट चार्ज न मिलने से केडीए विकास कार्य नहीं कराता है. नगर निगम में अफसरशाही हावी है. बावजूद इसके पार्षद निधि और मेयर, एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिसर्स से मिलकर पार्षद कोटे से कई गुना का काम करा चुके है. इलेक्शन जीतने के पहले से ही पार्षद निवास से रावतपुर गांव, मसवानपुर और सरायं को जोड़ने वाली रोड बनाने के लिए प्रयासरत हूं।

मानसून हो गया लेट
उमस भरी गर्मी से बेहाल कानपुराइट्स टकटकी लगाए आसमान की ओर निहार रहे हैं. लेकिन गर्मी उनका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है. संडे को पारा और चढ़ गया. लास्ट ईयर की तरह मौसम वैज्ञानिकों ने टाइम से पहले मानसून आने की संभावना व्यक्त की. लेकिन अब तक कानपुराइट्स बारिश की बौछारों को तरस रहे हैं. इधर गर्मी हैं कि कम होने का नाम नहीं ले रही है. उमस और पारा और भी बढ़ता जा रहा है. संडे को मैक्सिमम टेम्परेचर जहां 43 पर पहुंच गया वहीं मिनिमम 31 को पार कर गया. उमस की वजह से लोग पसीने से तरबतर रहे. लोगों को अब बस केवल बारिश से उम्मीद है. लोगों का मानना है कि भीषण गर्मी से केवल और केवल बारिश ही बचा सकती है. उधर, सीएसए के मौसम वैज्ञानिक डा. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि पिछले दिनों बही पश्चिमी हवा की वजह से मानसून और लेट हो गया है. अब हवा माफिक बह रही है लेकिन उसकी रफ्तार धीमी है. उन्होंने कहा कि फिलहाल दो दिनों तक बारिश की कोई उम्मीद नहीं है. सबकुछ हवाओं के रूख पर निर्भर रहेगा.

Tuesday, June 1, 2010

खुद बचें, सबको बचाएं

मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट हॉस्पिटल के एचओडी डॉ. सुधीर चौधरी ने बताया कि लोगों को चाहिए कि वो स्मोकिंग छोड़ दें. साथ ही दूसरों को भी छोड़ने का प्रेशर डालें. कुछ लोग ऑफिस या पब्लिक प्लेस पर स्मोकिंग करने वालों के आस पास होते है जो उससे ज्यादा इफेक्टेड होते है. उन्हें चाहिए कि वो स्मोकिंग करने वाले को तुरंत टोके क्योंकि उस जगह से हटने पर भी कोई फायदा नहीं होता. स्मोकिंग का धुआं एयर में घुल चुका होता है और वापस आने पर फिर से हार्मफुल हो सकता है. स्मोकिंग की आदत इंसान को धीरे-धीरे मौत के करीब ले जाती है. व्यक्ति को पता भी नहीं होता कि हर एक सिगरेट का कश उसकी लाइफ से पांच मिनट छीन रहा है. स्मोकिंग का सबसे पहले असर लंग्स पर पड़ता है. इससे लंग्स के रेशे खराब होने लगते हैं. रेशे खराब होने पर लंग्स को साफ करने की कैपेसिटी भी चली जाती है. इससे खांसी होना और बलगम बनना जैसे लक्षण होने लगते हैं. यह बलगम लंग्स में कलेक्ट होता है जो इंफेक्शन के रूप में उभरता है.

Wednesday, May 12, 2010

Radar की नजरों से ओझल रहेगा mobile OT

देश के नाम अपनी जान तक कुर्बान करने करने का जज्बा रखने वाले सैनिकों के कुछ कर गुजरने में हमारे साइंटिस्ट भी पीछे नहीं. कानपुर स्थित डिफेंस मैटेरियल्स स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैबलिशमेंट (डीएमएसआरडीई) के रिसचर्स ने सैनिकों के लिए एक ऐसा मोबइल ऑपरेशन थियेटर बनाया है, जिसे तुरंत कहीं भी इंस्टॉल करके घायलों का बड़े से बड़ा ऑपरेशन तुरंत किया जा सकेगा. वहीं एंटीमाईक्रोनियल कपड़े का बना होने के कारण इस तंबू या टेंट जैसे ऑपरेशन थियेटर में वायरस या बैक्टीरिया भी घुस नहीं सकेंगे. वहीं दुश्मन के रडार या प्लेन भी इसे देख नहीं पाएंगे. ट्यूजडे को टेक्नॉलजी दिवस के मौके पर अपने किस्म के इस पहले मोबाइल ऑपरेशन थिएटर सहित आर्मी के लिए बने दूसरे प्रोडक्ट्स की एग्जीबीशन लगेगी. डीएमएसआरडीई में स्कूली बच्चे व अन्य लोग इन्हें देख सकेंगे. डीएमएसआरडीई के डायरेक्टर केयू भास्कर राव ने बताया कि इस टेंट ऑपरेशन थिएटर को महज एक पोल (खम्भे) पर क्रिएट किया गया है. इसे जंगल, पहाण, रेगिस्तान जैसी किसी भी जगह पर कुछ ही घंटों में खड़ा किया जा सकेगा. इस टेंट में ऑपरेशन थिएटर, अलग डाक्टर रुम तो होगा ही 10 से 15 पेशंट एक साथ रखे जा सकेंगे.
डीएमएसआरडीई के टेक्सटाइल डिवीजन के हेड डाक्टर अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि इस टेंट को बनाने में एंटीमाईक्रोनियल कपड़े का यूज किया है. वार्ता के दौरान एडीशनल डायरेक्टर डा. एमनसीम, डा. डीके सेतुआ, डा.रजनीश तिवारी मौजूद थे.

उनका नाम तो है, पर निशां कहीं नहीं..

आजादी की पहली लड़ाई के 10 मई को 153 साल पूरे होने के बावजूद शायद आजतक हम सब में संवेदना नहीं जागी. हम अपनी विरासत तक के प्रति अवेयर नहीं हैं. शायद यही वजह है कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नायक नानाराव के नाम पर जिस हिस्टोरिकल पार्क का नाम रखा गया, वहां उनकी एक अदद प्रतिमा तक नहीं लगी है.
नायक का ही नहीं पता
अंग्रेजों के जमाने में बीवीघर के नाम से जाना जाने वाले इस पार्क को आजादी के बाद ही नानाराव स्मारक पार्क से जाना जाता है. यहां रोजाना हजारों लोग सैर करने आते हैं. लेकिन किसी को आज तक यहां नानाराव नहीं दिखे. वाकई यकीन नही आता, लेकिन ये बात बिल्कुल सच है है कि यहां नानाराव की एक छोटी सी मूर्ति तक नहीं है, जो इस बात की गवाही दे कि इन्हीं के नाम पर पार्क का नाम रखा गया है. क्राइस्ट चर्च कॉलेज के हिस्ट्री डिपार्टमेंट के हेड डॉ. सर्वेश कुमार कहते हैं ये तो ऐसा है जैसे किसी फिल्म से मुख्य किरदार ही गायब हो.
सब हैं, केवल वही नहीं
इस पार्क में मणींद्र बनर्जी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, झांसी की रानी, मैनावती, मंगल पांडेय, तात्या टोपे, बाल गंगाधर तिलक से लेकर उस बरगद के पेड़ की याद भी बाकी है जिस पर अंग्रेजो ने आजादी की लड़ाई के योद्धाओं को फांसी पर लटका दिया था. 1857 के संग्राम के नायकों में से एक नानाराव की स्मृतियां सिर्फ पार्क के नाम के साथ ही जुड़ी हैं.

