Pages

Saturday, September 23, 2017

Facts about momos

ट्रेडिशनली इसे सर्व करने के लिए बैंबू बोल्स यूज किया जाता है जिसे स्टीम्ड ट्रॉली के उपर रखते हैं . ओरिजनली मोमोस को कीकोमेन सॉस के साथ सर्व किया जाता है जिसमें राइस वाइन और चॉप्ड जिंजर पड़ता है. पर इंडियन टेस्ट के अकार्डिग उसे रेड चिली सॉस के साथ सर्व किया जाता है. साउथ चाइना के मोमोस के कम्पेरिजन में नार्थ इंडिया के मोमोस की कोटिंग थिक होती है और ये काफी स्पाइसी भी होते हैं. मोमोस बेसिकली चाईनीज डिश है जिसे साउथ चाइना के लोग शाम को टी के साथ एंज्वॉय करते हैं. मोमोस और डिमसम में फर्क है तो सिर्फ शेप का. मोमोस हाफ मून के शेप में होते हैं और डिमसम गोल शेप के. Momos are the latest hot and scrumptious snack option taking over the localites. Leaving pani puris and chat way back these small little dumplings have wooed the Indian palate in a very short span Momo mia फूड से रिलेटेड अपने क्वेश्चंस और स्पाइस इट अप पेज पर अपने सजेशंस और फीडबैक हमें इस आईडी पर दें वेट वॉचर्स स्टीम्ड मोमोज को फ्राइड स्टफ से बेहतर होने की वजह से पसंद करते हैं और टेस्ट वॉचर्स उनके टेस्ट के लिए. मानते हैं कि स्टीम्ड मोमोस तले हुए समोसा, चाट और पकौड़ों से काम्पटीशन में कई आगे है. मोमोस की बढ़ती पॉप्यूलैरिटी अब हर सीजन का हॉट फेवरेट स्नैक ऑप्शन बन चुका है जोकि टेस्टी होने के साथ साथ हेल्दी भी है.

 USP:  मोमोस का यूनीक सेलिंग प्वॉइंट है इनकी स्टफिंग. स्टफिंग को लेकर आप मोमोस में काफी एक्सपेरिमेंट्स कर सकते हैं. नॉन फ्राइड होने की वजह से हेल्थ कांशस लोग भी इसे मजे से एंज्वाय करते हैं. पिकैडली के शेफ अजय अवस्थी का कहना है कि,मैदे से बने होने के बावजूद हेल्थ कांशस लोग इसे आराम से खा सकते हैं क्योंकि बहुत थिन कोटिंग और स्टीम्ड होने की वजह से मैदे के अंदर मौजूद सारे फैटी एसिड निकल जाते हैं जिस वजह से ये नुकसान नहीं करता. इसकी ओरिजनल कीकोमेन सॉस भी फैट फ्री होती है पर इंडिया में सर्व की जाने वाली चिली या गार्लिक सॉस काफी ऑयली होती है.

Momos thoda hatke ये हैं कुछ टिप्स जिन्हें फॉलो करके आप अपने इस टेस्टी स्नैक ऑप्शन को और भी इंट्रेस्टिंग बना सकते हैं. मोमोस के लिए मैदा गूंथते समय आप गरम पानी का इस्तेमाल करें इससे मोमोज काफी सॉफ्ट बनेंगे. मोमोस में कीमे या चिकन की फिलिंग करने से पहले कीमे में गर्म पानी डालें और अच्छे से फेंट लें इससे वो लाइट वेट हो जाता है और अंदर की फिलिंग साफ्ट बनती है. मोमोस के लिए मैदे की चपातियां बेलते समय ये ध्यान रखें कि वो इतनी पतली हों कि उसके अंदर की स्टफिंग दिखने लगे वरना अगर लेयर मोटी होगी तो स्टीम करते समय मैदा पकेगा नहीं. करी मोमोस बनाने के लिए करी मसाले को फिलिंग में डालकर भून लें इससे उसका टेस्ट और भी बढ़ जाएगा. 4वेजिटेबल की फिलिंग करने से पहले उसे उबाल लें वरना स्टीम करते समय वो पानी छोड़ देगा.

Yummy swappings 4हेल्थ कांशस लोग चिकन और कीमे की फिलिंग को बींस, स्प्राउट्स, पालक, सोयाबीन से स्वैप कर सकते हैं. इनमें प्रोटीन ज्यादा होता है. 4वेजीस वैराइटी लाने के लिए इसमें चिली पनीर, आलू, चीज की स्टफिंग कर सकते हैं और नॉन वेजीस के पास चिली चिकन और करी मसाला का ऑप्शन मौजूद है.

  Variety is the spice of life मोमोज का असली मैजिक है उनकी स्टफिंग में. स्टफिंग में वेज और नॉनवेज दोनों ही तरह के काफी ऑप्शंस हैं. वैसे स्टफिंग के साथ थोड़े से एक्सपेरिमेंट्स करके आप कुछ नए फ्लेवर्स क्रिएट कर सकते हैं. स्टफिंग में डिफरेंट मैटीरियल का कॉम्बो भी किया जा सकता है.

नॉन वेज कॉम्बोज चिकेन के साथ कैरट के पीसेज मिलाकर स्टफिंग तैयार की जा सकती है. इसी तरह फिश की स्टफिंग तैयार कर रही हों तो उसमें वैरायटी के लिए स्पिनेच मिलाई जा सकती है. वेज कॉम्बोज 1. वेजिटेबल फिलिंग्स में कई सारे ऑप्शंस हैं. वैसे इन्हें और भी ज्यादा हेल्दी बनाने के लिए या सब्सि्टट्यूट के तौर पर स्प्राउट्स और बीन्स की फिलिंग भी कर सकते हैं. 2. स्पिनेच, स्प्राउट्स और बीन्स की फिलिंग काफी हेल्दी और टेस्टी होती है. 3. ब्रोकली और पीनट्स की स्टफिंग भी टेस्ट और हेल्थ दोनों के नजरिए से बेहतर है.

