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Friday, May 22, 2009

हुनर है, तो जॉब है सेफ

NEW YORK (12 May, Agency): मंदी के दौर में डेली मार्केट का सिनारियो चेंज हो रहा है. इसी बदलते मार्केट में अपनी इकोनॉमी को दुरूस्त रखने के लिए कंपनियां तेजी से छंटनी कर रही है और लोगों को जॉबलेस बना रही है. मौजूदा मार्केट तो यही कह रहा है. लेकिन इतना होने पर भी कुछ कंपनियां छंटनी के बदले अपनी कंपनी में हुनरमंदों को ही रखने और नई भर्ती करने में इंट्रस्ट ले रही है. ऐसा यहां एक ऑनलाइन रिपोर्ट में कहा गया है.
वाल स्ट्रीट जर्नल की ऑनलाइन रिपोर्ट में कहा गया है कि छंटनी बढ़ने से कंपनियां अन्य कारोबारी यूनिट्स या अन्य जगहों पर हुनरमंद लोगों को ही रख रही हैं.
इस नए तरह के कॉन्सेप्ट में कार्पोरेट सेक्टर की दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम और याहू इंक ने नौकरियों में कटौती शुरु करने के साथ-साथ अपनी दूसरी यूनिट्स में इंप्लाईज की भर्ती भी शुरु कर दी है. कंपनियों में माइक्रोसाफ्ट कार्पोरेशन, इंटरनेशनल बिजनेस मशींस कार्पोरेशन, एटी एंड टी, याहू इंक और टाइम वार्नर समेत अन्य कंपनियां इंप्लाईज की कटौती करने के साथ साथ इनकी भर्ती भी कर रही हैं.एविएशन सेक्टर की अग्रणी कंपनी बोइंग ने वर्ष 2009 के आरंभिक चार महीनों में 3,000 से अधिक इंप्लाईज की छंटनी की है लेकिन इसी बीच उसने डिफेंस यूनिट में 106 इंप्लाईज की भर्ती भी की है.
अच्छा ऑफर
रिपोर्ट में खुलासा किया गया, यह इस बात को भी रेखांकित करता है कि मंदी किस तरह इंप्लाईज को बदल रही है. यानि मंदी उन लोगों के लिए भी अच्छा ऑफर लेकर आई है जिनके पास टैलेंट तो है पर चांस नहीं मिल पा रहा उसे दिखाने का. बड़ी बड़ी कंपनियां ऐसे ही लोगों को एक प्लेटफार्म देने की जुगत में है. इससे कंपनी और टैलेंट रखने वाले व्यक्ति दोनों का फायदा है.

टाइटेनिक स्टार्स ने की हेल्प

1912 में डूबे टाइटेनिक शिप की अंतिम जीवित मुसाफिर मुश्किलों में है. जिंदगी के आखिरी दौर में तमाम दुश्वारियों को झेलती 98 वर्षीया मिलविना डीन अपने नर्सिग होम की फीस भरने के लिए परेशान है. उनकी इस परेशानी को महसूस किया टाइटेनिक फिल्म के एक्टर लियोनार्डो डिकैप्रियो और एक्ट्रेस केट विंसलेट ने.
इन दोनों सुपरस्टार्स ने फिल्म डायरेक्टर जेम्स कैमरून के साथ मिलकर इस बुजुर्ग लेडी को 30,000 डॉलर दिए हैं. दरअसल, जब यह जहाज हादसा हुआ था, उस वक्त मिलवीना सिर्फ नौ हफ्ते की थी.
डीन को उसकी मां और भाई के साथ डूबते जहाज से सुरक्षित निकाल लिया गया था लेकिन इस हादसे में उसने अपने पिता को खो दिया. डीन साउथम्पटन की रहने वाली हैं. प्राइवेट नर्सिग होम की फीस भरने के लिए उन्हें इस ऐतिहासिक शिप से जुड़ी कुछ चीजों की नीलामी भी करनी पड़ी थी.

