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Wednesday, October 7, 2009

Gandhi on Facebook & Twitter’

Gandhi on Facebook & Twitter

संयुक्त राष्ट्र गांधी संयुक्त राष्ट्र पर डाक टिकट जारी: शराब के अंतर्राष्ट्रीय दिवस हिंसा, संयुक्त राष्ट्र चिह्नित किया है उसके जन्म के 140 वीं वर्षगांठ के अवसर पर Mahathma गांधी की एक डाक टिकट जारी किया. संयुक्त राष्ट्र, विश्व शरीर की डाक एजेंसी डाक प्रशासन, एक डॉलर के एक दुनिया द्वारा डिजाइन मशहूर आधारित कलाकार Ferdie Pacheco मियामी टिकट लाल, नीले और सोने में राष्ट्र के पिता के साथ, जारी की. भी लिफाफे डाक टिकट और संयुक्त 'राष्ट्र मुहर के साथ चिह्नित बिक्री पर थे. कई संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों, एक भारतीय मिशन द्वारा आयोजित समारोह में मौजूद अपने जन्म के 140 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए, महात्मा गांधी के जीवन के प्रभाव को दोहराया. "कई मायनों में, महात्मा गांधी के संयुक्त राष्ट्र previsioned. , हरदीप सिंह पुरी भारत के संयुक्त राष्ट्र के राजदूत का काम है कि हम मानव अधिकारों के क्षेत्र में कर की ज्यादातर नस्लीय भेदभाव, जिसे वे पर ध्यान केंद्रित के खिलाफ संघर्ष में अपनी उत्पत्ति बकाया है "कहा. महासभा अली Treki के राष्ट्रपति और गैर मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द के लिए गांधी की प्रतिबद्धता पर जोर दिया मुसलमानों. गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित, संयुक्त राष्ट्र Susan चावल के लिए अमेरिकी दूत ने कहा कि गांधी ने लाखों अमेरिकियों को प्रभावित किया. महात्मा सामाजिक नेटवर्किंग साइटों को गले लगा लिया होगा को जनता के बीच अपनी पहुंच व्यापक लंदन (3, एजेंसी अक्टूबर): अगर वह आज जीवित है, तो भारत के पिता महात्मा गांधी, हो सकता है प्रौद्योगिकी को अपने बचने पर काबू पाने और सॉफ्टवेयर की जुटाने की शक्ति को गले लगा जैसे के रूप में Facebook और चहचहाना बड़े पैमाने पर लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए, जॉर्ज लंदन के Paxton गांधी फाउंडेशन के आधार पर दावा करता है. गांधी, जो जीवन का एक आसान तरीका है वापसी की भी वकालत "कई बार बहुत विरोधी प्रौद्योगिकी लग रहा था," कह के रूप में नेशनल ज्योग्राफिक, 1,1 uotes Paxton,. गांधी का मानना है कि प्रौद्योगिकी था अक्सर गरीबों की कीमत पर किया जाता था, Paxton कहा. "भारत में बेरोजगार, और प्रौद्योगिकी की शुरूआत उन्हें लाभ नहीं था की भारी संख्या रहे थे," उन्होंने कहा. "कारखानों के मालिकों को लाभ यह था, वगैरह." इसलिए गांधी अक्सर एक चरखा के पास फोटो था, Paxton कहा. सरल उपकरण भारत के ग्रामीण को कपास की है, जो उनकी आय के पूरक और महंगी, कारखाने, कपड़ों की एक वैकल्पिक प्रस्ताव कर सकता है गरीबों द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन गांधी के आंदोलन को ब्रिटिश शासन से, अंत में 1947 में हासिल की भारत मुक्त करने के लिए होता बिना अपने दिन के Googles: तार असंभव है, समाचार पत्र, टेलीफोन.