Chutney variations मोमोस में टेस्ट का तड़का लगाना हो तो चटनी से अच्छा और कु छ भी नहीं. आप मोमोस को अपने टेस्ट और पसंद के हिसाब से नीचे दी गई किसी भी चटनी के साथ सर्व कर सकते हैं. गार्लिक सॉस लहसुन की चटनी मस्टर्ड सॉस जो लोग प्याज और लेहसुन नहीं पसंद करते वो हरी धनिया की चटनी के साथ इसका मजा ले सकते हैं. घर में ऑरिजनल कीकोमेन सॉस बनाने के लिए आप सोया सॉस में थोड़ा पानी मिला कर उसक लाइट कर दें. बच्चें के लिए तीखे सॉस को टोमैटो सॉस ये स्वैप कर सकते हैं.

Khansama चिकन या मटन को मैरिनेट कराने के बाद उसका एक्चुअल कुकिंग टाइम क्या होना चाहिए?चिकन और मटन दोनों का मैरिनेशन टाइम अलग-अलग होता है. अगर आप चिकन बना रहे हैं तो दूसरे मैरिनेशन स्टेप के बाद केवल 7 से 10 मिनट में ही चिकन को पकाएं. इससे ज्यादा देर पकाएंगे तो चिकन के पीसेज टूट जाएंगे और ग्रेवी में ब्लेंड हो जाएंगे जबकि अगर आप मीट बना रहे हैं तो मैरिनेशन के दूसरे स्टेप के बाद 10 से 12 मिनट में उसे पकाएं. पीसेज बड़े हैं तो ज्यादा से ज्यादा 15 मिनट में पकाकर उसे गैस से उतार लें. अगर कबाब के पीसेज माउथ मेल्टिंग और जूसी चाहिए हो तों कुकिंग टाइम ड्योरेशन ज्यादा हो जाएगा. जूसी कबाब पीसेज के लिए पहले मैरिनेशन के दौरान जिंजर-गार्लिक पेस्ट के साथ 15 ग्राम पपाया डालकर भी आप मीट के पीसेज को सॉफ्ट और जूसी बना सकते हैं. मैं नॉन वेज खाने का शौकीन हूं लेकिन वो काफी हैवी होता है. नॉन-वेज की हैवीनेस और उसके हार्मफुल एफेक्ट्स से बचने का कोई उपाय बताएं. इसका सबसे अच्छा तरीका है कि इसे लो-फैट ऑइल या घी में कुक किया जाए. ऐसा घी प्रिफर न करें जिसका कॉलेस्ट्रॉल क्वॉलिटी वाइज अच्छा न हो. हम सबसे बड़ी गलती तब करते हैं जब हम डाइट में कार्बोहाइड्रेट के रेशियो को प्रोटीन रेशियो से ज्यादा कर देते हैं. मतलब नॉन-वेज यानी प्रोटीन वाले फूड को जब हम चावल वगैरह जैसी कार्बोहाइड्रेटेड फूड के साथ लेते हैं तो हैविनेस होना लाजमी है. टेस्ट के लिए कभी-कभी नॉन वेज के साथ चावल और ज्यादा रोटियां ले लेते हैं. इससे हैविनेस और उबकाई जैसा लगने लगता है. इसलिए नॉन वेज खाते समय खाली नॉन वेज खाएं तो वो हेल्दी तो होगा ही साथ में हैविनेस भी नहीं होगी. इसके अलावा ऐसी डाइट लेते समय ध्यान दें कि खाने के बीच में पानी न पीएं या फिर खाने के बाद भी पानी अवॉइड करें. बेहतर है खाने के 10-15 मिनट पानी लें. यह एक हेल्दी ऑप्शन है. मोमोज को सोया सॉस, चिली सॉस और विनेगर के साथ सर्व करें. मोमोज को खीरे के ठंडे स्लाइसेज के साथ सर्व कर सकते हैं. मोमोज को इंडियन स्टाइल में सर्व करने की बात करें तो इसके साथ यूज होने वाली चटनी का स्पाइसी होना बहुत जरूरी है. फॉर ए चेंज आप इसे पुदीना चटनी या चीली फ्लेवर के टमैटो फ्लेवर के साथ सर्व कर सकते हैं. इसके अलावा नारियल की चटनी और सांभर के साथ भी मोमोज टेस्टी लगते हैं.

Friday, September 22, 2017

अब लाइब्रेरी में बुक खोजनी नहीं पड़ेगी, इलेक्ट्रॉनिक चिप खुद बता देगी उसका पता

KANPUR: अब लाइब्रेरी में इलेक्ट्रॉनिक्स बार कोड का यूज शुरू हो गया है. एक चिप लगी होगी जो कि यह बता देगी कि बुक कहां और किस कंडीशन में है. आईआईटी कानपुर में आटोमेटेड लाइब्रेरी व आरएफआईडी लाइब्रेरी चल रही हैं. आरएफआईडी को इलेक्ट्रॉनिक्स बार कोड के रूप में पहचान दी गई है. इस टेक्नोलॉजी का यूज बुक्स को खोजने व इश्यू रिटर्न में किया जाता है.

महज लैब तक सीमित नहीं
यह बात उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टॉपिक पर वन वीक वर्कशाप का इनॉग्रेशन करते हुए आईआईटी के सुशांत पाठी ने कही. वर्कशाप में संस्थान के डायरेक्टर प्रो. डीबी शाक्यवार ने कहा कि न्यू टेक्नोलॉजी लगातार डेवलप की जा रही है. अच्छी बात यह है कि इसे महज लैब तक सीमित नहीं किया जा रहा है. इसका यूज एकेडिमक इंस्टीट्यूशन में अच्छी तरह से किया जा रहा है. आईआईटी के सुशांत पाठी ने कहा कि लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का यूज लाइब्रेरी के लिए बेहतर रहेगा. इससे स्टूडेंट्स को भी फायदा मिलेगा. वर्कशाप कोऑर्डिनेटर मुकेश कुमार सिंह ने आए गेस्ट का वेलकम किया. इस मौके पर आई पी मिश्रा, सीमा शुक्ला, प्रो प्रमोद कुमार, प्रो. महेन्द्र उत्तम, प्रो प्रशांत मौजूद रहे.