करोड़पति होना जीत की गारंटी नहीं है

संपत्ति के क्रम में मिले वोट 1. मलूक नागर 85.31 करोड़ 1,84,991 2. शाहिद अखलाक 4.31 करोड़ 34,077 3. अजय अग्रवाल 3.34 करोड़ 1333 4. कृष्ण कुमार गर्ग 2.27 करोड़ 2704 5. शाहिद मंजूर 1.88 करोड़ 1,83,527 6. अतुल त्यागी 1.69 करोड़ 369 7. राजेंद्र शर्मा 1.11 करोड़ 61,003 8. राजकुमार त्यागी 72.10 लाख 1206 9. तेजवीर सिंह 0.37 लाख 444 10. श्रीपाल सिंह 45.32 लाख 1044 11. संतोष अहलूवालिया 39.82 लाख 399 12. राजेंद्र अग्रवाल 27.60 लाख 2,32,137 13. डॉ. सुरेंद्र कुमार खत्री 27.24 लाख 949 14. अनिल कुमार सुभाष 16 लाख 1227 15. जनेश्वर प्रसाद शर्मा 12.46 लाख 1887 ÂýˆØæàæè ÅUôÅUÜ °âðÅU ßôÅU 16. राजेश कुमार 10.32 लाख 765 17. जरार 8.37 लाख 968 18. अरूण जैन 8.05 लाख 2505 19. लोहरी 5.58 लाख 494 20. मुगीस ए गिलानी 4.43 लाख 3755 21. दारा सिंह 3.60 लाख 5974 Rakesh Rai
MEERUT (16 May):
चुनाव संगठन और जनभावनाओं का खेल है. पैसा ही सब कुछ नहीं है. यहां के चुनाव नतीजों ने कुछ यही साबित किया है. विजेता राजेंद्र अग्रवाल संपत्ति के मामले में 12वें नंबर पर हैं तो सर्वाधिक संपत्ति वाले मलूक नागर को दूसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा है.
सबसे गरीब
नामांकन में दिए गए संपत्ति ब्यौरे के अनुसार कुल 29 प्रत्याशियों में सबसे गरीब भारत भूषण हैं लेकिन वोट पाने के मामले में ये सोलहवें नंबर पर रहे हैं. इन्हें कुल 1104 वोट पड़े हैं, जबकि उनकी कुल जमा पूंजी 5389 रुपए है.
सबसे धनवान
सबसे धनवान प्रत्याशी के तौैर पर बसपा के मलूक नागर मैदान में थे. उनकी संपत्ति 85 करोड़ से अधिक है जबकि 1,84,991 वोट पाकर उन्हें दूसरा नंबर पर संतोष करना पड़ा.
विजेता 12वें नंबर पर
विजेता राजेंद्र अग्रवाल संपत्ति के मामले में बारहवें नंबर पर हैं. उनकी कुल संपत्ति 27 लाख रुपए की है, लेकिन वोट के मामले में वे अव्वल नंबर पर रहे.
22. सुधीर नंदन सरन 2.08 लाख 466 23. राजेंद्र सिंह यादव एक लाख 959 24. कृष्णपाल 78,896 769 25. संजीव कुमार 76,137 364 26. डॉ. हरि सिंह आजाद 55,600 578 27. खालिद अहमद 20 हजार 1451 28. सुनील कुमार 15 हजार 262 29. भारत भूषण 5,389 1104

Accident Day

i-next reporter
MEERUT (17 May):
यह संडे एक्सीडेंट डे साबित हुआ. तीन जगह हादसे हुए. इनमें मां-बेटी की मौत हो गई और तीन लोग घायल हो गए. रुड़की रोड पर दिल दहला देने वाला एक्सीडेंट हुआ. स्कूटी पर जा रही मां-बेटी को पीछे से आ रहे ट्रक ने कुचल दिया. दोनों की मौत हो गई. रुड़की रोड पर ही दूसरा हादसा दौराला के पास हुआ. यहां पर एक मारुति वैन में आग लग गई. आग की चपेट में आने से दो लोग झुलस गए. वैन पूरी तरह जल गई. तीसरा हादसा भावनपुर क्षेत्र में हुआ. यहां ट्रक की चपेट में आने से एक व्यक्ति का हाथ कट गया.
मां-बेटी
शाम साढ़े पांच बजे गोल्डन एवेन्यू कॉलोनी निवासी सुषमा अग्रवाल अपनी बेटी छवि अग्रवाल के साथ स्कूटी से शॉपिंग के लिए आबू लेन जा रही थीं. लेखानगर पुलिस चौकी के पास स्कूटी जब कच्चे रास्ते से सड़क से रोड पर चढ़ी तो फिसल गई. मां-बेटी सड़क पर गिर गई. पीछे से आ रहा ट्रक दोनों को कुचलते हुए फरार हो गया. चश्मदीदों के मुताबिक ट्रक आर्मी का था. सुषमा और छवि को तुलसी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया गया. छवि के मोबाइल से परिजनों को सूचना दी गई. मोबाइल में लास्ट डायल नंबर छवि के भाई अर्पित का था. उसी को फोन मिलाया गया.
आईआईएम में सलेक्शन
छवि पढ़ाई में ब्रिलियंट थी. उसने आईआईएमटी कॉलेज से बीसीए किया था. हाल ही में उसका सलेक्शन आईआईएम, पुणे में हो गया था. 10 जून को एडमिशन के सिलसिले में छवि को पुणे जाना था. छवि के पिता अनुपम अग्रवाल आबूलेन पर शॉप चलाते हैं.
वैन में आग
रुड़की रोड पर दौराला चौपले के पास शाम को एक मारुति वैन में अचानक आग लग गई. वैन में सवार दो लोग तो बाहर निकल गए, लेकिन बाकी दो बुरी तरह झुलस गए. उन्हें मोदीपुरम के एक हॉस्पिटल में ले जाया गया. जहांगीरपुरी, दिल्ली निवासी राम निवास अपने बेटे राकेश और उसके दो साथी अजय व हरि के साथ उत्तरकाशी जा रहे थे. ये लोग जब दौराला चौराहे के पास पहुंचे तो अचानक वैन में आग लग गई.
2.90 लाख जले
राम निवास ने बताया कि वैन में बैग के अंदर रखे 2.90 लाख रुपये भी जल गए. वे उत्तरकाशी में धर्मशाला बनवा रहे हैं. वहां सामान और मजदूरों के पेमेंट के लिए वह कैश ले जा रहे थे. मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग बुझाई, हालांकि तब तक वैन पूरी तरह जल चुकी थी.
हाथ कटा
यह हादसा भावनपुर थाना क्षेत्र में हुआ. नंगला शेखू गांव निवासी युसूफ मजदूरी करता है. वह देर शाम बस से गांव लौट रहा था. अब्दुल्लापुर के पास बस में सवार युसूफ का सीधा हाथ खिड़की से बाहर था. इसी दौरान उसका हाथ पीछे से आ रहे ट्रक की चपेट में आ गया. सूचना मिलने पर भावनपुर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को मेडिकल लाया गया. ट्रक समेत चालक फरार हो गया था.
होंडा सिटी घिसटती रही
मेरठ-हापुड़ मार्ग पर शनिवार रात एक हादसा हुआ. धीरखेड़ा पुलिस चौकी के पास खड़े ट्रक में होंडा सिटी कार घुस गई. कार ट्रक में फंसी हालत में करीब 200 मीटर तक घिसटती चली गई. कुछ दूरी पर जाकर चालक ट्रक छोड़कर फरार हो गया. पुलिस ने कार में सवार चार घायलों को अस्पताल पहुंचाया. हादसा प्रहलाद नगर निवासी तिलक नारंग की फैमिली के साथ हुआ. हादसे के वक्त वे अपनी पत्नी वंदना, बेटा शिव और बेटी शिवानी समेत हापुड़ से मेरठ लौट रहे थे.