टीम इंडिया को बदलनी होगी आदत

टेस्ट क्रिकेट में इंडिया की ओर से सबसे ज्यादा विकेट झटकने वाले फॉर्मर कैप्टन अनिल कुंबले का मानना है कि टीम इंडिया को इंटरनेशनल क्रिकेट के हाई लेवल के एकॉर्डिग खुद को एडजस्ट करते हुए खेलने की आदत डालनी होगी. उन्होंने कहा कि इंडिया के पास धोनी, गंभीर, युवराज जैसे टॉप प्लेयर हैं जो किसी भी फार्मेट में खुद को ढालने की पूरी कैपेसिटी रखते हैं.
बॉलिंग को भी देनी होगी इंपॉर्टेस
कुंबले ने कहा कि इंटरनेशनल क्रिकेट में सफलता के लिए बेहद दबाव में खेलने की आदत होना जरूरी है और हर प्लेयर पर पर्सनल जिम्मेदारी होती है. यहां पर छोटी-छोटी गलतियां महंगी साबित हो सकती है. यह विडंबना है कि बैट्समेन से किसी भी कंडीशन में एडजस्ट होने की उम्मीद की जाती है. जहां तक बॉलिंग का सवाल है तो इंडिया के पास एक्सपर्ट बॉलर होना जरूरी है. कम से कम चार ऐसे बॉलर होने चाहिए जो भरोसेमंद हो और जो स्पिन या पेस बॉलिंग की बारीकियां समझते हो. इंडिया के पास फिलहाल तीन फुल टाइम बॉलर हैं और बाकी बॉलर पार्टटाइमर है. फ्यूचर में इंडिया को अपनी बॉलिंग पर उतना ही ध्यान देना होगा जितना कि बैटिंग पर दिया जाता है।

विश्वनाथन आनंद का ताज बरकरार

इंडियन चेस स्टार विश्वनाथन आनंद ने मंगलवार को लोकल प्लेयर वेसलिन टोपालोव को 12वीं और अंतिम बाजी में हराकर व‌र्ल्ड चेस चैंपियनशिप का खिताब बरकरार रखा. आनंद की यह जीत इसलिए भी इंपॉर्टेट है, क्योंकि वह अंतिम बाजी में काले मोहरों के साथ उतरे थे, जबकि दोनों प्लेयर्स के एक समान 5.5 प्वाइंट्स थे. आनंद ने 56 चाल तक चली बाजी में टोपालोव को नतमस्तक करके प्ले आफ की नौबत नहीं आने दी.

Registry कराना अब होगा आसान

अगर सबकुछ तयशुदा प्लानिंग के मुताबिक हुआ. तो अब मकान की रजिस्ट्री के लिए आपको स्टांप पेपर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके लिए कानपुर में ई-स्टैम्पिंग शुरु किये जाने की योजना है.
क्या है e-stamping?
ई-स्टैम्पिंग स्टांप पेपर का ही दूसरा विकल्प है. यह बिल्कुल पेपर-फ्री वर्किग जैसा होगा. इसमें मकान मालिक को रजिस्ट्री के लिए स्टांप पेपर नहीं लगाने होंगे. बल्कि, बैंक में रजिस्ट्री के लिए फंड जमा करना होगा. बदले में बैंक की तरफ से रसीद इश्यू की जाएगी. इस रसीद को प्लेन पेपर में रेवेन्यू स्टांप के साथ लगाकर रजिस्ट्री करवाई जा सकेगी.
रुकेगा फर्जीवाड़ा
ई-स्टैम्पिंग की मुख्य वजह, फर्जीवाड़ा रोकना है. मंहगी प्रॉपर्टी के केसेज में स्टांप पेपर की ज्यादा दरकार होती है. दूसरा, स्टांप वेंडर अधिकतम 15,000 रुपए के स्टांप ही बेच सकते हैं. ज्यादा कीमत के स्टांप ट्रेजरी से खरीदे जाते हैं. हालांकि, कुछ वेंडर्स 15,000 से ज्यादा कीमत के स्टांप खरीद कर बेच रहे हैं.
यूपी में सप्लाई
नासिक और हैदराबाद सिक्योरिटी प्रेस में अधिकतम 25,000 रुपए कीमत के स्टांप ही प्रिंट होते हैं. कानपुर से पूरी यूपी में स्टांप सप्लाई किये जाते हैं. इनमें फैजाबाद, गोरखपुर, आगरा, मेरठ, झांसी, मुरादाबाद, लखनऊ, बस्ती और कानपुर जोन शामिल हैं. मुख्य कोषाधिकारी जीएस कलसी ने बताया कि स्टांप पेपर का कागज और प्रिंटिंग काफी मंहगी है. ई-स्टैम्पिंग से सरकार को अरबों का फायदा होगा.

अभी गर्मी जरा कम है

आने वाले दिनों में चिलचिलाती गर्मी और गर्म हवा का सामना करने के लिए तैयार हो जाइए. ट्यूजडे के मौसम ने इसका संकेत भी दे दिया है. पारा 43 डिग्री के करीब पहुंच गया. पारा अभी अपने तेवर दिखाएगा.
इस महीने की शुरुआत से ही पारा नॉर्मल से भी कम चल रहा था. दो दिन पहले हवा की डायरेक्शन पश्चिमी होने से आसमान से बादल गायब हो गए. आसमान साफ होने से सुबह होते ही लोगों को तेज धूप का सामना करना पड़ रहा है. दोपहर में तो लोगों को सिर ही नहीं चेहरा तक ढक कर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. रही सही कसर गर्म हवाएं पूरी कर रही है. सीएसए के मौसम विभागाध्यक्ष डा. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि इस वीक टेंपरेचर बढ़ने के आसार है. ट्यूज डे को दिन के तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है।


Consumer service होगी बेहतर

कमिश्नर के निर्देश के बाद केस्को सबस्टेशनों पर बिल जमा करने वालों को धूप और प्यास से बचाएगी. फिलहाल चार सबस्टेशन पर इसके लिए कार्य शुरु कर दिया गया है. केस्को के चीफ इंजीनियर केशवराम ने बताया कि गुमटी, गोविंदनगर सहित चार बिलिंग सेंटर्स पर कंज्यूमर्स के लिए टीनशेड, चेयर, ड्रिकिंग वाटर आदि के लिए कार्य शुरु हो गया है.