World leaders का word war, किम को बोला राकेटमैन तो ट्रंप को कह दिया कुत्‍ता

इन दिनों उत्‍तर कोरिया के राष्‍ट्रपति और अमरिकी राष्‍ट्रपति के बीच जम कर जुबानी जंग जारी है। कोई किसी को पागल कह रहा है, तो कोई किसी को कुत्‍ता तक कहने से बाज नहीं आ रहा। हालाकि ऐसा नहीं है कि दुनियाभर के बड़े नेताओं ने पहली बार अपना जुबानी नियंत्रण खोया है और ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग किया है। ऐसे किस्‍से पहले भी हो चुके हें। आइये जाने कुछ खास किस्‍से जब वरिष्‍ठ नेताओं का संयम छूटा और उनके मुंह से निकले गलत शब्‍द।

किम जोन उन की फिसलती जुबान हाल ही में अपने अजीबो गरीब फैसलों के बाद अजीबो गरीब बयानों के लिए भी उत्‍तर कोरिया का ये तानाशाह नेता चर्चा में में रहा है। किम जोंग उन ने अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को कभी विक्षिप्‍त दिमाग वाला यानि पागल कहा कहा तो कभी कुत्‍ता तक कह डाला। उन ने ट्रंप को आग से खेलने वाला गैंगस्‍टर भी कहा है।     

डोनाल्‍ड के बेमिसाल बोल ऐसा नहीं है कि सारा हमला केवल किम जोंग की ओर से ही हो रहा है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। ट्रंप ने उत्‍तर कोरिया की हरकतों को बेवजह बताया है। उन्‍होंने उन को रॉकेटमैन कहा और उत्‍तर कोरिया को परेशानी डालने वाला बताते हुए वहां गैस के लग रही लंबी लंबी कतारों के लिए चिंता जताई। 

अब्‍बासी का अंदाज 
वैसे चिर प्रतिद्वंदी भारत और पाकिस्‍तान के बीच तनातनी की खबरों के बीच पाक के नये नवेले प्रधानमंत्री के अंदाज भी सामने आ गए हैं। अब्‍बासी का ये मिजाज बिलकुल भी पिछले इतिहास से अलग नहीं है। पाक के पुराने राग की तर्ज पर अब्‍बासी ने भारत पर मानवाधिकारों का उल्‍लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्‍होंने ये आरोप कश्‍मीर के संदर्भ में लगाये हैं।

राजीव गांधी की फिसल चुकी है जुबान
वैसे ऐसा नहीं है कि ऐसा अग्रेसिव मिजाज वाले ही करते हैं। अपने शांत स्‍वभाव और सयंमित भाषा के लिए जाने जाने वाले पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री स्‍वर्गीय राजीव गांधी भी एक बार अपना आपा खो बैठे थे। दरसल प्रसिद्ध वकील राम जेठमलानी ने बोर्फोस तोप खरीद मामले में राजीव पर सीधे सीधे रिश्‍वत लेने का आरोप लगा दिया था और इस पर उन्‍हें सफाई देने को कहा। जिस पर राजीव अपना नियंत्रण खो बैठे और उन्‍होंने ये कहते हुए कि 'मैं हर भौंकने वाले कुत्‍ते को जवाब देने की जरूरत नहीं समझता' जेठमलानी को कुत्‍ता कह डाला। हालाकि इसके जवाब में जेठमलानी ने कहा था कि उन्‍हें इसमें कोई अपमान नहीं महसूस होता और वे लोकतंत्र का प्रहरी कुत्‍ता होने पर गर्व महसूस करते हैं। 

निक्‍सन की गंदी बात इसी तरह जब बांग्‍लादेश बनने के दौरान भारत पाकिस्‍तान का युद्ध हो रहा था तो अमेरिका पाक के पक्ष में था। उस समय अमेरिका में रिचर्ड निक्‍सन राष्‍ट्रपति  पद पर थे। वे एक रूढ़िवादी व्‍यक्‍ति थे जो एक महिला नेता के बजाय एक फौजी जनरल से दोस्‍ती करना बेहतर समझते थे। उस दौरान भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी थीं। पाकिस्‍तान पर इंदिरा गांधी की कामयाबी से बौखलाये निक्‍सन ने अपने NSA हेनरी किसिंजर से बातचीत के दौरान श्रीमती गांधी को 'बिच' कह दिया था और ये बातचीत रिकॉर्ड हो गई थी।  

Thursday, September 21, 2017

formulas for success

1. Communication : बिजनेस में आपकी कम्यूनिकेशन स्किल्स का इम्पॉर्टेट रोल होता है. टाइम पर प्रोजेक्ट कंप्लीट करके आप क्लाइंट को तो खुश करते ही हैं साथ ही फ्यूचर प्रोजेक्ट्स के लिए भी रिलेशन मेंटेन कर सकते हैं. आपकी कम्यूनिकेशन स्किल्स ही क्लाइंट और आपके रिलेशन को बेहतर रखती है.

2. Portfolio: 
वेब डेवलपर के लिए पोर्टफोलियो एक इम्पॉर्टेट पार्ट है. आपके बहुत से क्लाइंट्स आपसे पोर्टफोलियो की डिमांड करेंगे. क्लाइंट इससे आपके वर्क एक्सपीरियंस को तो जानता ही है साथ ही क्लाइंट की एक्सपेक्टेशंस का आइडिया भी आपको मिल जाता है. अपना टैलेंट दिखाने और क्लाइंट को इम्प्रेस करने का ये अच्छा तरीका है.

3. Marketing your services: 
मार्केटिंग बिजनेस के लिए एक जरूरी आस्पेक्ट है. लेकिन शुरू में ही ज्यादा मार्केटिंग करके अगर आपने काफी इंवेस्टमेंट कर दिया तो आपको लॉस भी हो सकता है. शुरुआत में आप चाहें तो ब्लॉग, ट्विटर या सोशल नेटवर्किग साइट्स के जरिए अपनी पब्लिसिटी कर सकते हैं. इसमें आपका बहुत ज्यादा इंवेस्टमेंट भी नहीं होगा और आपको बिजनेस बढ़ाने की अपॉ‌र्च्युनिटी भी मिलेगी.

