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Wednesday, September 30, 2009

बिल क्लिंटन भी डर गए थे


NEW YORK (29 Sept, Agency):1999 में इंडिया और पाकिस्तान के बीच करगिल वार के दौरान न्यूक्लियर वेपंस के इस्तेमाल की धमकी से तत्कालीन प्रेसीडेंट बिल क्लिंटन भी डर गए थे. इसी डर की वजह से वह यहां का दौरा करके दोनों देशों के बीच सुलह कराने की कोशिश भी करना चाहते थे. यह खुलासा किया है क्लिंटन के प्रेसीडेंटशिप के दौरान लिखी गई एक बुक ने. पुलित्जर अवार्डी राइटर और हिस्टॉरियन टेलर ब्रांच ने इस बुक में दावा किया है कि कारगिल वार के दौरान क्लिंटन इस कदर बेचैन हो उठे थे कि वह दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर वार रोकने के लिए किसी भी समय फ्लाइट पकड़ने को बेताब थे. उन्हें डर था कि पाकिस्तान वार के डर से इंडिया पर न्यूक्लियर अटैक कर सकता है. ब्रांच ने अपनी बुक में दावा किया कि करगिल वार के चरम पर पहुंचने पर बिल क्लिंटन ने उन्हें बताया कि पाकिस्तान ने अपनी पॉलिसी के तहत इंडिया के साथ टेंशन बढ़ाने और इंटरनेशनल कम्युनिटी का ध्यान अटैक्ट करने के लिए अपने सोल्जर्स को चोरी छिपे लाइन ऑफ कंट्रोल को पार करा दिया था. 700 पन्नों की इस बुक द क्लिंटन टेप्स: रेसलिंग हिस्ट्री विद द प्रेजीडेंट में ब्रांच लिखते हैं कि क्लिंटन ने मुझे कश्मीर के बारे में यह कहकर चौंका दिया था कि हालात के बारे में जो कहा जा रहा है, असल में ये उससे कहीं अधिक गंभीर मामला हैं. ब्रांच का कहना है कि क्लिंटन ने उनसे कहा कि सिर्फ चार महीने पहले ही दोनों कंट्रीज के बीच शांति यात्रा शुरू हुई है. उन्होंने पीसफुली बात करने के लिए बस और ट्रेन सर्विसेज शुरू की थीं. दोनों देशों ने कश्मीर पर उस विवाद को खत्म करने के लिए ज्वाइंटली एफर्ट किए जिसकी वजह से उनके बीच बंटवारे के बाद तीन वार हुए. ब्रांच लिखते हैं कि इस नए संकट ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया, जिससे यह पता चला कि पॉलिटिक्स कितनी तेजी से बदल सकती है.

रोंगटे खड़े कर देने वाला इम्तिहान


Dhaka (29 Sept, Agency):बांग्लादेश के प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के आतंकियों को भी मिशन पर जाने से पहले कड़ा इम्तिहान देना होता है.जेएमबी सुसाइड मिशन पर उन्हें ही भेजा जाता है जो जान देने के लिए तैयार हों और जिन्होंने दीन-दुनिया से खुद को दूर रखा हो. जेएमबी ने 2005 में देशभर में कई बम ब्लास्ट किए थे. रोंगटे खड़े कर देने वाला इम्तिहान न्यूजपेपर द डेली स्टार की एक रिपोर्ट केमुताबिक जेएमबी का मेंबर बनने के लिए टेररिस्ट्स को रोंगटे खड़े कर देने वाला इम्तिहान पास करना होता है. ट्रेनिंग ले रहे टेररिस्ट में खुद को बम से उड़ा देने का दुस्साहस होना चाहिए. जेएमबी अपने संगठन में नए लोगों कीभर्ती तब तक नहीं करता जब तक कि उसे यह यकीन न हो जाए कि कुछ समय बाद वापस लौटने पर वह संगठनको नुकसान नहीं पहुंचाएगा. तीन दिन की special training सुसाइड मिशन पर भेजे जाने से पहले जेएमबी अपनेसदस्यों को जिहाद की खातिर जान देने के लिए प्रेरित करता है. अफसरों की राय में यह छद्म परीक्षा आतंकियों केतीन दिन की स्पेशल ट्रेनिंग का हिस्सा होती है. उस समय टेरस्टि्स को भी पता नहीं होता कि यह महज एक टेस्टहै या वास्तविक मिशन. इस ट्रेनिंग के दौरान इन लोगों की बॉडी में बाम्ब बांध दिए जाते हैं. इसके बाद उनसे यहकहा जाता कि वे मैदान के चक्कर लगाएं साथ ही यह वार्निग भी दी जाती है कि इस 30 मिनट के वॉक के दौरानकिसी भी समय उनका बाम्ब ब्लास्ट कर सकता है. ट्रेनिंग के दौरान टेररिस्ट्स को पूरी तरह से दुनिया से दूर रहनाहोता है. उन्हें सिखाया जाता है कि जिहाद के लिए जिंदगी और परिवार दोयम दर्जे की चीजें हैं. Rickshaw चलानाजरूरी एक खतरनाक टेररिस्ट बनने के लिए सिर्फ बंधूक या बम चलाना ही नहीं बल्कि रिक्शा चलाना भी जरूरीहोता है. संगठन में भर्ती होने वाले नए लोगों को कुछ दिन रिक्शा चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है. दरअसल, ट्रेनर्स कामानना है कि रिक्शा चलाकर टेररिस्ट आम लोगों के टच में रहता है. और सही मौका तलाशकर वारदात को अंजामदे सकता है.