Accident Day

i-next reporter
MEERUT (17 May):
यह संडे एक्सीडेंट डे साबितहुआ. तीन जगह हादसे हुए. इनमेंमां-बेटी की मौत हो गई और तीन लोगघायल हो गए. रुड़की रोड पर दिलदहला देने वाला एक्सीडेंट हुआ. स्कूटीपर जा रही मां-बेटी को पीछे से रहेट्रक ने कुचल दिया. दोनों की मौत होगई. रुड़की रोड पर ही दूसरा हादसादौराला के पास हुआ. यहां पर एकमारुति वैन में आग लग गई. आग कीचपेट में आने से दो लोग झुलस गए. वैन पूरी तरह जल गई. तीसरा हादसाभावनपुर क्षेत्र में हुआ. यहां ट्रक कीचपेट में आने से एक व्यक्ति का हाथकट गया.
मां-बेटी
शाम साढ़े पांच बजे गोल्डन एवेन्यूकॉलोनी निवासी सुषमा अग्रवालअपनी बेटी छवि अग्रवाल के साथस्कूटी से शॉपिंग के लिए आबू लेन जारही थीं. लेखानगर पुलिस चौकी केपास स्कूटी जब कच्चे रास्ते से सड़कसे रोड पर चढ़ी तो फिसल गई. मां-बेटी सड़क पर गिर गई. पीछे से रहा ट्रक दोनों को कुचलते हुए फरार होगया. चश्मदीदों के मुताबिक ट्रकआर्मी का था. सुषमा और छवि कोतुलसी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहांदोनों को मृत घोषित कर दिया गया. छवि के मोबाइल से परिजनों कोसूचना दी गई. मोबाइल में लास्टडायल नंबर छवि के भाई अर्पित काथा. उसी को फोन मिलाया गया.
आईआईएम में सलेक्शन
छवि पढ़ाई में ब्रिलियंट थी. उसनेआईआईएमटी कॉलेज से बीसीए कियाथा. हाल ही में उसका सलेक्शनआईआईएम, पुणे में हो गया था. 10 जून को एडमिशन के सिलसिले मेंछवि को पुणे जाना था. छवि के पिताअनुपम अग्रवाल आबूलेन पर शॉपचलाते हैं.
वैन में आग
रुड़की रोड पर दौराला चौपले के पासशाम को एक मारुति वैन में अचानकआग लग गई. वैन में सवार दो लोगतो बाहर निकल गए, लेकिन बाकी दोबुरी तरह झुलस गए. उन्हें मोदीपुरमके एक हॉस्पिटल में ले जाया गया. जहांगीरपुरी, दिल्ली निवासी रामनिवास अपने बेटे राकेश और उसके दोसाथी अजय हरि के साथ उत्तरकाशीजा रहे थे. ये लोग जब दौराला चौराहेके पास पहुंचे तो अचानक वैन में आगलग गई.
2.90 लाख जले
राम निवास ने बताया कि वैन में बैगके अंदर रखे 2.90 लाख रुपये भी जलगए. वे उत्तरकाशी में धर्मशाला बनवारहे हैं. वहां सामान और मजदूरों केपेमेंट के लिए वह कैश ले जा रहे थे. मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आगबुझाई, हालांकि तब तक वैन पूरी तरहजल चुकी थी.
हाथ कटा
यह हादसा भावनपुर थाना क्षेत्र मेंहुआ. नंगला शेखू गांव निवासी युसूफमजदूरी करता है. वह देर शाम बस सेगांव लौट रहा था. अब्दुल्लापुर के पासबस में सवार युसूफ का सीधा हाथखिड़की से बाहर था. इसी दौरानउसका हाथ पीछे से रहे ट्रक कीचपेट में गया. सूचना मिलने परभावनपुर पुलिस मौके पर पहुंची औरघायल को मेडिकल लाया गया. ट्रकसमेत चालक फरार हो गया था.
होंडा सिटी घिसटती रही
मेरठ-हापुड़ मार्ग पर शनिवार रात एकहादसा हुआ. धीरखेड़ा पुलिस चौकी केपास खड़े ट्रक में होंडा सिटी कार घुसगई. कार ट्रक में फंसी हालत में करीबमीटर तक घिसटती चली गई. कुछ दूरी पर जाकर चालक ट्रकछोड़कर फरार हो गया. पुलिस ने कारमें सवार चार घायलों को अस्पतालपहुंचाया. हादसा प्रहलाद नगर निवासीतिलक नारंग की फैमिली के साथहुआ. हादसे के वक्त वे अपनी पत्नीवंदना, बेटा शिव और बेटी शिवानीसमेत हापुड़ से मेरठ लौट रहे थे.