वेब डिजाइनिंग एक टीम वर्क है. इसमें वेब डिजाइनर, वेब कंटेंट राइटर, फ्लैश डिजाइनर, एचटीएमएल एंड जावा प्रोग्रामर, ग्रॉफिक डिजाइनर और वेब प्लानर मेन रोल में होते हैं.
कुछ ऑर्गनाइजेशन अपनी वेबसाइट डेवलप करने के लिए इन प्रोफेशनल्स को हायर करते हैं जबकि कुछ कांट्रैक्ट बेसिस पर किसी वेब डेवलपर कम्पनी को प्रोजेक्ट देते हैं. वेब डेवलपिंग कम्पनीज अपनी सर्विसेज के लिए ऑर्गनाइजेशन से डेवलपिंग और मेंटेनेंस चार्ज लेती हैं. पब्लिक सेक्टर की ज्यादातर कम्पनियों की वेबसाइट वेबडेवलपिंग ऑर्गनाइजेशंस के थ्रू ही ऑपरेट होती हैं. इसके चलते इसमें बिजनेस और जॉब दोनों के ऑप्शन अवेलेबल हैं.

Proper training required

इस फील्ड में करियर बनाने के लिए आपको प्रॉपर स्टडी, ट्रेनिंग और थोड़ी क्रिएटिविटी की जरूरत भी होती है. बहुत से प्राइवेट टेक्निकल इंस्टीट्यूशन वेब डेवलपिंग का कोर्स रन कराते हैं जिसमें flash, animation, html, css, javascript और smarty लैंग्वेज की स्टडी कराई जाती है. इसके अलावा एक प्रॉपर वेब डिजाइनिंग कोर्स में डिजाइनिंग ऑस्पेक्ट्स, ग्राफिक्स और लेआउट की जानकारी भी दी जाती है जैसे-कलर थ्योरी, आर्टवर्क, वेबसाइट का थीम से मैच होना, साइट का डिजाइन फ्लो वगैरह. अगर आपने कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग किया हैं तो यह आपके इस प्रोफेशन के लिए एक्स्ट्रा एडवांटेज होगा.

After the course

कोर्स के बाद आप वेब डेवलपिंग कम्पनीज जैसे- Infosys, Wipro, Smartech, Zensaar, Cognizant, Harbinger and Upside Learning वगैरह में जॉब के लिए अप्लाई कर सकते हैं क्योंकि बिना ऐक्सपीरियंस के बिजनेस इस्टेब्लिश करना थोड़ा टफ है. ये कम्पनियां आपको इस फील्ड में प्रोफेशनल ट्रेनिंग भी प्रोवाइड कराते हैं जो आपके टेक्निकल स्किल्स को एन्हैंस करने में काफी हेल्प करेगा. इसके अलावा आपके पास फ्रीलांसिंग का भी ऑप्शन है. कई कम्पनियां अपनी वेबसाइट डिजाइन कराने के लिए स्किल्ड वेब डिजाइनर्स की तलाश करती हैं. आप चाहें तो वेब डेवलपिंग कम्पनीज के अलावा किसी एडवर्टाइजिंग कम्पनी, पब्लिशिंग कम्पनी, ऑडियो विजुअल मीडिया, डिजाइन स्टूडियोज, प्रिंटर्स एंड टाइपसेंटर्स, डिपार्टमेंटल स्टोर्स, मार्केटिंग फ‌र्म्स, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में फ्रीलांसिंग कर सकते हैं. 

Starting your own business

एक्सपीरियंस होने के बाद आप खुद की डेवलपिंग कम्पनी भी खोल सकते हैं. आपका वर्क एक्सपीरिएंस आपके बिजनेस को रन करने में काफी हेल्प करेगा, बस जरूरत है थोड़ी प्लानिंग की.
वेब डेवलपिंग कम्पनी आप छोटे से इंवेस्टमेंट से शुरू कर सकते हैं.
आप अपनी कम्पनी घर से ही ऑपरेट कर सकते हैं और इसके लिए आपको बस एक इंटरनेट कनेक्शन और एक लैपटॉप या कंप्यूटर की जरूरत होगी. 

उसके बाद सबसे जरूरी काम है अपनी कम्पनी का नाम रजिस्टर करवाना उसके बाद ही आप अपना काम स्टार्ट कर सकते हैं.
mफ्रेशर्स के लिए इम्पॉटर्ट है कि वो डमी वेबसाइट बना कर अपने क्लाइंट्स को दिखाएं.
mअब आप अपनी कम्पनी को वेब पर एडवर्टाइज कर सकते हैं

पाकिस्तान को ताकतवर बनाने वाली 11 मिसाइलें

पाकिस्तान में मिसाइल कार्यक्रम की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। भारत के मिसाइल कार्यक्रम के मुक़ाबले पाकिस्तान ने कई मिसाइल बनाई हैं। कई बार जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा तो पाकिस्तान ने कई मिसाइलों का परीक्षण किया। इसके लिए उत्तर कोरिया, ईरान और चीन की भी मदद ली। पढ़िए पाकिस्तान के पास कौन-कौन सी मिसाइलें हैं और वो कितनी ताक़तवर है।

हत्फ 1
पाकिस्तान की पहली मिसाइल थी हत्फ 1 यह एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 70 से 100 किलोमीटर है और यह अपने साथ 500 किलोग्राम तक का विस्फोटक ले जा सकती है।
पाकिस्तान ने इसे बनाने की घोषणा 1989 में की थी। सफल परीक्षण के बाद 1992 में इसे पाक सेना में शामिल किया गया था। इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान है।

हत्फ 2
इसे अब्दाली के नाम से भी जानते हैं। इसकी मारक क्षमता 180 से 200 किलोमीटर है। यह अपने साथ 250 से 450 किलो तक विस्फोटक ले जा सकती है।
इसे पाकिस्तानी सेना में 2005 में शामिल किया गया था। इसकी लंबाई 6.5 मीटर और व्यास 0.56 मीटर है। 2013 में दावा किया गया था कि यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।

हत्फ 3
इसे ग़ज़नवी के नाम से भी जानते हैं। यह भी कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 290 किलोमीटर तक है। यह अपने साथ 700 किलो तक विस्फोटक ला सकती है।
इसके बनाने की शुरुआत 1987 में हुई थी। परीक्षण के बाद 2004 में इसे सेना में शामिल किया गया था। यह 8.5 मीटर लंबी है और इसका व्यास 0.8 मीटर है। दावे के अनुसार यह परमाणु और परंपरागत हथियार ले जाने में सक्षम है।