अब नहीं पूछ सकोगे कितने आदमी थे

शोले के सांभा को कहा अलविदा


भारतीय फिल्म इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई मूवी शोले में सांभा का किरदार और आओ प्यार करें में संजीव कुमार के साथ लीड रोल निभाने वाले मैक मोहन का मंडे को निधन गया. ट्यूजडे को सिटी स्थित बुद्धा प्रोडक्शन ने बाल भवन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया. सभा में प्रोडक्शन मेम्बर्स के साथ अन्य लोगों ने भी दो मिनट का मौन रख उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. सन् 1964 में करियर की स्टार्टिग करने वाले मैक मोहन ने 175 से भी ज्यादा मूवीज में काम कर लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई थी. यही वजह है कि उनके निधन से सभी को दुख पहुंचा है.

Monday, May 10, 2010

नए सिरे से आंकी जाएगी महंगाई

सरकार होल सेल बेस्ड इंडेक्स को नए सिरे से तैयार कर रही है. इसमें मोबाइल फोन, बोतल बंद पीने का पानी, एलसीडी टीवी सहित 676 प्रोडक्ट्स शामिल होंगे. सोर्सेज के अनुसार नया इंडेक्स जून या जुलाई में जारी किया जा सकता है.
नई सिरीज में टाइपराइटर और वीसीआर जैसे आउटडेटेड प्रोडक्ट्स को शामिल नहीं किया जाएगा. नए इंडेक्स का बेस इयर 2004-05 होगा और इसमें 241 नए स्पेसीज शामिल होंगे. नए इंडेक्स से महंगाई के बारे में ज्यादा रियल तस्वीर सामने आएगी और उससे आम आदमी पर पड़ने वाले असर का बेहतर आकलन किया जा सकेगा. मौजूदा समय में जो होल सेल इंडेक्स है उसमें 435 प्रोडक्ट्स शामिल हैं. एक सीनियर अफसर ने बताया कि हम नए प्रोडक्ट्स के बेस पर तैयार इंडेक्स को अगले महीने या जुलाई में जारी करने की कोशिश कर रहे हैं. अधिकारी ने कहा कि मौजूदा सिरीज में कुछ पुराने प्रोडक्ट हैं. नई सिरीज में उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा. उसने कहा कि नए प्रोडक्ट्स पर बेस्ड महंगाई का आंकड़ा ज्यादा बेहतर स्थिति बताएगा.

Tuesday, May 4, 2010

AC बना रहा अस्थमा के -patient

अगर आप सोचते हैं कि शहर की धूल-धक्कड़ में बाहर नहीं निकलने से अस्थमा जैसी बीमारी से बच जाएंगे तो आप गलत हैं. सच तो ये है कि घर के अंदर एयर कंडीशनर की हवा भी आपको उतनी ही तेजी से अस्थमा दे सकती है जितना कि आउटडोर पॉल्यूशन. ये तथ्य एक संस्था द्वारा जारी सर्वे रिपोर्ट में सामने आए. रिपोर्ट में ये हैरतंगेज तथ्य मिला कि देशभर में कानपुर और बंगलुरू में अस्थमा के पेशेंट सबसे तेज गति से बढ़ रहे हैं.
सर्वे में हुआ खुलासा
4 मई को अस्थमा डे के मौके पर सिटी में कई संगठन और डॉक्टर्स अवेयरनेस प्रोग्राम करेंगे. इसकी जानकारी देने के लिए आर्गनाइज्ड प्रेस कांफ्रेंस में चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. एसके कटियार ने बताया कि पिछले साल आई आईसीएमआर की एक सर्वे रिपोर्ट में यह बताया गया था कि कानपुर और बंगलुरू में अस्थमा पेशेंट्स की संख्या अधिकतम है. ढाई परसेंट लोगों में अस्थमा पाया गया. यह सर्वे ढाई साल में बंगलुरू कानपुर, दिल्ली और चंडीगढ़ में कराया गया था.
एसी में लाईजन लॉ बैक्टीरिया
डॉ. कटियार के अनुसार सिटी में खुदी सड़कों से उड़ती धूल और स्मोकिंग से भी अस्थमा के पेशेंट बढ़ रहे हैं, पर एसी से निकलने वाली हवा में लाइजन लॉ बैक्टीरिया होते हैं. कूलिंग होने पर यह बैक्टीरिया और पनपता है. इससे भी अस्थमा होने का खतरा रहता है. इसमें भी सेन्ट्रलाइज्ड एसी इस मामले में ज्यादा हार्मफुल होता है. सिटी में हर साल 1 परसेंट नए लोग अस्थमा की चपेट में आते हैं. इस समय करीब 1.25 लाख लोग अस्थमा से पीड़ित हैं.

Tuesday, April 27, 2010

Robots Feature

रोबोट्स को इंसान की तरह काम करते फ्यूचर की कल्पना करना अब सच्चाई से अधिक दूर की सोच नहीं है. फिल्मों में आपने देखा होगा कि किस तरह से रोबोट्स हमें छोटे-छोटे कामों से मुक्ति दिलाकर बड़े कामों पर कंसनट्रेट करने का मौका देते हैं. कहीं पर यह रोबोट्स विलेन का रोल प्ले करते हैं और सारी इंसानियत के लिए ढेर सारी मुसीबतें पैदा करने लगते हैं.

यह कहा जा सकता है कि रोबोट्स इंसानों के सोचने और बिहेव करने के तरीके को चेंज करते हैं. एक हद तक ऐसा हो भी रहा है. बायोनिक लिम्ब्स और कॉकहीलर इम्प्लांट्स इंसान की कमियों को दूर कर उसे परफेक्टली फंक्शन करने का मौका दे रहे हैं. बोस्टन रेनिटल इम्प्लांट प्रोजेक्ट में तो साइंटिस्ट्स उस फार्मूले पर काम कर रहे हैं जिससे वह रोबोट के जरिए किसी ब्लाइंड की आंखों को रोशनी दे सकेंगे. यह सब कुछ रोबोटिक्स पर बेस्ड है और हमें बताता है कि किस तरह से इंसान इस मशीन पर डिपेंड होता जा रहा है.

केवल फिजिकल ही नहीं इमोशनल फील्ड पर भी रोबोट्स हमारी हेल्प कर सकते हैं. प्लिओ डायनासोर रोबोट ट्वाय इसका अच्छा एग्जांपल है. लोग इसे एक रियल पेट एनीमल समझते हैं. यह खुशी, डर, फ्रस्ट्रेशन और यहां तक कि दर्द का भी अहसास बखूबी कर सकता है.

इमोशनल लेवल पर रोबोट्स का एक यूज मेडिकल फील्ड में भी शुरू होने जा रहा है. हमारी इमोशनल स्टेट पर रिएक्ट कर सकने वाला रोबोट कठिन समय में हमारा साथी बन सकता है. मेडिकल फील्ड की बात करें तो मरीज के इमोशंस को फील कर यह रोबोट डॉक्टर्स को उस मरीज का बेहतर इलाज करने में हेल्प कर सकता है.

बच्चों में सोशल स्किल और रिस्पांसिबिलिटी डेवलप करने में भी रोबोट्स का यूज हो सकता है. हम रोबोट्स के जरिए कई सोशल हैबिट्स और अंडरस्टैंडिंग्स इनकलकेट कर सकते हैं. रोबोट्स के जरिए यह करना दूसरे तरीकों से कहीं ज्यादा आसान होगा.