जुड़वां मगर सौतेले!

i next desk:
वे एक ही मां की कोख में नौ महीने साथ-साथ पलते रहे. दोनों में सिर्फ सात मिनट का अंतर. मगर जुड़वां होने के बावजूद वे सौतेले हैं. चौंक गए न. ये किसी बॉलीवुड की फिल्म की स्क्रिप्ट या किसी हॉलीवुड फिल्म का जी सिक्वेंस नहीं है. यह सौ फीसदी सच है. हकीकत की हद में डूबी एक ऐसी सच्चाई जो सिर्फ चौंकाती ही नहीं, सोचने पर मजबूर भी करती है. ट्विन्स की नई परिभाषा गढ़ती इस कहानी का हर पात्र उतना ही सत्य और वास्तविक है जितना कि हम और आप. हसबैंड-वाइफ और वो के चक्कर में पैदा हुए इन ट्विन्स की दास्तान भी अनोखी है.
ये है मामला
दरअसल अमेरिका के टैक्सास प्रांत की रहने वाली मिया ने ट्विन्स को जन्म दिया. मगर ट्विन्स होने के बावजूद दोनों बच्चों में काफी फर्क था. लिहाजा मिया ने उनका पैटरनिटी टेस्ट कराने की ठानी. हालांकि इससे उसकी मैरीड लाइफ को खतरा भी था पर वह हर हाल में असलियत जानना चाहती थी. उसके मुताबिक जब डॉक्टरों ने उसे बताया कि वे दोनों दो पिता की संतान हैं तो उसे भरोसा नहीं हुआ. उसके शब्दों में, यह सोचना भी हैरानीजनक था कि मेरे पेट में पल रहे दो बच्चे जिनका जन्म सात मिनट के अंतराल पर हुआ है उनके पिता अलग-अलग हैं.
ऐसा भी हो सकता है
इस मामले में अमेरिकी डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसा हो सकता है. उन्होंने कहा कि लाखों मामलों में कभी-कभार ही ऐसा होता है कि ट्विन्स के पिता अलग-अलग हों. उन्होंने बताया कि बेहद कम समय अंतराल में दो डिफरेंट पुरुषों से सेक्स रिलेशन बनाने से ऐसा हुआ है.
इन ट्विन्स का नाम जस्टिन और जॉर्डन है. इसमें जस्टिन दूसरे पिता की संतान है. दुखी मिया ने माना कि प्रेगनेंट होने से पहले उसका अफेयर एक अन्य पुरुष से चल रहा था.
फिर प्रेगनेंट
मिया के हसबैंड जेम्स को यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि उसकी वाइफ का किसी और से अफेयर था. पर बच्चों से वह खुश है. अब 11 महीने के हो चुके दोनों बच्चों को वह बराबर प्यार देता है. वैसे जस्टिन के पिता की पहचान का अभी खुलासा नहीं किया गया है. एक बार फिर प्रेगनेंट मिया का कहना है कि बड़े हो जाने पर वह बच्चों को यह सच्चाई जरूर बताएगी.