हत्फ 4
इसे शाहीन भी कहते हैं. कम दूरी की यह बैलिस्टिक मिसाइल 750 किलोमीटर तक लक्ष्य को निशाना बना सकती है. यह एक हजार किलो तक विस्फोटक अपने साथ ले जाने में सक्षम है।
इसका निर्माण 1993 में शुरू हुआ और 1997 में परीक्षण किया गया. इसके बाद पहली बार इसका सार्वजनिक प्रदर्शन 1999 में किया गया था. 2003 में इसे सेना का हिस्सा बनाया गया. यह 12 मीटर लंबी है और इसका व्यास एक मीटर है।

हत्फ 5
इसे गौरी भी कहते हैं. यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी मारक क्षमता 1250 से 1500 किलोमीटर है. यह अपने साथ 700 किलो तक विस्फोटक ले जा सकती है।
इसे पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और ईरान ने मिलकर 1980 से बनाना शुरु किया था. 1998 में इसका पहला परीक्षण किया गया और 2003 में इसे सेना में शामिल किया गया था।
इसकी लंबाई 15.9 मीटर है और व्यास 1.35 मीटर है. मई 2004 में परीक्षण के बाद यह दावा किया गया कि यह परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखती है।

हत्फ 6
इसे शाहीन 2 भी कहते हैं. यह भी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी मारक क्षमता 1500 से 2000 किलोमीटर है. यह अपने साथ 700 किलो विस्फोटक ले जा सकती है. हालांकि दावा यह भी है कि इसकी क्षमता 1230 किलो तक विकसित कर ली गई है।
इसकी लंबाई 17.2 मीटर है और व्यास 1.4 मीटर है. इसका पहला प्रदर्शन मार्च 2000 में किया गया था. पहली दफा मार्च 2004 में इसका परीक्षण किया गया था. 2014 के अंत में इसे सेना में शामिल किया गया था. पाकिस्तान का दावा है कि इसका निशाना सौ फीसदी सटीक होता है।

हत्फ 7
इसे बाबर क्रूज मिसाइल के नाम से भी जानते हैं. यह पारंपरिक या परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. यह 350 से 700 किलोमीटर तक मार कर सकती है. इस सबसोनिक क्रूज मिसाइल को ज़मीन से लॉन्च किया जा सकता है।
भारत के क्रूज मिसाइल कार्यक्रमों के जवाब में 1990 में इस पर काम शुरू किया गया था. 450 किलो तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम इस मिसाइल को 2010 में सेना का हिस्सा बनाया गया था. यह 6.2 मीटर लंबी है और इसका व्यास 0.52 मीटर है।

हत्फ 8
इसे राद क्रूज मिसाइल भी कहते हैं. यह 350 किलोमीटर से अधिक मार करने वाली यह मिसाइल लड़ाकू क्षमता की है और कम ऊंचाई पर अधिक कुशलता से मार करने में सक्षम है।
यह भी पारंपरिक और परमाणु हथियारों को अपने साथ ले जा सकती है. इसकी लंबाई 4.85 मीटर और व्यास 0.5 मीटर है।

हत्फ 9
इसे नस्र भी कहते हैं. ज़मीन से ज़मीन पर मार करने में सक्षम यह मिसाइल परमाणु हथियार भी साथ ले जा सकती है. इसकी मारक क्षमता 60 किलोमीटर है. पहली बार इसका सफल परीक्षण अप्रैल 2011 में किया गया था. दावा है कि यह एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी मात देने में सक्षम है।

शाहीन 3
यह मध्यम दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी मारक क्षमता 2750 किलोमटीर है. यह परमाणु और पारंपरिक हथियार अपने साथ ले जा सकती है।
इसकी लंबाई 19.3 मीटर है और व्यास 1.4 मीटर है. इसे सेना की परेड में पहली बार मार्च 2016 में प्रदर्शित किया गया था. 2015 में इसके सफल परीक्षण का दावा किया गया था।

अबाबील
यह ज़मीन से ज़मीन पर 2200 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. जनवरी 2017 में इसका पहला सफल परीक्षण किया गया था।
पाक सेना की ओर से दावा किया गया था कि यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. साथ ही यह भी दावा किया गया था कि यह एक साथ कई लक्ष्य भेद सकती है. यह ठोस ईंधन वाली मिसाइल है और इसका व्यास 1.7 मीटर का है।

हम पत्तल को देहाती प्लेट बता रहे थे और ये जर्मनी वाले वही बेचकर झमाझम कमाई कर रहे हैं


कुछ साल पहले तक भारत में हम आप किसी भी निमंत्रण या भोज में जाए, तो वहां खाने की प्लेट के रूप में मिलता था पत्तल। जी हां वही पत्‍तल जो पेड़ के पत्तों से बनता था, पर जनाब अब तो हम मॉडर्न हो गए हैं। पत्तल को कूड़ा समझकर फेंक दिया है और प्लास्टिक और थर्माकोल में खाना खा कर रहे हैं, लेकिन जनाब ये जर्मनी वाले तो कुछ ज्यादा ही होशियार निकले जो हमारी वाली देसी पत्तल को बनाकर देश विदेश में बेच रहे हैं और खूब कमाई कर रहे हैं।

भारत में करीब एक दशक पहले तक शादी विवाह को छोड़कर किसी भी सामूहिक भोज और भंडारे में पत्‍तलों पर ही खाना परोसा जाता था। एकदम नेचुरल और देसी इस प्लेट में सब्जी चावल चटनी खाने का अपना ही मजा था। पर अब लोग मॉडर्न हो रहे हैं तो उनकी प्लेट भला देसी कैसे रह सकती है। लोगों ने भी पत्तल को कूड़े वाली प्लेट बताकर हटा दिया और ले आए प्लास्टिक और थर्माकोल वाली स्टाइलिश प्‍लेट जिन्हें कहीं भी फेंकिए, गलने में उन्‍हें सैकड़ों साल लगते हैं। जबकि हमारी पुरानी पत्‍तलें पूरी तरह से नेचुरल थी और आसानी से गल जाने वाली थी।