मिलिट्री और पुलिस तो बॉम्ब डिटेक्शन के लिए आलरेडी रोबोट्स का यूज कर रहे हैं. इसके अलावा खतरनाक टास्क पर भी इनकी हेल्प ली जा रही है. आने वाले समय में इस इंडस्ट्री में इनका यूज और बढ़ने वाला है.

ऊपर डिस्क्राइब किए गए एग्जांपल्स से हमें पता चलता है कि हम किस तरह से रोबोट्स पर डिपेंड होते जा रहे हैं. वह हमारी जिंदगी को चेंज कर रहे हैं, लेकिन मिलियन डॉलर क्वेश्चन तो यही है कि हम उन्हें किस हद तक अपनी लाइफ में चेंज करने की परमिशन दे सकते हैं?

लक्ष्मी पर मेहरबान लक्ष्मीं

धन की देवी लक्ष्मी जिस पर एक बार मेहरबान हो जाएं, उसके वारे न्यारे कर देती हैं. कुछ ऐसा ही हाल इंडियन ओरिजिन के ब्रिटिश इंडस्ट्रियलिस्ट लक्ष्मी मित्तल का भी है. लक्ष्मी उन पर इस कदर मेहरबान हुई हैं कि वह लगातार छठे साल ब्रिटेन के धनकुबेरों की लिस्ट में टॉप पर बने हुए हैं. 2010 के लिए संडे टाइम्स रिच लिस्ट में 22.45 अरब पौंड नेटवर्थ के साथ लक्ष्मी मित्तल पहले पायदान पर हैं, जबकि इंडियन ओरिजिन के ही अनिल अग्रवाल 60 सीढ़ी चढकर 10वें पायदान पर पहुंच गए. अग्रवाल की कंपनी वेदांत रिसोर्सेज के शेयर्स का प्राइज बढ़ने से उनकी एस्सेट्स 60 करोड़ पौंड से बढ़कर 4.1 अरब पौंड हो गई. वहीं 55 करोड़ पौंड नेटवर्थ के साथ एनआरआई इंडस्ट्रियलिस्ट लार्ड स्वराज पाल 115वें पायदान पर हैं. संडे टाइम्स की इस लिस्ट में अरबपतियों की संख्या 2010 में बढ़कर 53 पहुंच गई जो इससे पहले 10 थी. लिस्ट में दूसरे पायदान पर रसियन इंडस्ट्रियलिस्ट रोमन अब्रामोविच है जिनकी नेटवर्थ 7.4 अरब पौंड है. संडे टाइम्स की इस लिस्ट में 1000 धनकुबेरों का धन 2010 में बढ़कर 335.5 अरब पौंड पहुंच गया जो 2009 के मुकाबले 77.26 अरब पौंड अधिक है

A bad effect of good thing

आर रेटेड फिल्में देखने से मना करना बच्चों पर उल्टा असर डाल सकता है. यह खुलासा हुआ है हाल ही में एक रिसर्च में. रिसर्चर्स ने अमेरिका में की गई अपनी स्टडी से रिजल्ट निकाला है कि पर्दे पर दिखाए जाने वाले एडल्ट प्रोग्राम देखने से रोकने पर बच्चों में शराब पीने की लत पड़ सकती है. इसके अलावा उनमें स्मोकिंग, कम एज में सेक्स या फिर एबनॉर्मल बिहैवियर की आशंका भी बढ़ सकती है.
महत्वपूर्ण पहलू की उपेक्षा
न्यू हैंपशायर स्थित हनोवर के डार्टमाउथ मेडिकल स्कूल में रिसर्च में पाया गया कि जिन बच्चों को ऐसी फिल्में नहीं देखने दी गई उनमें कम एज में शराब की लत पड़ने की आशंका अपने साथियों के कंपैरिजन में बढ़ गई. वहीं 17 साल की कम एज के जिन बच्चों को ऐसी फिल्में देखने नहीं मना किया गया उनके साथ ऐसी कोई प्रॉब्लम नहीं देखी गई. यह स्टडी जर्नल ऑफ स्टडीज ऑन अल्कोहल एंड ड्रग्स में पब्लिश हुई है. इसमें उस बात की ओर ध्यान दिलाया गया है जिसमें बच्चों को मीडिया के प्रभाव में आने से रोककर पैरेंट्स कीमत चुका रहे हैं. चीफ रिसर्चर डार्टमाउथ मेडिकल स्कूल के जेम्स डी सार्जेन्ट ने कहा कि हमें लगता है कि बच्चों की देखभाल का यह एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसकी उपेक्षा की जा रही है.

अतिथि तुम बिन बुलाए क्यों आए?

अतिथि को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन जब अतिथि बिना बुलाए आ जाए तो परेशानी का सबब बन जाता है. सानिया-शोएब के वलीमा में भी कुछ ऐसे ही अतिथि पहुंच गए और बेकाबू होते हालातों के चलते इस जोड़े को रिसेप्शन बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा. बिन बुलाए मेहमानों और सिक्योरिटी की बदइंतजामी ने सियालकोट में इंडियन टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा और पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक की शादी के रिसेप्शन का मजा बिगाड़ दिया.
सियालकोट हॉकी ग्राउंड में आयोजित शादी के रिसेप्शन में कई बिन बुलाए मेहमानों के आने से यह प्रोग्राम शोएब-सानिया और उनकी फैमिली के लिए नया सिर दर्द बन गया. पंजाब पुलिस द्वारा किए गए भारी सिक्योरिटी अरेंजमेंट और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन की कड़ी निगरानी से प्रोग्राम में दिक्कतें और बढ़ गईं. एक प्राइवेट चैनल की खबर के मुताबिक इस समारोह में शरीक होने के लिए इंडिया से आया सानिया का परिवार प्रोग्राम की बदइंतजामी से खफा होकर तय समय से पहले ही लाहौर चला गया. प्रोग्राम के चश्मदीदों ने कहा कि मंच पर बैठकर मेहमानों का सत्कार कर रहे शोएब और सानिया भी प्रोग्राम पूरा होने से पहले ही समारोह छोड़कर चले गए.

DOUBLE FAYDAA

ज्यादातर बैंक चाहती हैं कि घर के सभी कोओनर्स को ज्वाइंटली होम लोन लेना चाहिए. इसके मुताबिक आप अपनी वाइफ और पैरेंट्स के साथ मिलकर ज्वाइंट होम लोन का फायदा उठा सकते हैं. कुछ बैंक्स इस टीम में भाइयों को भी शामिल होने की परमीशन देती हैं. हालांकि बहनों, दोस्तों और अनमैरीड कपल्स जो साथ में रहते हैं उन्हें ज्यादातर बैंक इस स्कीम का फायदा नहीं देते.