पत्नी जैसा कहे वैसा करो

NEW DELHI (19 May, Agency): वैवाहिक जीवन में शांति चाहिए तो वाइफ जैसा कहे, वैसा ही करो. इस कथन से यूं तो लगभग सभी विवाहित पुरुष सहमत होंगे, लेकिन फिर भी कुछ न मानने वाले भी होंगे. मगर अब मान जाइए क्योंकि ये एडवाइस किसी वैवाहिक संस्था ने नहीं बल्कि देश की शीर्ष कोर्ट ने दी है. सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अगर सुखी रहना है तो वाइफ की मानिए.
जस्टिस मार्कडेय काटजू और दीपक वर्मा की अवकाश बेंच ने कहा कि बीवी जो बोलती है उसे सुनो नहीं तो आपके लिए प्रॉब्लम खड़ी हो जाएगी. क्योंकि यदि आपने उसकी बात नहीं सुनी तो आपको नतीजे भुगतने पड़ेंगे. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हसबैंड को वाइफ का सुझाव स्वीकार करना ही होता है भले ही उसका कोई मतलब हो या नहीं.
.तो उधर सिर घुमा लो
बेंच ने आगे कहा कि यदि आपकी वाइफ कहती है सिर उधर घुमाओ तो उधर सिर घुमा लो. यदि वह सिर इधर घुमाने कहती है तो उसका अनुसरण करो. अन्यथा आपके लिए मुसीबत हो सकती है. हम सब इसके भुक्तभोगी हैं. ये दिलचस्प सुझाव कोर्ट ने एयरफोर्स अफसर दीपक कुमार के वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया.
दरअसल दीपक कुमार की मैरिज 17 साल पहले मनीषा से हुई थी, लेकिन मैरिज के कुछ ही दिनों बाद दोनों के मतभेद सामने आ गए. दीपक ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में डिवोर्स के लिए अर्जी दायर की, लेकिन मनीषा के विरोध पर ये रिजेक्ट हो गई. हालांकि दीपक की अपील पर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट की एकल जज पीठ ने न्यायिक अलगाव के निर्देश दे दिए. मनीषा ने इसके खिलाफ अपील की तो हाई कोर्ट ने न्यायिक अलगाव को डिवोर्स में तब्दील करने भी इजाजत दे दी. साथ ही दीपक को 10 लाख का मुआवजा देने के भी निर्देश दिए.
थोड़ा और इंतजार कीजिए
मनीषा ने इसके बाद शीर्ष कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठा दिया. कोर्ट में दीपक कुमार ने तर्क दिया था कि विवाह खत्म हो चुका है. मनीषा उनके और उनके फेमिली वालों के खिलाफ जाने कितने आपराधिक मामले दर्ज करवा चुकी है लेकिन फिर भी डिवोर्स के लिए राजी नहीं है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को जुलाई के अंतिम सप्ताह तक के लिए टाल दिया. कोर्ट ने कहा कि जब आपने 17 साल तक इंतजार किया है तो थोड़ा और इंतजार कीजिए.
GUWAHATI: असम के गड़बड़ी वाले कार्बी आंगलोंग और एन सी हिल्स डिस्ट्रिक्ट्स में मंगलवार को हुई डिफरेंट घटनाओं में एनडीएफबी के छह टेररिस्ट्स समेत कुल दस लोग मारे गए. यहां एक मालगाड़ी पर अटैक भी किया गया और कुछेक घरों को जला दिया गया. यहां सोमवार को टेररिस्ट्स ने एक निजी कंपनी के तीन कर्मचारियों का किडनैप कर लिया था. कश्मीर में पांच की डेथ
SRINAGAR:
कश्मीर घाटी में मंगलवार अलग-अलग एक्सीडेंट्स पांच लोगों की डेथ हो गई. एक पुलिस स्पोक्समैन ने बताया कि सालेर निवासी 13 वर्षीय जबीना की डेडबॉडी दक्षिण कश्मीर में लिद्दर नदी से बरामद किया गया. सबीना नहाते समय नदी में डूब गई थी. पुलिस को दो अन्य डेडबॉडीज मिलीं. इनमें से एक डेडबॉडी की पहचान 50 वर्षीय मोहम्मद मुजफ्फर लोन के रूप में की गई. एलीना केस में पूछताछ PANJIM: गोवा की पुलिस ने पुणे में रह रहे दो स्टूडेंट्स से 19 वर्षीय रूसी युवती एलीना सुखनोवा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु के सिलसिले में पूछताछ की है. मृत्यु से कुछ दिन पहले एलीना की गोवा में छुट्टियां मनाने आए इन छात्रों से मुलाकात हुई थी. गौरतलब है कि एलीना की डेडबॉडी गत आठ मई को तिविम स्टेशन के पास रेल की पटरी मिली थी. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह नैचुरल डेथ थी या मर्डर.

प्लूटोनियम के सहारे न्यूक्लियर पावर बढ़ा रहा पाकिस्तान

WASHINGTON (20 May, Agency): पाकिस्तान का निजाम और हुकूमत तो बेशक बदल गई पर उसका चरित्र और चेहरा आज भी बहुत कुछ वैसा ही है. हालात तमाम पेचीदगियों से भरे पड़े हैं पर फितरत दिखाने से वह बाज नहीं आ रहा है. उसकी हरकतें इस बात की तस्दीक करती हैं और सुबूत इस पर मुहर लगाते हैं.
सनसनीखेज खुलासा
दरअसल सेटेलाइट से ली गई ताजा तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान प्लूटोनियम उत्पादन की अपनी क्षमता बढ़ा रहा है. इसके पीछे उसका मकसद है अपने न्यूक्लियर वेपंस की संख्या में इजाफा करना. इस बीच, उसके मौजूदा न्यूक्लियर वेपंस की सेफ्टी को लेकर भी बहस जारी है.
नया खतरा
यह खुलासा किसी ऐसी-वैसी संस्था ने नहीं किया है. अमेरिका के इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्यूरिटी (आईएसआईएस) ने सेटेलाइट से ली गई ये तस्वीरें बुधवार को जारी कीं. इनसे पता चलता है कि पाकिस्तान ने रावलपिंडी और उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत के डेरा गाजी खान में नए न्यूक्लियर वेपंस बनाने के लिए ठिकाने विकसित किए हैं. यहां प्लूटोनियम से चलने वाले दो न्यूक्लियर प्लांट बनाने के लिए काम चल रहा है. इससे पहले अमेरिकी आर्मी चीफ एडमिरल माइक मुलेन भी कांग्रेस को गुप्त बैठक में बता चुके हैं कि पाकिस्तान अपने न्यूक्लियर वेपंस की संख्या कई गुना बढ़ाने की तैयारी में है. फिलहाल यह संख्या 60-100 के बीच बताई जाती है.
विचित्र हालात
पेंटागन का यह बयान आने से एक दिन पहले ही अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के महानिदेशक एल. पेनेटा ने कहा था कि अमेरिका को मालूम नहीं है कि पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियार कहां रखे हैं. पर रक्षा मंत्रालय के स्पोक्समैन जी.
मोरेल ने रेगुलर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि परमाणु हथियारों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तानी आर्मी द्वारा सुनिश्चित प्रोटोकाल संतोषजनक है. फिर भी अगर तालिबान पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो हम उनसे भी लड़ेंगे.इन सबके बीच अमेरिका की फॉरेन मिनिस्टर हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि पूरे पाकिस्तान में अब तालिबान के खिलाफ सोच बन गई है और सरकार भी इसे सबसे बड़ा खतरा समझ चुकी है. इतना ही नहीं उन्होंने पाकिस्तान को मेहरबानी की एक और खेप, दस करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता भी दे डाली. यह सहायता स्वात घाटी में टेररिस्ट के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियान से विस्थापित हुए करीब 20 लाख लोगों के लिए है.
हिलेरी फेवर में
हिलेरी ने पाक के पक्ष में बोलते हुए कहा कि पाकिस्तानी हुक्मरान मुश्किल लड़ाई लड़ रहे हैं और उनकी मुश्किल को किसी को कम करके नहीं आंकना चाहिए. पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी नीति में बदलाव की बात करते हुए हिलेरी ने कहा कि 30 सालों से हमारे संबंध असंगत रहे हैं. ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन इसे तर्कसंगत बनाने के लिए इसमें सकारात्मक बदलाव कर रहा है.