अब यही हमारी पुरानी देसी प्लेट को जर्मनी में कुछ लोग नेचुरल लीफ प्लेट बताकर धुआंधार प्रोडक्शन कर रहे हैं और देश ही नहीं बाहर भी एक्सपोर्ट कर रहे हैं। हाल ही में जर्मनी में एक नया बिजनेस स्टार्टअप शुरु हुआ है जिसका नाम है लीफ रिपब्लिक। एनवायरमेंट फ्रेंडली इस देसी प्रोडक्ट को देखकर जर्मनी वाले तो हक्का बक्का रह गए। वह तो कह रहे हैं कि यह शानदार प्लेट है प्लास्टिक से मजबूत है, आराम से मिट्टी में मिल जाती है और बिना पेड़ काटे भी बन जाती है।

जब दुनिया के पास कंप्‍यूटर भी नहीं था, तब अमेरिकन यूज करते थे स्‍मार्टफोन! खुद देखिए

अब तो भइया जर्मनी में हमारी देसी पत्तल कुछ ज्यादा ही पॉपुलर हो रही है। लीफ रिपब्लिक वालों ने तो बकायदा फैक्ट्री डालकर आधुनिक मशीनों से पत्तलों का धुआंधार प्रोडक्शन करना शुरू कर दिया है। पहले तो ये लोग देश में ही पत्‍तलें बेच रहे थे और अब तो विदेशी लोग भी जर्मनी की इस देशी टेक्नोलॉजी को पसंद करने लगे हैं। इस वीडियों में आप खुद देखें कि जर्मनी वालों हमारी देशी पत्‍तल का नया अवतार कैसे लॉन्‍च किया है।
मिलिट्री ने अपने लिए किए थे ये 9 शानदार अविष्‍कार, अब हम-आप इनके बिना रह नहीं सकते

ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट पर जर्मनी की यह नेचुरल लीफ प्लेट ऊंची कीमत पर बिक रही है। पहले हमें लगा एक बार उनसे मंगा कर देखें कि आखिर उनकी प्लेट में ऐसा क्या है जो हमारे पत्तल में नहीं था। पर ऑनलाइन साइट पर उनकी पत्‍तल का रेट देख कर हवा खराब हो गई। पत्‍तल के एक पैक की कीमत थी है करीब 9 यूरो यानी कि इंडियन रुपए में लगभग 650 रुपए। अरे भईया इतनी कीमत में तो हम पत्‍तल की पूरी दुकान खरीद लेंगे, लेकिन पंगा यह है कि यहां लोगों को पत्तल देहाती प्लेट नजर आती है। इसमें खाना सर्व करना उनकी मॉडर्न लाइफस्टाइल को सूट नहीं करता। वैसे एक बात बता दें जर्मनी वाले हमसे ज्यादा मॉडर्न हैं

Wednesday, September 20, 2017

खुद को प्लमेसमेंट के लिए तैयार करें

हो सकता है कि आपने बहुत मेहनत से किसी बहुत अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले लिया हो लेकिन एक बात जान लीजिए कॉम्पिटिशन यहां से खत्म नहीं होता. प्लेसमेंट के वक्त, जबकि सारे स्टूडेंट्स एक ही कॉलेज से होते हैं ऐसे में कम्पनीज कैंडिडेट्स में कुछ एडिशनल स्किल्स ढूंढ़ती हैं. बेहतर है कि अभी से खुद को उस प्लमेसमेंट सीजन के लिए तैयार करें. 

Leadership ,1,quality

कॉलेजेस में अलग-अलग प्रोग्राम और एक्टिविटीज के लिए डिफरेंट ग्रुप होते हैं, जिन्हें आप लीड कर सकते हैं. इसके अलावा अगर आप किसी इवेंट को कॉलेज में शुरू करते हैं तो आपको इसका एडवांटेज मिलेगा. 

How it works:
अपने पोर्टफोलियो में वो सारे इनीशिएटिव्स मेंशन करें जो आपने लिए हों. कोई इवेंट आपने ऑर्गनाइज कराया हो, या टीम वर्किंग वाली किसी भी तरह की एक्टिविटी में पार्ट लिया हो. इम्प्लॉयर एक प्रोफेशनल कैंडिडेट में लीडरशिप क्वॉलिटी चाहते हैं.

Social initiative
आपके कॉलेज में अगर कोई ऐसा स्टूडेंट ग्रुप है जो सोशल इनीशिएटिव्स लेता है तो आप उससे जुड़ सकते हैं. ज्यादातर कॉलेजेस में स्टूडेंट्स छोटे-छोटे ग्रुप्स बनाकर स्टूडेंट्स को पढ़ाने, अंडरप्रिविलेज्ड लोगों को गाइड करने जैसे इनीशिएटिव्स लेते हैं. ये इनीशिएटिव्स आपका कंसर्न शो करते हैं.

How it works:
 
एक मैनेजमेंट कॉलेज से एमबीए कर रहे महेश मिश्रा कहते हैं, ऐसे इनीशिएटिव्स साबित करते हैं कि आप सिर्फ अपने डिपार्टमेंट तक सीमित नहीं रहते बल्कि दूसरे लोगों के लिए भी कंसर्न रहते हैं. आपकी सोशल इनीशिएटिव्स को कम्पनी जरूर नोटिस करेंगी.

Multitasking

कम्पनीज ऐसे एम्प्लॉइज ढूंढ़ती हैं जो स्ट्रेस में भी अच्छा काम करें. ऐसे में आपका शेड्यूल एकेडमिक्स के साथ ही एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज, कल्चरल इवेंट्स, और दूसरे इनीशिएटिव्स का कांबिनेशन होना चाहिए. इससे रिस्पांसिबिलिटीज मैनेज करना, और स्ट्रेस मैनेजमेंट भी आता है.

How it works:
 
एचसीएल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमित कुमार निषाद बताते हैं, कॉलेज में अक्सर कल्चरल प्रोग्राम एग्जाम के कुछ टाइम पहले फाइनल हो जाते थे. वर्किग कमिटी का मेंबर होने की वजह से इवेंट्स को ऑर्गनाइज कराने में बहुत टाइम देना पड़ता था, इसलिए अच्छी परफॉर्मेस के लिए लेट नाइट स्टडी करता था. कैम्पस सेलेक्शन में रिक्रूटर्स ने भी इस बात को नोटिस किया और इस बात को पूछा कि आपने इन सभी चीजों को कैसे मैनेज किया. 