Tiger conservation efforts must begin now Tiger Year

बाघ संरक्षण के लिए अब शुरू होगा बाघ वर्ष


NEW DELHI/ WASHINGTONL: इंडिया के नेशनल एनीमल बाघ को बचाने के लिए सरकार ने नई पहल की है. बाघ संरक्षण के लिए 1973 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट टाइगर भी कोई खास परिणाम नहीं दे पाया. अब इंडियन गवर्नमेंट ने बाघ संरक्षण पर इंटरनेशनल कम्युनिटी का ध्यान आकर्षित करने के लिए नेक्स्ट इयर को बाघ वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया है. वेलेंटाइन डे पर शुरू होने वाले इस बाघ वर्ष की शुरुआत जिम कार्बेट राष्ट्रीय पार्क से होगी. इन्वायरमेंट मिनिस्टर जयराम रमेश ने इस बात की घोषणा की. इस संबंध में भारत के प्रपोजल को प्रतिष्ठित स्मिथसोनियन संस्थान में आयोजित एक बैठक के दौरान स्वीकार किया गया. इस बैठक में विश्व बैंक सहित कई अन्य एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल थे.
दी जाएगी जानकारी
इस दौरान जयराम रमेश ने कहा, 14 फरवरी 2010 से शुरू हो रहे बाघ वर्ष का समापन नवंबर 2010 में रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में होगा. इस आयोजन के दौरान बाघ संरक्षण के क्षेत्र में भारत के प्रयासों के बारे में सबको जानकारी दी जाएगी. दुनियाभर में फैले बाघ की कुल आबादी का 60 परसेंट भारतीय जंगलों में है. अभी तक दुनिया के किसी देश ने इतना व्यापक संरक्षण कार्यक्रम नहीं चलाया, जितना कि भारत ने.
बता दें कि रूस सितंबर 2010 में विश्व बाघ शिखरवार्ता का आयोजन करने जा रहा है. उन्होंने कहा, व‌र्ल्ड बैंक के प्रेसीडेंट राबर्ट बी. जोलिक की भी इस परियोजना में काफी रुचि है. जोलिक इस साल दिसंबर में भारत दौरे पर आने वाले हैं.

Surfer saved by Tsunami waves

Tsunami के लहरों से बचा Surfer


LONDON (3 Oct, Agency): सुनामी का नाम सुनकर ही मन में दहशत पैदा हो जाती है. 2004 का वो मंजर आंखों के आगे झूल जाता है जब साउथ इंडिया समेत साउथ-ईस्ट एशिया के कई तटीय शहरों में सुनामी ने कहर बरपाया था, लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि 20 फीट ऊपर उठती दैत्याकार लहरों में सर्फिंग करते हुए भी कोई बच सकता है? शायद नहीं. लेकिन ब्रिटेन के डेवोन में रहने वाले टाम गोगोला ने कुदरत के कहर को मात देकर मौत पर फतह हासिल कर ली.
साउथ प्रशांत महासागर के समोआ द्वीप में पिछले दिनों सुनामी ने भयंकर तबाही मचाई थी. टाम समोआ पर छुट्टियां मनाने गए थे. जिस समय सुनामी आया, उस समय गोगोला समुद्र की लहरों से अठखेलियां कर रहे थे. 22 वर्षीय टाम के पास उस वक्त करने के लिए कुछ नहीं था. सुनामी की लहरों को चीरने के लिए वे सर्फिंग बोर्ड पर तनकर खड़े रहे.

Rajasthan to launch Aaata-Daal scheme

Aaata-Daal scheme in Rajasthan


जयपुर (3, एजेंसी अक्टूबर): खाद्यान्न की कालाबाजारी नियंत्रित करने के लिए, राजस्थान शनिवार को सरकार 'के शुभारंभ की घोषणा की Aaata-दाल' योजना को दालों और सस्ती दरों पर गेहूं की जनता के लिए उपलब्ध है.
सुविधा शुरू में राज्य के सात कल से मंडल मुख्यालय में बनाया जाएगा. गेहूं और दालों 4 अक्टूबर से 861 डेयरी बूथ और 42 सहकारी राज्य भर में उपभोक्ता केन्द्रों पर उपलब्ध होगा, और प्रत्येक राशन कार्ड धारक एक महीने में गेहूं का वजन 10 किलो और दालों की 4 किलो उचित दरों पर खरीद सकते हैं, बाबू लाल Naagar, राज्य खाद्य और आपूर्ति मंत्री ने आज यहां बताया था.
के लिए केवल आदिवासी और अल्पसंख्यकों को
यह सुविधा आदिवासी और अल्पसंख्यक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों पर उपलब्ध राज्य है, जहां डेयरी जूते की संख्या कम कर रहे हैं की आबादी वाले क्षेत्रों में होगी, उन्होंने कहा. कई राज्य के मंत्रियों और सांसदों के साथ कल को जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, भरतपुर, अजमेर, उदयपुर और कोटा मंडल मुख्यालय में योजना का शुभारंभ करेंगे.
अधिक योजनाएं
नगर ने कहा कि खाद्य तेलों को भी उपलब्ध कराया जाएगा अगर दर आने वाले दिनों में बढ़ा रहे हैं, जबकि एक अन्य योजना के मिट्टी के तेल की कालाबाजारी पर नियंत्रण के लिए जो वर्तमान में प्रक्रिया में है जल्द ही शुरू किया जाएगा.