अमिताभ ..तब 25 पैसे भी नहीं थे

NEW DELHI (20 May, Agency): मेरी जेब में पांच पैसाभी नहीं सौदा करूंगा पांच लाख का.. वर्षो पुरानी फिल्म त्रिशूल में अमिताभका ये डायलाग आज भी पॉपुलर है. लेकिन शायद ही कोई जानता हो किअमिताभ की जेब में उनकी कालेजलाइफ के दिनों में 25 पैसे भी नहीं हुआकरते थे. ये बातें बिग बी ने हाल ही मेंअपने ब्लॉग में लिखी हैं.
उन्होंने अपने मुफलिसी के दिनों कोयाद करते हुए ये भी लिखा है कि वोढंग के कपड़े होने पर एक फंक्शनमें नहीं शामिल हो सके थे. आज उनकेपास बेशुमार दौलत है, नाम भी औररुतबा भी वे आज किसी परिचय केमोहताज नहीं हैं लेकिन कभी उन्हेंएक-एक पैसे के लिए मश्क्कत करनीपड़ती थी.
तब रो पड़े थे अमिताभ
बिग बी ने अपने ब्लाग में अपनीफेमिली के अभाव भरे दिनों का जिक्रकिया है. मेगास्टार ने लिखा है किउनके माता पिता सीमित इनकम मेंबहुत मुश्किल से अपने बच्चों कीजरूरतें पूरी कर पाते थे. स्कूल के दिनोंमें क्रिकेट क्लब की फीस दो रुपए थीऔर मां के पास उन्हें देने के लिए दोरुपए भी नहीं थे. इस बेबसी से निराशअमिताभ तब रो पड़े थे.
केवल दो जींस पैंट और शर्ट थीं
उन्होंने लिखा है कि उनके फ्रेंड्स केबर्थ डे की पार्टियों में उनके सभी साथीशोफर ड्रिवन कारों में आते थे, जबकिबिग बी साइकिल से जाते थे. उनकेघर पर अन्य फ्रेंड्स की तरह एसी नहींथा. उनके पास केवल दो जींस पैंट औरदो शर्ट थीं जिन्हें वह हर मौके परपहनते थे.
एक समय वो भी था जब यूनिवर्सिटीके बाहर खड़े ठेले वाले से 25 पैसे कीकोकाकोला की बोतल और मसालेवाला खीरा खरीदना भी बिग बी के बूतेके बाहर था. बिग बी के अनुसार, नईदिल्ली के विज्ञान भवन में हर्बट वोनकरांजन ने विएना फिलहार्मोनिकआर्केस्ट्रा आयोजित किया था लेकिनसमारोह में बिग बी इसलिए नहीं जासके थे क्योंकि उनके पास अच्छे कपड़ेनहीं थे और जो थे, उन्हें ड्राइक्लीनकराने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे.
उनसे कुछ नहीं लेते थे
मेगास्टार ने लिखा है कि जब वहअपने पैरों पर खड़े हुए और उनकीइकॉनमी प्रॉब्लम दूर हुई तो वह अपनेगार्जियंस की हर कमी दूर करनाचाहते थे. अमिताभ अपनी यह इच्छाअपने माता पिता के सामने जाहिर भीकरते थे, लेकिन उनके माता पिताउनसे कुछ नहीं लेते थे.
बताओ, दिन कैसा गुजरा
बिग बी ने लिखा है कि उनके मां बापसिर्फ इतना चाहते थे कि मैं उनके पासबैठूं और बताऊं कि आज दिन कैसागुजरा. उनकी चाह हमारे साथ बेहदनितांत निजी पल बिताने की होती थी.
उन्होंने अपने फैंस को गार्जियंस केसाथ समय बिताने की नसीहत देतेहुए ब्लाग में लिखा है- मैं आज अपनेगार्जियंस को खो चुका हूं, लेकिन आपमें से कितने लोग अपने गार्जियंस केलिए समय निकाल पाते हैं, उनकेसाथ बैठ कर बातें करते हैं. अपनेब्लॉग की नई पोस्ट में लिखा कि सुखतो फेमिली का कोई भी मेंबर दे सकताहै पर माता-पिता से मिलने वालाअपने आप में संपूर्ण होता है. कहते हैं माता-पिता का आर्शीवाद आपकोजन्नत का रास्ता दिखाता है. उन्होंनेलिखा - मुझे यहां तक पहुंचाने में कहीं कहीं मेरे माता-पिता का आर्शीवादही रहा होगा.