Planning skills

प्लानिंग स्किल्स डेवलप करने के लिए जरूरी है कुछ नए इनीशिएटिव्स लेना. एचबीटीआई से बीटेक कर चुके अभिषेक सिंह बताते हैं, जब मैं प्लानिंग कमिटी में था तो मैंने अपने एनुअल फेस्ट में एक नेशनल एस्से कॉम्पिटिशन शुरू कराया जो सभी स्टूडेंट्स के लिए ओपेन था. ऐसे आइडियाज और उन पर वर्क करने का तरीका आपका नेचर ऑफ वर्क शो करता है. ऐसे में आपकी प्लानिंग और उनके रिजल्ट्स इन्टरव्यूअर पर पॉजिटिव असर डाल सकते हैं
.
How it works: 
प्लानिंग में बहुत सी चीजें इन्वॉल्व होती हैं, जैसे रिसोर्सेज परखना, काम का तरीका तय करना, आने वाली प्रॉब्लम्स का एनालिसिस करना, वगैरह. इससे इंटरव्यूअर को आपके काम के तरीके का आइडिया हो जाता है. अपने रिक्रूटर्स को शो करें कि आप ऑर्गनाइजेशंस में भी कुछ नया कर सकते हैं.

Academic record

एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में बहुत एक्टिव हों और एकेडमिक रिकॉर्ड सेटिस्फैक्ट्री ना हो तो इम्प्रेशन अच्छा पड़ने की उम्मीद बिल्कुल ना करें. याद रखें, एकेडमिक्स आपका मेन फोकस एरिया है. इसलिए थ्रू आउट अपनी एकेडमिक परफॉर्मेस पर ध्यान दें.

How it works:
 रिक्रूटर्स को ऐसे लोगों की तलाश होती है जिनका फोकस अपने टार्गेट पर भी हो और जो दूसरी चीजों में भी एक्टिव हों. एकेडमिक्स के बाद ही आपकी ये स्किल्स काउंट होती हैं. इसलिए एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टीविटीज के साथ स्टडी को इग्नोर करना ठीक नहीं.

Tuesday, September 19, 2017

इंग्लिश में लोगों को ग्रीट करने के तरीके

इंग्लिश में लोगों को ग्रीट करने के कई तरीके हो सकते हैं. इसलिए हर बार एक ही रटे-रटाए तरीके से विश करना बोरिंग हो सकता है और सामने वाला भी आपमें इंट्रेस्ट नहीं दिखाता. हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे डिफरेंट तरीके जो आपके फॉर्मल ग्रीटिंग जेस्चर्स में वैराइटी लाएंगे.. 1. किसी को ग्रीट करने का सबसे सिंपल तरीका है सामने वाले से आई कांटैक्ट बनाकर स्माइल देकर hi या hello कहें. Eg: Hi! Mrs.Sharma. Hello! Mr.Malhotra. 

2. अगर सामने वाले ने कु छ अच्छा पहना हो या वो वाकई अच्छा दिख रहा हो तो आप ग्रीट करते वक्त सामने वाले को कॉम्प्लीमेंट भी कर सकते. Eg: Good morning! Mr. Sharma. This shirt really suits you. Good morning! Mrs. Malhotra. You really look nice in a white saree.

 3. अगर कोई फ्रैंड या कलीग थोड़ा क्लोज हो तो आप उनके पास जाकर फॉर्मली हैंड शेक कर सकते हैं और उनसे पूछ सकते हैं कि वो कैसे हैं. फिजिकल ग्रीटिंग फॉर्मल होने के साथ-साथ पोलाइट भी लगती है. Eg: Hello Mr. Sharma, How are you? Hello Mrs. Malhotra, How do you do? 

4. अगर आप अपने बॉस या किसी सीनियर को ग्रीट करने जा रहे हैं तो स्माइल देकर और सिर को थोड़ा झुकाकर रिस्पेक्टफुली और पोलाइट तरीके से good morning या good afternoon विश करें. याद रहे एंड में सर या मैम लगाना ना भूलें. Eg: Good morning sir! Good afternoon ma’am!

 5. अगर आपके बॉस की तबीयत अच्छी ना लग रही हो तो आप उनसे ग्रीट करते वक्त उनसे उनकी तबीयत के बारे में भी पूछ सकते हैं. Eg: Good Morning sir! I heard you are not well. How are you feeling now? Good afternoon mam! You are not looking well. Is everything alright? नेक्स्ट वीक देखिए इनफॉर्मल वे में ग्रीटिंग के कुछ नए तरीके

Monday, September 18, 2017

हिमाचल की चंद्रताल झील पर प्रदूषण की मार


 कुल्लू (चंद्रताल) प्राकृतिक नजारे के लिए मशहूर लाहौल-स्पीति जिले की चंद्रताल झील प्रदूषण की मार से अछूती नहीं रही। क भी झील के नीले पानी में पहाड़ अपनी छवि से बात करते थे, आज मटमैला पानी इस दर्पण को खराब कर है। लाहौल-स्पीति के बातल से 14.5 किमी दूर स्थित चंद्रताल झील में सबसे पहले 1989 में विदेशी पर्यटक ने दस्तक दी। उसके बाद झील के अप्रीतम सौंदर्य से आकर्षित होकर वहां देशी-विदेशी पर्यटकों की आमद बढ़ने लगी। पर्यटकों के आते ही झील व इसके आसपास पानी की बोतलें, घोड़े की लीद, पॉलीथीन आदि कचरा पहुंच गया। इससे झील प्रदूषित हो गई। हालत यह है कि 4290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित 4900 हेक्टेयर में फैली चंद्रताल झील का कभी नीला दिखने वाला पानी गंदा हो गया है। झील के निकट टेंटों में पर्यटक ठहरते हैं जो वहां से जाने के बाद गंदगी वहीं छोड़ जाते हैं। इससे चंद्रताल की सुंदरता को ग्रहण लग गया है। नेचर इंडिया ने की पहल व‌र्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर इंडिया नामक संस्था ने तीन हजार मीटर से ऊंची झीलों में प्रदूषण समाप्त करने का बीड़ा उठाया है। इनमें चंद्रताल व मणिमहेश झील शामिल है। संस्था ने चंद्रताल में कूड़े कचरे व प्लास्टिक की बोतलों को डालने के लिए किल्टों (पीठ पर रखी जाने वाली टोकरी) का इस्तेमाल किया है। संस्था के साथ ही वन विभाग ने भी वहां चौकीदार तैनात किया है ताकि झील को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। झील तक बनी सड़क पर अब गाडि़यों के ले जाने पर भी पांबदी है ताकि प्रदूषण न फैले। संस्था ने जागरूकता के लिए बोर्ड भी लगाए हैं। झील में प्रदूषण चिंतनीय : डॉ. सुनील व‌र्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर इंडिया के परियोजना अधिकारी डॉ. सुनील शर्मा ने  कहा कि झील में प्रदूषण चिंतनीय है। झील को प्रदूषण मुक्त करने के लिए पर्यावरण संरक्षण जरूरी है। इस दिशा में प्रयास जारी हैं। सरकार करेगी मदद : एडीसी स्पीति के एडीसी प्रियतु मंडल ने बताया कि चंद्रताल को प्रदूषण मुक्त करने के लिए व‌र्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर इंडिया व वाइल्ड लाइफ विभाग मिलकर कार्य कर रहा है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सरकार भी मदद करेगी।