The foreign friend

i next desk : - इंडियन मार्केट ग्रो कर रहा है. वजह है बड़ी तादाद में हो रहा फॉरेन इनवेस्टमेंट, जिसके चलते एक्स्प‌र्ट्स का मानना है कि हर साल की तरह इस साल मानसून का निगेटिव इफेक्ट मार्केट पर नहीं पड़ेगा. मार्केट में बढ़ते मनी फ्लो का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस साल अभी तक फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एफएफआई) द्वारा इंडियन शेयर मार्केट में 60 हजार करोड़ (करीब 12 अरब डॉलर) इनवेस्ट किए जा चुके हैं, जबकि अकेले सितंबर महीने में 18 हजार 344 करोड़ का इनवेस्टमेंट किया गया था. 30 सितंबर को खत्म हुए मानसून के बाद से ही मार्केट ने नए बेंचमार्क सेट किए हैं. इसी ड्यूरेशन में बीएसई सेंसेक्स 15.5 परसेंट की उछाल के साथ 17127 तक पहुंच गया.एक राय नहीं एक्सप‌र्ट्सकुछ एक्सप‌र्ट्स का मानना है कि इंडेक्स का यह ह्यूंज डाइवरजेंस मानसून ट्रेंड के कारण हो रहा है. उनके मुताबिक रेनफाल के दौरान इंडियन इकोनॉमी डाउन हुई और अब मानसून के बाद यह नए मुकाम की ओर है. हालांकि कुछ अन्य एक्सप‌र्ट्स का मानना है कि इकोनॉमी अब भी बहुत ज्यादा हाई नहीं हुई है. मानसून में रेनफाल की कमी के कारण जीडीपी ग्रोथ में कमी आई जिसके चलते एग्रो कमोडिटी प्राइजेस ग्लोबली इनक्रीज हुए. इसके साथ ही खाने की चीजों में भी बढ़ोत्तरी हुई.37 साल बादइंडियन मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) के मुताबिक उसने 22 सितंबर को 12 स्टेट्स के 299 डिस्ट्रिक्ट में सूखे की स्थिति पर निगाह रखी और पाया कि इस साल मानसून में 23 परसेंट की कमी आई जो 1972 के बाद सबसे खराब सिचुएशन थी. आईएमडी के मुताबिक सूखे की स्थिति मिड जून के बाद और खराब हो गई. इस इश्यू की गंभीरता को देखते हुए नेशनल रेनफेड अथॉरिटी ने पैन इंडिया ड्रॉट मैनेजमेंट स्ट्रैटजी के साथ एक मसौदा तैयार किया.बारिश की कमीएक्सप‌र्ट्स के मुताबिक बारिश की कमी के चलते देश का एग्रीकल्चर और डॉमेस्टिक कंजंप्शन इफेक्टेड हुआ जिसके चलते जरूरी चीजें जैसे खाने का सामान और घरेलू चीजों के दाम आसमान पर पहुंच गए. इसी के चलते सरकारी फाइनेंस भी प्रभावित हुआ क्योंकि सूखे से निपटने के लिए सरकार को रिलीफ फंड जारी करने पड़े. इस साल मानसून का डिस्ट्रिब्यूशन भी नॉर्मल नहीं रहा. सीजन की 70 परसेंट बारिश जुलाई और अगस्त के बीच हुई. जून में 46 परसेंट बारिश हुई जो नॉर्मल से कम थी, जबकि अगस्त और सितंबर में बारिश की फिर कमी हुई. इन्हीं सब चीजों ने इस साल एग्रो कमोडिटीज प्राइजेज को आसमान पर पहुंचा दिया.

Is running ghost of recession

भाग रहा है मंदीका भूत

NEW DELHI (3 Oct, Jnn): ग्लोबल रिसेशन का भूत अभी भले ही दुनिया के अन्य देशों से पूरी तरह न भागा हो, लेकिन इंडिया इससे अब पूरी तरह उबर गया है. कुछ ऐसा ही इशारा देशी आईटी कंपनीज ने पूरे एक साल से बंद पड़े रिक्रूटमेंट को खोलकर दिया है. इन कंपनीज ने एक बार फिर जोर-शोर से रिक्रूटमेंट प्रॉसेस शुरू कर दिए है. अब देश की प्रमुख आईटी कंपनी एचसीएल टेक्नोलॉजी को ही ले लीजिए. नोएडा स्थित यह कंपनी अगले कुछ महीने में 2 हजार लोगों को नौकरी देने जा रही है. इनमें बड़ी तादाद में फ्रेशर शामिल होंगे. इस कंपनी ने फाइनेंसियल इयर 2008-09 के दौरान 15 हजार इंप्याइज का रिक्रूटमेंट किया था.
विदेशों में भी बढ़ाया बिजनेस
इतना ही नहीं यह कंपनी छंटनी की मार से कराह रहे अमेरिका में भी 200 लोगों को नौकरी देगी. कंपनी में फिलहाल 60 हजार के करीब इंप्लाइज हैं. एचसीएल अपनी फ्यूचर प्लानिंग्स को लेकर उम्मीदों से लबरेज हैं. इन कंपनी ने हाल ही में अमेरिका व यूरोप में न सिर्फ बड़े कनज्यूमर बनाए हैं, बल्कि कई बिजनेस ओवरटेक भी किए हैं. पिछले साल ही कंपनी ने ब्रिटेन की आईटी फर्म एक्सान ग्रुप को ओवरटेक किया था. कंपनी ने यह डील करीब 44 करोड़ पौंड में की थी.