याहू, गूगल बांट रही हैं नौकरियां

NEW YORK (20 May, Agency): माइक्रोसाफ्ट, याहू और गूगल जैसी मल्टीनेशनल कंपनियां मंदी से निपटने के लिए भले ही ग्लोबल लेवल पर नौकरियों में कटौती की जा रही हो, लेकिन इंडिया में इनका प्लान प्रोफेशनल्स का रिक्रूटमेंट्स करने की है. हालांकि ऐसा नहीं है कि ये कंपनियां इंडिया में छंटनी करने जा रही हैं, लेकिन साथ ही यहां रिक्रूटमेंट करने की भी योजना है. मिसाल के तौर पर साफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसाफ्ट ने हाल ही में कहा था कि वह इंडियन इकॉनमी की ग्रोथ रेट को देखते हुए कंपनी देश में रोजगार के अवसर पैदा करेगी. यह ऐलान माइक्रोसाफ्ट के सीईओ स्टीव बामर ने ऐसे समय में की, जबकि कंपनी दुनियाभर में 5,000 जॉब्स कट कर रही है. इसमें 55 इंप्लाइज इंडिया के भी शामिल हैं.
कुछ महीने पहले, सर्च इंजन गूगल ने भी दुनियाभर में अपने सेल्स एंड मार्केटिंग ऑपरेशंस से जुडे़ 200 लोगों को हटाने की घोषणा की थी. हालांकि कंपनी इंडिया में इंजीनियरिंग ऑपरेशंस, फाइनेंस और सॉफ्टवेयर इंजीनियंिरग सेक्टर में कुछ लोगों को रिक्रूट कर रही है. इसी तरह याहू भी भी अपने खर्चो को कम करने के लिए इंप्लाइज की तादाद कम करने में जुटी है.याहू दुनियाभर में 700 इंप्लाइज की छंटनी करेगी जो कंपनी के वर्कफोर्स का 5 परसेंट है लेकिन कंपनी बंगलुरू स्थित आरएंडडी सेंटर के 60 इंप्लाई भी शामिल हैं. इसके बावजूद कंपनी देश में 100 लोगों को रिक्रूट करने जा रही है.

fossil से खुलेंगे कई रहस्य

WASHINGTON (20 May, Agency): दिमाग को हैरत में डालने वाली साइंटिस्ट्स की इस खोज की जितनी तारीफ की जाए, कम होगी. दरअसल अमेरिका में करीब चार करोड़ सत्तर लाख साल पुराना एक फॉसिल दिखाया जा रहा है जो मानव विकास की कई परतों को खोलेगा.
यह फॉसिल बंदर की आकृति लिए हुए है. दिलचस्प यह है कि यह फॉसिल इतने बेहतरीन तरीके से सुरक्षित था कि इसके शरीर के फर और पेट में भोजन के बारे में जानकारियां जुटाना संभव हो सका है. यह अनोखा फॉसिल न्यूयॉर्क के अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नैचुरल हिस्ट्री में खासी चर्चा के बीच प्रदर्शित किया जा रहा है.
बनेगी डॉक्यूमेंट्री
वैसे तो इस फॉसिल के बारे में एक साइंस मैगजीन पीएलओएस-वन में कुछ जानकारियां छपी हैं लेकिन लोग इसके बारे में और जान सकें इसलिए इस पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बन रही है. इसके बारे में बताया जाता है कि यह 1980 के दशक में जर्मनी के मेसल पिट से खोजा गया था. तब से अब तक यह किसी प्राइवेट म्यूजियम में रखा गया था. बाद में नार्वे की नैचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के जॉन हुरुम ने इसका पता लगाया और इसकी इंपॉर्टेस के बारे में बताया.
फीमेल एनीमल है
जॉन का कहना है कि यह अनोखी खोज किसी सपने के सच होने से कम नहीं थी. यह फॉसिल मानव विकास की गुत्थियों को भी सुलझाने में मददगार साबित होगा. यह फीमेल एनीमल का फॉसिल है जो बंदर के जैसे प्रतीत होती है. साइंटिस्ट्स का मानना है कि बंदरों का आगे का दांत कुछ बढ़ा हुआ होता है और एक साथ होता है जो इसमें नहीं है. इनका यह भी कहना है कि यह बंदर नहीं है बल्कि एक अलग ही प्रजाति का जानवर है. साइंटिस्ट्स मानते हैं कि यह मानवों से भी मिलता-जुलता है.
डार्विनियस मासिले नाम दिया
टीम ने इसे डार्विनियस मासिले नाम दिया है. यह नाम डार्विन की जन्मशती और मेसल पिट को मिलाकर रखा गया है. रिसर्च टीम के डॉक्टर जेन्स फ्रैन्जन मेसल पिट से मिलने वाले फॉसिल्स के भी जानकार हैं. उनका कहना है कि यह फॉसिल जिस अवस्था में मिला है वह दुनिया के आठवें आश्चर्य से कम नहीं हैं.
हालांकि नेचर मैगजीन के सीनियर एडिटर डॉक्टर हेनरी इसके बारे में संशय रखते हैं. उन्होंने कहा कि इसे इतना महत्व नहीं देना चाहिए. वहीं नैचुरल हिस्ट्री के कार्नेगो म्यूजियम के डॉक्टर क्रिस बियर्ड कहते हैं कि नए फॉसिल्स को लेकर दी जा रही जानकारियां अगर सही साबित न हुई तो उनकी पब्लिसिटी घातक हो सकती है.