कमाल के ये चार

सिटी में प्रतिभाशालियों की कोई कमी नहीं है. वे देश-दुनिया की हर इंडस्ट्री में छाए हैं. अपनी प्रतिभा का झंडा हाल ही में सिटी के चार स्टूडेंट्स ने कुछ इस कदर बुलंद किया कि साफ्टवेयर बनाने वाली दुनिया की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट भी उनका लोहा मान गई. माइक्रोसॉफ्ट अब इन स्टूडेंट्स के साथ काम कर रही है.
थी गलती
करीब एक माह पहले माइक्रोसॉफ्ट अपना नया सॉफ्टवेयर अश्योर लांच करने वाली थी. कानपुर यूनिवर्सिटी में बीटेक फ‌र्स्ट इयर के स्टूडेंट्स अधोक्षज, गौरव सिंह और अंकुर वर्मा तथा बीफार्मा का स्टूडेंट अनुराग मिश्र को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इस सॉफ्टवेयर का गहनता से अध्ययन किया. उन्हें सॉफ्टवेयर में कई कमियां मिलीं. हालांकि यह कमियां छोटे लेवल की, लेकिन महत्वपूर्ण थीं. इन कमियों का एक नोट बनाकर इन स्टूडेंट्स ने एक मेल माइक्रोसॉफ्ट को भेजा. कंपनी ने जब इसकी जांच की तो बात सही निकली. इसके बाद कंपनी ने सॉफ्टवेयर की लांचिंग रोक दी.
दिया ऑफर
माइक्रोसॉफ्ट ने इन स्टूडेंट्स को मेल कर इन कमियों को बताने के लिए थैंक्यू बोला और उन्हें तीन ऑफर दिए. पहला इन स्टूडेंट्स के डेवलप किए गए सॉफ्टवेयर को बाजार में अपने नाम से लांच करना, जिसका इन स्टूडेंट्स को पेमेंट किया जाएगा. दूसरा टेक्निकल सपोर्ट और तीसरा कंपनी के सॉफ्टवेयर में बेहतरी के लिए सजेशन देना. इस ऑफर के बाद इन स्टूडेंट्स ने इंडियन डिजी लैब नामक एक कंपनी बनाई और काम शुरू कर दिया.
चार का चमत्कार
ये चारों स्टूडेंट्स अलग-अलग क्षेत्र में एक्सपर्ट हैं. अधोक्षज जहां सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में महारत रखता है, वहीं गौरव सिंह और अंकुर वर्मा कंप्यूटर की कोई भी सिक्योरिटी को तोड़ने में माहिर हैं. अनुराग मिश्र वेबसाइट डिजाइनिंग, वायरस बनाने और एंटी वायरस रिमूव करने में एक्सपर्ट है.
कंप्यूटर पर सिमटी दुनिया
कुछ नया करने का जुनून इन चारों में इस कदर छाया रहता है कि उनका अधिकतर समय कंप्यूटर पर ही गुजरता है. इन स्टूडेंट्स का कहना है कि वे खुद को साबित करना चाहते हैं. फ‌र्स्ट इयर का स्टूडेंट्स होने के कारण सीनियर उन्हें अक्सर अंडर एस्टिमेट करते थे. खुद को साबित करने के लिए ये खाना, पीना, सोना और घूमना भूलकर कंप्यूटर की दुनिया में खोए रहते हैं.
सॉफ्टवेयर सिटी बने
इन स्टूडेंट्स का सपना कानपुर का नाम फिर से इंटरनेशनल लेवल पर रोशन करने का है. इनका कहना है कि कानपुर कभी इंडस्ट्रियल सिटी हुआ करती थी. अब हम इसे सॉफ्टवेयर सिटी बनाना चाहते हैं. हम दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि इंडियन्स किसी से कम नहीं हैं. वे हर क्षेत्र में आगे हैं.

Wednesday, March 31, 2010

US cell users sent 1.5 trillion SMS in 2009

इनफारमेशन टेक्नालॉजी किस तरह लोगों को प्रभावित कर रही है इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि अमेरिका में मोबाइल फोन का यूज करने वालों ने 2009 में 1.5 खरब एसएमएस भेज डाले. एक वायरलेस इंडस्ट्री ट्रेड ग्रुप सीटीआईए ़ द वायरलेस एसोसिएशन के डेटा के अनुसार, 2009 की दूसरी हाफ इयरली में एवरेज पांच अरब मैसेज हर दिन भेजे गए. सीटीआईए ने अपने हाफ इयरली सर्वे में बताया है कि एसएमएस दिनों दिन पॉपुलर होते जा रहे हैं. 2009 के आखिरी छह महीनों में 822 अरब से अधिक मैसेज इधर से उधर हुए. इस तरह साल के आखिर में हर दिन करीब पांच अरब संदेश सेंड किए गए. सीटीआईए के अनुसार, 2009 के दौरान विभिन्न सर्विस प्रोवाइडरों के नेटवर्कों पर 1.5 खरब से अधिक मैसेज भेजे जाने की खबर है. वायरलेस कन्ज्यूमर्स ने भी अपने अपने मोबाइल डिवाइसिज से पिक्चर्स और मल्टीमीडिया मैसेज भेजे हैं. 2009 के लास्ट छह माह के दौरान 24. 2 अरब एमएमएस भेजे जाने की खबर है. यह संख्या 2008 की इसी अवधि की संख्या की तुलना में दोगुनी से अधिक है. 2008 की इसी अवधि में केवल 9.3 अरब एमएमएस भेजे गए थे.

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बिजनेस के दौरान इंटरनेट का यूज कितना बढ़ गया है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब वे बच्चों को खाने खेलने की चीज की ओर रिझाने के लिए सोशल नेटवर्किग साइट्स की मदद ले रही हैं.
डेली यूज की चीजें बनाने वाली कंपनी कैपिटल फूड ने अपने नूडल्स और सूप की सेल बढ़ाने के लिए पिछले छह महीनों के दौरान फेसबुक जैसी पॉपुलर सोशल नेटवर्किग साइट का बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया है. कैपिटल फूड के प्रेसीडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजय गुप्ता ने कहा कि देश के कंज्यूमर मार्केट में वह एक उभरती हुई कंपनी है जिसने फेसबुक पर अपने एडवरटीजमेंट का प्रसार करने के बाद छह महीनों के दौरान फूड प्रोडक्ट्स की सेल के कारण अपनी अर्निग्स में 30 परसेंट का इजाफा किया है. मुंबई की इस कंपनी ने पिछले साल 210 करोड़ रूपए का कारोबार किया. इस साल उसे 300 करोड़ रुपए की अर्निग्स की उम्मीद है.
किसी कंपनी द्वारा अपने प्रोडक्ट्स बेचने के लिए सोशन नेटवर्रि्कग साइट्स का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है, लेकिन फूड प्रोडक्ट्स के लिए यह हथकंडा एक नई पहल है, जिसके बाद उम्मीद है कि कुछ अन्य कंपनियां भी इस मैथड को अपनाएंगी.