बीस गुना बढ़े एचआईवी पॉजिटिव

देहरादून उत्तराखंड में एड्स रोगियों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। पिछले आठ साल में एचआईवी पॉजिटिव के मामलों में 20 गुना से ज्यादा वृद्धि हुई है। इस खतरे की घंटी के मद्देनजर अगर जल्द कारगर कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। उत्तराखंड एड्स कंट्रोल सोसायटी के आंकड़े तो यही बता रहे हैं। सूबे में एचआईवी संक्रमित रोगियों की संख्या पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। वर्ष  2002 में 23 लोग संक्रमित पाए गये। वर्ष 2009 में 680 और इस वर्ष जनवरी से जून के बीच 421 मामले सामने आए। वर्ष 2002 से जून 2010 तक सूबे में कुल मिलाकर 2951 लोगों को एचआइवी पॉजिटिव पाया गया है। सबसे अधिक दून में (1438) और उत्तरकाशी में सबसे कम (29) मामले सकारात्मक पाए गए। आंकड़ों से यह तो तय है कि इस दिशा में किए गए प्रयासों में कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है। हालांकि विभाग का कहना है सूबे में 24 एनजीओ के माध्यम से हाई रिस्क ग्रुप के बीच कंबाइंड टारगेटेट इंटरवेंशन कार्यक्रम चलाया जा रहा है। एचआईवी संक्रमण का पता रक्त जांच से ही पता चलता है। इसके लिए सूबे में 48 एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। सभी केंद्रों पर काउंसलरों की भी नियुक्ति की गई है। काउंसलिंग एड्स के प्रति भ्रांतियों को दूर करने में सहायक सिद्ध हुआ है। साथ ही संक्रमित व्यक्ति को जीवन निर्वाह के लिए सकारात्मक प्रवृत्ति अपनाने का सुझाव भी इसके माध्यम से दिया जा रहा है। इन सबके बीच एक बड़ा सवाल यह है कि इतनी कोशिशों के बावजूद एड्स रोगियों की संख्या में कमी क्यों नहीं आ पा रही है। उत्तराखंड एड्स कंट्रोल सोसायटी के अपर परियोजना निदेशक डा.पीसी कापड़ी के मुताबिक काउंसलिंग को आने वालों की संख्या में बढ़ोतरी अच्छा संकेत है। हालांकि लोगों में एड्स के प्रति जागरूकता की अभी भी कमी है। विभागीय स्तर पर प्रयासों में कोई कमी नहीं हैं।

हाईब्रिड के फेर में गुम हुई देसी किस्में

 बक्सर कम लागत और अधिक पैदावार के फेर में धान के हाइब्रिड बीजों का प्रचलन बढ़ा कि नगपुरिया, कनकजीर, सीता सुंदरी और कलमदान जैसी दर्जन भर देशी किस्में विलुप्त हो गईं। कम पानी में पैदा होने वाली ये किस्में खास स्वाद और सुगंध के लिए जानी जाती थीं। इतना ही नहीं इनमें शरीर को प्रतिरक्षण क्षमता प्रदान करने के नैसर्गिक गुण भी थे। इन देसी प्रजातियों की खास बात यह थी कि इन्हें पुरखों ने मौसम के अनुकूल तैयार किया था। इटाढ़ी प्रखंड मेंजिगना गांव के किसान रामभुवन मिश्र ने बताया कि देसी किस्मों में पैदावार कम जरूर होती थी, पर स्वाद भरपूर होता था। किसानों की मानें तो पुरानी किस्में बड़ी मंसूरिया, कतिका, घिलौनवा, मोदक, बंगलवा व सोनाचूर को उपजाने में खाद-पानी का ज्यादा इस्तेमाल भी नहीं करना पड़ता था। वहीं, कुछ किस्में मौसम के अनुकूल थीं। सेलहा व साठी जैसी किस्में कम बारिश की आशंका को देखते हुए किसान लगाते थे। इसके पौधे साठ दिनों में तैयार हो जाते थे वहीं, बेसारिया जैसी प्रजाति का इस्तेमाल किसान अधिक बारिश होने की स्थिति में करते थे। बन्नी भरखरा के किसान जयप्रकाश सिंह का कहना है कि हाइब्रिड किस्मों में यूरिया, जिंक व डीएपी आदि रसायनिक खादों का दो बार इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे खेतों की मृदा शक्ति पर असर पड़ रहा है। जबकि देसी किस्में देसी खाद से ही तैयार हो जाती थीं। कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर के वैज्ञानिक डा.देवकरण का कहना है कि देसी किस्मों में नैसर्गिक गुण होते थे। कई प्रजातियों को प्रजनन केंद्रों में सुरक्षित रखा गया है। इन्हीं के जरिए नये बीजों का प्रजनन कराया जाता है। हाइब्रिड बीजों से प्रति एकड़ पच्चीस क्विंटल पैदावार हो रही है। जबकि देसी प्रजातियां 10-12 क्विंटल ही पैदावार देने में सक्षम थीं।