Wednesday, September 23, 2009

web designer and Blogger Tips: Digg adds nofollow to some links

web designer and Blogger Tips: Digg adds nofollow to some लिंक्स

You Can Take Knowledge Here About SEO

Digg adds nofollow to some links

rel="nofollow" tag added by digg.

Why digg add rel="nofollow" tag with some external link. Actually digg this done after consultation with SEO/SEM and link spam field’s leading experts. But don't worry digg add rel=”nofollow” tag to only external link that are suspicious.

This includes all external links from comments, user profiles and story pages below a certain threshold of popularity. Abuse( for example link spamming ) was a big problem for Digg team ,Actually many digg user add hyper link to their site in comment,user profiles and story pages to get advantage of link back or to get popularity.But at some time its only link spamming.

Sunday, September 20, 2009

Don’t worry about "china"

NEW DELHI (19 Sept, Agency): हाल में चीन की ओर से भारतीय सीमा में घुसपैठ की खबरों के बीच भारत ने कहा है कि चीन से लगती सीमा पर हालात ठीक हैं. इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं है. मीडिया से इस मामले को तूल नहीं देने के लिए कहा गया है. शनिवार को हर स्तर पर भारत सरकार की ओर से यही संदेश दिया गया.
No border threat

आर्मी चीफ, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर और फॉरेन सेक्रेटरी ने भी भारत-चीन सीमा के हालात को खतरनाक मानने से इंकार कर दिया. साथ ही, कहा कि मीडिया ने अगर मामले को तूल दिया तो स्थिति बिगड़ सकती है.
Stable situation

फॉरेन सेक्रेटरी निरुपमा राव ने मीडिया में हाल में आई चीनी घुसपैठ की खबरों को हाइप करार दिया. उन्होंने कहा कि आम धारणा के विपरीत भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर काफी शांति और स्थिरता है. राव ने इस बात से भी इंकार किया कि पिट्सबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान मनमोहन सिंह का चीनी पीएम से मिलने का प्रोग्राम है.
Media
संयम बरते
नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर एम.के. नारायणन ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में आगाह किया कि मीडिया में अगर इस मुद्दे को ज्यादा उछाला गया तो कोई भी पक्ष धैर्य खो सकता है. नतीजतन कोई अवांछित घटना या हादसा भी हो सकता है, जो पड़ोसी देश के साथ समस्या पैदा कर सकता है. उन्होंने कहा कि चीन से घुसपैठ में कोई वृद्धि नहीं हुई है और न ही सीमा पर खतरनाक हालात हैं.
तूल देने की जरूरत नहीं
उधर, चेन्नई में आर्मी चीफ जनरल दीपक कपूर भी इसी सुर में बोले. उन्होंने कहा कि चिंता वाली कोई बात ही नहीं है. एक दिन पहले पीएम मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि पिछले साल की तुलना में इस साल चीन से घुसपैठ की घटनाओं में कोई इजाफा नहीं हुआ है.
उचित जवाब दे रही है Army
उन्होंने भी मामले को तूल नहीं देने की जरूरत बताई थी. कपूर ने यह भी कहा कि सेना पाकिस्तान द्वारा सीज फायर के उल्लंघन का माकूल जवाब दे रही है. जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिशों के बारे में उन्होंने कहा कि सर्दियों से पहले ऐसे प्रयास किए जाएंगे. ऐसे खतरों से निपटने के लिए सेना तैनात की गई है.