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हांगकांग की कंपनी ने गूगल से किया किनारा

गूगल और चीन की सरकार के बीच खींचतान के दौरान हांगकांग की इंटरनेट कंपनी टीओएम ग्रुप ने गूगल की सर्च सर्विसेज से नाता तोड़ लिया है. टीओएम ग्रुप के इस कदम से और कंपनियों के गूगल से दूर होने की अटकलें जोर पकड़ रही हैं.
टीओएम ग्रुप हांगकांग के सबसे धनी ली का शिंग का है और इसने अपनी सब्सीडरी टीओएम ऑनलाइन की ओर से बयान जारी किया है. टीओएम ग्रुप ने चीन के रूल्स के प्रति सम्मान जताया. गूगल ने सोमवार को चीन में अपना सर्च इंजन बंद करने का फैसला किया था.
मानेंगे चीनी लॉ
टीओएम की ऑनलाइन और मोबाइल सर्विसेज चीन में भी हैं और कंपनी ने एक बयान में कहा है कि उसकी वेबसाइट्स पर अब गूगल की सर्च इंजन सर्विसेज के माध्यम से नहीं पहुंचा जा सकेगा. बयान में कहा गया है कि टीओएम एक चीनी कंपनी के रूप में दोहराती है कि हम चीन के रूल्स व लॉ को मानते हैं, जहां हमारा कारोबार है. फो‌र्ब्स मैग्जीन ने मार्च में ली को दुनिया में सबसे अमीर हस्तियों में 14वें स्थान पर रखा था, जहां उनकी एसेट्स 21 अरब डॉलर है.

Big Bazaar Big responsiblity

परमवीर चक्र विजेता शहीद अल्बर्ट एक्का के परिवार को महीने का राशन बिग बाजार देगा. बुधवार को सिटी में दो साल पूरे होने की खुशी में बिग बाजार की ओर से यह घोषणा की गई. घोषणा के वक्त शहीद अल्बर्ट एक्का की पत्‍‌नी बालमदिना एक्का, बेटा विसेंट एक्का, बहू रजनी एक्का व पोता डिनजॉन एक्का भी मौजूद थे. बालमदिना एक्का ने बिग बाजार के दो साल पूरे होने पर तैयार किए गए, दस बाई चार फीट का केक काटा. एरिया हेड कौशल त्रिपाठी ने बताया कि बिग बाजार हर महीने शहीद अल्बर्ट एक्का के परिवार को गुमला राशन पहुंचाएगा.

Tuesday, March 30, 2010

Online Advertisement boom

इस समय मीडिया इंडस्ट्री बूम के दौर से गुजर रही है, लेकिन ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि कुछ ही सालों के अंदर इंटरनेट एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री इसे पीछे छोड़ देगी. यह दावा किया है इंटरनेट इंडस्ट्री से जुड़े एक्सप‌र्ट्स ने, जिनके मुताबिक इंडिया में 49 मिलियन इंटरनेट यूजर्स हैं, जबकि इस साल देश का ऑनलाइन एडवरटाइजिंग मार्केट 1100 करोड़ रहने की उम्मीद है. अगर गूगल का यह अंदाजा सही साबित होता है तो ऑनलाइन एडवरटाइजिंग मार्केट में यह पिछले साल के मुकाबले दोगुनी ग्रोथ होगी.
एक्सप‌र्ट्स के मुताबिक ऑनलाइन एडवरटाइजिंग इकलौती ऐसी इंडस्ट्री है, जहां कंज्यूमर्स के साथ लांग टर्म रिलेसनशिप कायम की जा सकती है. यहां फीडबैक की फैसिलिटी ज्यादा बेहतर है.
बढ़ रहा क्रेज
एक्सप‌र्ट्स के मुताबिक इंडिया में दिन पर दिन लोगों पर इंटरनेट का भूत सवार होता जा रहा है, जिससे ऑनलाइन एडवरटाइजिंग का क्रेज काफी बढ़ गया है. इसकी इफेक्टिव पहुंच, असर और कीमत ने बहुत तेजी से एडवरटीजमेंट देने वाली कंपनियों को अपनी ओर अट्रैक्ट किया है. गूगल इंडिया के बिजनेस हेड नरसिम्हा जयकुमार के मुताबिक टेक्नोलॉजी में आए रैपिड चेंजेस के चलते लोगों का ध्यान अब डिजिटल मीडिया की ओर आ रहा है. उन्होंने कहा कि यह एडवरटाइजर्स के लिए एक अलार्म है, ताकि वे इस बड़े प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर अपने स्पेशिफिक टारगेट ऑडियंस तक पहुंच सकें. उनके मुताबिक इंटरनेट एडवरटाइजिंग ब्रॉड बैंड के वाइजर यूज और कनेक्टिविटी के इंप्रूवमेंट का इंतजार कर रही है.
यूथ का बड़ा रोल
ऑनलाइन एडवरटाइजिंग एजेंसी कैसर मीडिया के सीईओ हरीश बहल के मुताबिक इंटरनेट एडवरटाइजिंग की ग्रोथ का एक बड़ा कारण इसकी हॉयर एडाप्टबिलिटी और टेक्नोलॉजी में बड़े चेंज के साथ-साथ यूथ द्वारा इससे जुड़ना है जो एडवरटाइजर्स का मनपसंद टारगेट सेगमेंट है. एग्जांपल के तौर पर यूके को ही ले लें, जहां ऑनलाइन एडवरटाइजिंग मार्केट ने प्रिंट मीडिया को इस साल पीछे छोड़ दिया है. इसमें यूथ का बड़ा रोल रहा है. उनके मुताबिक इसमें कोई शक नहीं कि आने वाले समय में डिजिटल मीडिया इस फील्ड में सभी को पीछे छोड़ देगा.
बेहतर की जंग
दरसल इस समय एडवरटाइजिंग के ट्रेडिशनल मीडियम प्रिंट और टेलीविजन का मुकाबला ऑनलाइन एडवरटाइजिंग से माना जा रहा है. एडवरटाजर्स कई मायनों में डिजिटल मीडियम को प्रिफर कर रहे हैं. इसमें टीवी और प्रिंट के मुकाबले इंट्री लेवल फीस और ग्लोबल रीच का एडवांटेज है, जबकि इसमें रिटर्न ऑफ इनवेस्टमेंट के भी अच्छे चांस हैं. कोका कोला, एयूएल, पेप्सी, हुंडई और आईसीआईसीआई जैसे दुनिया के बड़े कॉपोरेट्स अब ऑनलाइन मीडियम को भी पसंद करने लगे हैं, जो इसकी बढ़ती पहुंच का एक नमूना भर है.
एक्सेप्ट किया सच
हाल ही में फिक्की द्वारा आयोजित मीडिया-इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की समिट के दौरान भी इस सच को एक्सेप्ट किया गया. इस समिट के खत्म होने के बाद जारी रिपोर्ट में साफ किया गया कि ऑनलाइन एडवरटाइजिंग का बाजार तेजी से जगह बना रहा है और अगर इसकी यही तेजी बरकरार रहती है तो यह दूसरे अन्य मीडियम्स को पीछे छोड़ देगा. रिपोर्ट के मुताबिक यह इंडस्ट्री रिवॉल्यूशन बनकर आई है. रिपोर्ट के मुताबिक इस साल ऑनलाइन एड पर सबसे ज्यादा खर्च एजूकेशनल इंस्टीट्यूशंस द्वारा किया जा रहा है