Students in Kanpur, teacher in Delhi

i next reporter
KANPUR (3 Oct): सेंट्रल गवर्नमेंट ने सिटी के स्टूडेंट्स को दीपावली का तोहफा दिया है. जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और यूपीटीयू से एफीलिएटिड शहर के कई इंजीनियरिंग कॉलेजों सहित यूनिवर्सिटी के 46 डिग्री कॉलेजों में बीएसएनएल दस-दस ब्राडबैंड लाइनें बिछा रहा है. इसके माध्यम से जहां ये संस्थान व कॉलेज नेशनल नॉलेज नेटवर्क से जुड़ जाएंगे, वहीं 24 घंटे इंटरनेट व वर्चुअल क्लासेज भी होंगी. शहर के छात्र आईआईटी व एम्स जैसे संस्थानों के प्रोफेसरों के लेक्चर्स देख-सुन सकेंगे. शनिवार को यूनिवर्सिटी में हुई मीटिंग में बीएसएनएल अधिकारियों ने बताया कि कई प्राइवेट कॉलेजों व संस्थानों में तो सर्वे के बाद लाइनें बिछाने का काम भी शुरू हो चुका है. इस काम के लिए हर साल खर्च की 75 परसेंट राशि सेंट्रल गवर्नमेंट चुकाएगी. सेल्फ फाइनेंस कॉलेज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने बताया कि सेंट्रल गवर्नमेंट की इस स्कीम के तहत सीएसजेएम कानपुर यूनिवर्सिटी से जुड़े मंडल भर के 40 डिग्री कॉलेज चुने गए हैं. इनमें बहुत से प्राइवेट कॉलेज भी हैं. उद्देश्य सिटी के कॉलेजों और प्रोफेशनल संस्थानों को नेशनल नॉलेज नेटवर्क से जोड़ने का है. हर कॉलेज को 10-10 आई पी एड्रेस (दस कंप्यूटरों पर ब्रॉड बैंड कनेक्टिविटी) की रेंज दी जा रही है. बैठक में शामिल बीएसएनएल के एजीएम आरपी चक ने बताया कि अधिकांश प्राइवेट कॉलेजों में तो सर्वे के दो राउडं भी पूरे हो चुके हैं. अब लाइनें बिछाने काम शुरू है. वहीं खास बात ये है कि इसके इंस्टॉलेशन में आने वाले 50 हजार रुपए खर्च में से कुल 75 परसेंट यूनिवर्सिटीज के माध्यम से केंद्र सरकार ही कॉलेजों को दे रही हैं.

Postman lentils, rice brought to rate

डाकिया दाल, चावल के रेट लाया
Deepali SinghKANPUR (3 Oct): महंगाई की मार लोगों की कमर तोड़ रही है. दाल, चीनी, आलू आदि के रेट सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रहे हैं. देश में कहां कितनी महंगाई और कहां रेट कम हैं, इसका पता लगाने के लिए गवर्नमेंट ने नया तरीका अपनाया है. यह तरीका ऐसा है जिससे महंगाई की सटीक जानकारी लग सकेगी. उसी से महंगाई पर लगाम कसने का रास्ता भी खोजा जा सकेगा. गवर्नमेंट का यह रास्ता पोस्ट ऑफिस से होकर गुजरता है. उसने उसे ही दाल, चावल आदि खाद्य पदार्थो के रेट पता करने की जिम्मेदारी सौंपी है.डाकिया अब साहूकार भी हो गया है. वह घर-घर लेटर पहुंचाने के साथ बाजार से राशन के रेट भी पता कर रहे हैं.191 वस्तुएंयह काम आम आदमी की सुविधा और प्राइस इंडेक्स मेंटेन करने के लिए शुरू किया है. इसके लिए सेंट्रल स्टैटिसटिक्स डिपार्टमेंट ने पोस्टल डिपार्टमेंट के साथ टाईअप किया है. इसके तहत पोस्टमैनों को आटा, चावल, दाल, नमक और चीनी जैसी 191 चीजों के रेट हर महीने पता करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पोस्टल डिपार्टमेंट इन रेट लिस्ट को सेंट्रल स्टैटिसटिक्स डिपार्टमेंट को फारवर्ड करेगा. इसके जरिए प्राइस इंडेक्स ठीक किया जाएगा. साथ ही सिटी और रूरल एरिया के रेट को वैरीफाई भी किया जा सकेगा. सिटी के 20 और यूपी के 149 पोस्ट ऑफिसेज को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है.