Ttreatment in Train

ट्रेन में सफर के दौरान अगर तबीयत बिगड़ जाए तो ऐसी स्थिति में पैसेंजर्स को परेशान होने की जरूरत नहीं होगी. कारण यह है कि सफर के दौरान किसी भी पैसेंजर का स्वास्थ्य खराब होने की दशा में रेलवे पूरा ख्याल रखेगी. रेलवे ने कुछ ऐसी ही व्यवस्था लम्बी दूरी की ट्रेनों में करने की तैयारी की है.
तैनात होंगे डॉक्टर्स
सफर के दौरान ही पैसेंजर्स को ट्रीटमेंट उपलब्ध कराने के मद्देनजर रेलवे डॉक्टर्स की ड्यूटी ट्रेन में लगाई जाएगी. इतना ही नहीं पैसेंजर्स को स्वास्थ्य संबंधी अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी. सूत्रों के मुताबिक ट्रेनों में डॉक्टर्स के लिए एसी कोच में दो बर्थ रिजर्व रहेंगी. इतना ही नहीं पैरा मैडिकल स्टॉफ भी डॉक्टर्स के साथ रहेगा. टीटीई जैसे ही डॉक्टर को किसी पैसेंजर के बीमार होने की सूचना देगा, वैसे ही वह डॉक्टर उसे तुरंत अटेंड करेगा. अगर मरीज चल सकता है तो टीटीई उसे डॉक्टर के पास तक लेकर जाएगा. इतना ही नहीं इमरजेंसी की स्थिति में इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी, ऑक्सीजन सिलेंडर, पल्स ऑक्सोमीटर जैसे अन्य जरूरी उपकरण भी ट्रेन में डॉक्टर्स के पास मौजूद रहेंगे. सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में जल्द ही रेलवे बोर्ड से संबंधित सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएंगे. यह सर्विस सबसे पहले लांग रूट की ट्रेनों में उपलब्ध कराई जाएगी.

Census@mouse click

देश की सातवीं जनगणना में आपकी फैमिली का स्ट्ेटस क्या है? गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने आपके बारे में कौन-कौन सी जानकारी कलेक्ट की है?
ऐसे तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए आपको गवर्नमेंट ऑफिसेज के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे बल्कि, एक सिंगल क्लिक पर पूरी जानकारी आपके कंप्यूटर स्क्रीन पर मौजूद होगी. यह सब संभव होगा, जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट की वेबसाइट से. जिसकी मदद से जनगणना की डिटेल्स की जानकारी हासिल की जा सकेगी. गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने सेंसस-2011 में पब्लिक कन्वीनिएंस का खास ख्याल रखा है. इसके तहत कोई भी व्यक्ति जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट की वेबसाइट http://gad.up.nic.in पर लॉगऑन कर जनगणना संबंधी जानकारी पा सकता है. पहले सिर्फ ड्यूटी सुपरवाइजर वेबसाइट पर सेंसस रिलेटेड इनफॉर्मेशन हासिल कर पाते थे, लेकिन अब पब्लिक भी वेबसाइट से सेंसस के अलावा पर्सनल इनफॉर्मेशन हासिल कर सकेगी. इस बार पब्लिक को जनगणना में हुई भूल को सुधारने का मौका भी मिलेगा. इसके लिए वेबसाइट के माध्यम से यूजर अपनी कंप्लेंट दर्ज करा सकेंगे.

A small revolution

मोबाइल रिवॉल्यूशन कोई नई बात नहीं रही, लेकिन इन दिनों एक अन्य रिवॉल्युशन चर्चा का विषय बना हुआ है जिसे मोबाइल एप्लीकेशन रिवॉल्यूशन का नाम दिया जा रहा है. असल में एप्लिकेशन या शॉर्ट में कहें तो एप्स सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में सबसे तेजी से मुनाफा देने वाले माध्यम बन गए हैं. महीने भर में ही कोई भी एप्लिकेशन डेवलप करके उसे दुनिया भर में फैले डाउनलोडिंग के दीवानों के लिए जारी किया जा सकता है. एग्जांपल के तौर पर इस साल जनवरी में ऐपल एप स्टोर से 3 अरब डाउनलोडिंग हुई हैं. मार्केट रिसर्च फर्म गार्टनर के मुताबिक इस साल कंज्यूमर गेम्स, सोशल नेटवर्किग टूल्स सहित इंटरटेनमेंट की कई चीजों को मोबाइल फोन पर इस्तेमाल करने के लिए 6.2 अरब डॉलर की मोटी रकम खर्च की जा रही है. यह हालात तब हैं जब 80 परसेंट मोबाइल एप्लिकेशन फ्री में ही मुहैया कराए जाएंगे.
प्रोफेशनल्स को टक्कर
एप्लीकेशंस स्टोर में गेम्स, कारोबार, न्यूज, स्पो‌र्ट्स और हेल्थ जैसी कैटेगरी में 1 लाख से भी ज्यादा ऑप्शन मौजूद हैं. ब्लैकबेरी एप व‌र्ल्ड में इन्हीं कैटेगरीज में करीब 4 हजार टाइटल हैं. वहीं गूगल एंड्रॉयड करीब 20 हजार ऐसे ही टाइटल मार्केट में बेचता है. इसमें कोई हैरत नहीं होनी चाहिए कि कारोबारी हलकों में पांच साल पहले तक एप्लिकेशन डेवलपर का कोई नामोनिशां तक नहीं था, लेकिन अब यह मोबाइल मार्केट में राज करता नजर आ रहा है. स्टूडेंट, टीचर और यहां तक कि डॉक्टर भी इस होड़ में कूद रहे हैं और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. ऐपल, नोकिया, सैमसंग और सोनी एरिक्सन जैसी कंपनियों की वेबसाइट या फिर ऑर्कुट या फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किग साइट इनकी मदद कर रही हैं. इस मीडियम के जरिए डेवलपर अपने सॉफ्टवेयर दुनिया के किसी भी कोने में बेच सकते हैं.
सॉफ्टवेयर का डॉक्टर
रोहित सिंघल की कहानी एक गैरेज और तीन लोगों की टीम के साथ शुरू हई. पेशे से रेडियोलॉजिस्ट सिंघल ने ऑसिरिक्स नाम के एक ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया. यह सॉफ्टवेयर रेडियोलॉजी के लिए ही तैयार किया गया है. उनकी सोर्सबिट्स नाम की कंपनी मेडिकल सेक्टर के लिए तो सॉफ्टवेयर डेवलप करने लगी, साथ ही गेम्स और जनरल एप्स तक भी इसका दायरा बढ़ता गया.
सिंघल की कंपनी ने ही सबसे पहले क्लॉक एप्स नाइटस्टैंड को पेश किया था. अब तक हुई इसकी 25 लाख डाउनलोडिंग इसकी कामयाबी की कहानी खुद बयां करती हैं. मौजूदा समय में उनकी कंपनी में कई वर्कर्स सिर्फ इसी काम में लगे हैं.

Monday, March 29, 2010

महंगी होंगी कारें

अगले महीने से कारें महंगी हो जाएंगी, क्योंकि कार कंपनियों ने अपनी कारों को यूरो-4 एमिशन स्टैंड‌र्ड्स के एकॉर्डिग अपडेट करने में आने वाला खर्च कस्टमर्स से वसूलने का फैसला किया है.
टाटा मोटर्स, फिएट, हुंडई, महिंद्रा और जनरल मोटर्स सहित प्रमुख कार कंपनियों ने अपनी कारों के दाम बढ़ाने की योजना बनाई है. सरकार एक अप्रैल से नए एमिशन रूल्स को लागू करने जा रही है. नए स्टैंड‌र्ड्स के लागू होने के साथ कंपनियों को अपने वाहनों को अपडेट करने की जरूरत पड़ेगी, ताकि वे अधिक साफ यूरो-4 फ्यूल पर चल सकें. इस फ्यूल का इस्तेमाल 13 शहरों में किया जाएगा, जबकि देश के अन्य हिस्सों में यूरो-3 फ्यूल का इस्तेमाल किया जाएगा. जनरल मोटर्स के वाइस प्रेसीडेंट पी. बालेंद्रन ने बताया कि हम शेवरले बीट और स्पार्क को छोड़कर सभी मॉडल्स के दाम 6000 रुपए तक बढ़ाएंगे. कीमतें अप्रैल के पहले हफ्ते में बढ़ाई जाएंगी.
रूल लागू होने का इंतजार
वहींहुंडई मोटर के रीजनल सेल्स मैनेजर कुमार प्रिएश ने कहा कि हम अप्रैल के पहले सप्ताह में कीमतें 4000 रुपए से 5,000 रुपए के दायरे में बढ़ाएंगे. उधर, टाटा मोटर्स और महिन्द्रा एंड महिन्द्रा ने भी एक अप्रैल से कीमतों में बढ़ोतरी करने का संकेत दिया है. टाटा मोटर्स के प्रेसीडेंट (पैसेंजर कार) राजीव ुदुबे ने कहा कि मैं फिलहाल यह नहीं बता सकता कि कीमतों में कितनी बढ़ोतरी की जाएगी. हम नए एमिशन स्टैंड‌र्ड्स के लागू होने पर निर्णय करेंगे. वहीं दूसरी ओर महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के प्रेसीडेंट पवन गोयनका ने कहा कि हम नए एमिशन स्टैंड‌र्ड्स के लागू होने के बाद अपने सभी माडलों की कीमतें बढ़ाएंगे. उन्होंने कहा कि कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी, इस पर जल्द फैसला होगा. फिएट इंडिया, मर्सिडीज-बेंज और टोयोटा जैसी कार कंपनियां भी कीमतें बढ़ा सकती हैं. हालांकि इन कंपनियों ने नए एमिशन स्टैंडर्ड के लागू होने पर कीमत बढ़ोतरी का फैसला किया है.

Saturday, March 27, 2010

वोडाफोन ने पेश किया आईफोन

टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंपनी वोडाफोन एस्सार ने देश में शुक्रवार को आईफोन 3जीएस पेश किया. इसकी कीमत 29,500 रुपए से शुरू होगी.
आईफोन 3जीएस अब तक का हाईएस्ट स्पीड से काम करने वाला आईफोन है. यह तीन मेगापिक्सल के आटोफोकस कैमरा, वीडियो रिकार्डिंग और फ्री वॉयस कंट्रोल स्पेशियाल्टी से लैस है. वोडाफोन एस्सार के चीफ डिस्ट्रिब्यूशन ऑफीसर कुमार रामनाथन ने कहा कि हम इंडिया में आईफोन 3जीएस पेश कर खुश हैं. हमें विश्वास है कि हमारे कस्टमर इस बेहतरीन आईफोन और लचीले टैक्स प्लान का फायदा उठाएंगे. आईफोन 3जी मुंबई, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में 33,500, (आठ जीबी कैटेगरी), 40,500 (16 जीबी) और 47,500 (32 जीबी कैटेगरी) में उपलब्ध होगा. अन्य जगहों पर यह आठ जीबी कैटेगरी में 29,500 रुपए, 16 जीबी में 35,500 रुपए और 32 जीबी में 41,500 रुपए में उपलब्ध होगा.

Friday, March 26, 2010

Stop Mounting threat from e-waste

आज की फास्ट लाइफ में हर आदमी खुद को अपडेट रखते हुए लग्जीरियस लाइफ जीना चाहता है. ऐसे में पूरे व‌र्ल्ड में इलेक्ट्रानिक गैजेट्स का यूज लगातार बढ़ता जा रहा है. निश्चित ही कम्प्यूटर, लैपटाप और मोबाइल जैसी चीजों ने लोगों को काफी राहत भी पहुंचाई है लेकिन एक सच यह भी है कि इन नई टेक्नॉलजी के साथ ढेर सारी प्रॉब्लम्स भी आई हैं. ई-वेस्ट इन्हीं में से एक है. यूनाइटेड नेशंस एनवायरमेंट प्रोग्राम (यूएनईपी) ने इसको लेकर वॉर्निग दी है. इस वॉर्निग में कहा गया है कि भारत और चीन जैसी डेवलपिंग कंट्रीज ने ई-वेस्ट को ठीक से रिसाइकल नहीं किया तो इसका पहाड़ खड़ा हो जाएगा.
यूएनईपी की ऑपरेशन काउंसिल की मीटिंग के दौरान जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 10 साल में भारत, चीन और अदर डेवलपिंग कंट्रीज में इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स की बिक्री बहुत तेजी से बढ़ेगी. इस तरह इनसे निकलने वाले ई-वेस्ट का लोगों की हेल्थ पर सीरियस इफेक्ट पड़ेगा.
डेंजरस डेटा
रिपोर्ट के मुताबिक इस समय भारत में फ्रिज से 100000 टन, टीवी से 275000 टन, कंप्यूटर से 56300 टन, प्रिंटर से 4700 टन और मोबाइल फोन से 1700 टन ई-वेस्ट हर साल निकलता है. अनुमान है कि 2020 तक पुराने कंप्यूटर्स की वजह से इलेक्ट्रानिक वेस्ट का डेटा भारत में 500 परसेंट और साउथ अफ्रीका व चीन में 200 से लेकर 400 परसेंट तक बढ़ जाएगा. 2020 तक भारत में मोबाइल फोन से निकला ई-वेस्ट 2007 के कंपैरिजन में 18 परसेंट और चीन में सात परसेंट अधिक होगा. साथ ही चीन और भारत में टीवी के ई-वेस्ट में डेढ़ से दोगुना तक का इजाफा होगा. जबकि रेफ्रिजरेटर से निकलने वाला ई-वेस्ट दो से तीन गुना तक बढ़ जाएगा.
जला देते हैं ई-वेस्ट
भारत में रिसाइकलिंग करने वाले गोल्ड जैसे मेटल हासिल करने के लिए ज्यादातर ई-वेस्ट जला देते हैं. इससे काफी मात्रा में विषैली गैसें निकलती हैं. इस पॉल्यूशन के खतरे के कंपैरिजन में प्राप्त मेटल्स की प्राइस हालांकि काफी कम होती है.