Youth Tragedy


i-next reporter
MEERUT (20 May):
आरटीओ ऑफिस में सबचलता है आरटीओ में कमर्शियलवाहन 4मिनी बस : 228 4बस : 2364 4लोड थ्री व्हीलर : 2935 4लाईट गुड व्हीकल : 3896 4मिनी गुड व्हीकल : 1753 4हैवी गुड व्हीकल : 6756 4कीरेन : 17 4टैंकर : 127 4डिलिवरी वैन : 78 4 हर माह दो दर्जन से अधिक वाहनों के वेरिफिकेशन के लिए कोर्ट और पुलिस के दफ्तरी आते हैं. आरटीओ आफिस में ट्रकों का लेखा-जोखा तो दर्ज है, लेकिन किसी का कोई क्रिमिनल रिकार्ड नहीं है. न ही विभाग इन क्रिमिनल वाहनों का रिकार्ड रखने की जरूरत समझता है. सभी ट्रकों को आसानी से फिटनेस सर्टिफिकेट मिल जाता है. यमदूत बने ट्रक चालकों के लाइसेंस पर पिछले पांच साल से कोई कार्रवाई नहीं हुई है, और न ही कोई ड्राइविंग लाइसेंस ही निरस्त किया गया है. लाखों की टैक्स वसूली तीन हजार ट्रकों से हर माह आरटीओ आफिस लाखों रुपये का टैक्स वसूलता है. नए वाहन को तीन साल में और पुराने वाहनों को हर साल फिटनेस के लिए आरटीओ ऑफिस बुलाया जाता है. लेकिन इन वाहनों की फिटनेस सर्टिफिकेट आसानी से मिल जाता है. हर माह आरटीओ आफिस में अपराधी वाहनों के लिए पुलिस और कोर्ट से वेरिफिकेशन लेटर आते हैं. विभाग इनके कागज और टैक्स संबंधित जानकारी देकर छुटकारा पा लेता है. विभाग ऐसे वाहनों को काली सूची में डालने के बजाय क्लीन चिट दे देता है. क्या होता है चेकिंग में सड़क पर उन्हीं वाहनों की चेकिंग की जाती है, जो बिना रोड टैक्स और बीमा कराए चल रहे हैं. ट्रक की गति, ड्राइवर की उम्र और कहीं ड्राइवर नशे में तो नहीं है कि कोई जांच नहीं होती है. पांच साल में ऐसे पांच वाहनों के ही चालान हुए हैं, जो नशे में ट्रक चला रहे थे. उनका लाइसेंस निरस्त होना चाहिए था, लेकिन विभाग ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की. कोड पर होता है काम सूत्रों के अनुसार कुछ ट्रकों के कोड हैं जो उन वाहनों पर दर्ज होते हैं. ऐसे वाहनों की चेकिंग नहीं की जाती है. यह कोड पूरी यूपी में वैलिड होता है. विभाग के अधिकारी इसे समझते हैं. इन्ही कोड्स के चलते लापरवाह ट्रक चालक और ड्राईवर पकड़ में नहीं आते हैं. मोटर व्हीकल एक्ट मोटर व्हीकल एक्ट में आरटीओ को लापरवाह चालकों के लाइसेंस निरस्त करने और हत्यारे वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद करने की पावर है. लेकिन विभाग के आला अधिकारी मोटर व्हीकल एक्ट पर कम अपने बनाए एक्ट पर ज्यादा चल रहे हैं. इसी वजह से ये हत्यारे ट्रक और ड्राईवर खुले घूम रहे हैं. ऐसा नहीं है कि वाहनों पर कार्रवाई नहीं होती है, फील्ड में तैनात एआरटीओ ऐसे वाहनों और परिचालकों का चालान कर गाड़ी भी सीज करते हैं. चेतावनी देने और हर्जाना वसूलने के बाद इन वाहनों को छोड़ा जाता है. लाइसेंस निरस्त तभी होता है, जब वाहन चालक अपंग हो, लापरवाह चालकों का लाइसेंस निरस्त करने और ऐसे ट्रकों पर भी कार्रवाई करना विभाग के अधिकार में है. -संजय माथुर आरटीओ इनफोर्समेंट, मेरठ
सिटी की सड़कों पर ट्रैफिक के साथ मौत भी दौड़ रही है. पता नहीं यह कब किसे गिरफ्त में ले ले. खास बात ये है कि एक्सीडेंट के सबसे ज्यादा शिकार यूथ बन रहे हैं. इनके खून से सड़कें लगातार लाल हो रही हैं. किसी का इकलौता चिराग बुझ गया तो किसी की फैमिली पर ही कहर टूट पड़ा. कोई रूम पार्टनर के साथ घूमने निकला तो मौत का भी पार्टनर बन गया. कुछ ऐसी ही है एक्सीडेंट की दास्तां. हर महीने तकरीबन 10 यूथ मौत के आगोश में समा रहे हैं.
मौत की फेहरिश्त
छवि अग्रवाल, बॉबी, शिखर राज, उदयवीर, ईशांत शर्मा, मोहित.. नामों की यह फेहरिस्त काफी लंबी है. ये सब दुनिया छोड़ चुके हैं. इन सभी में दो बात कॉमन हैं. पहली ये कि सभी की उम्र 15 से 25 के बीच रही है. दूसरी यह कि इनकी मौत की वजह एक्सीडेंट है. किसी के भविष्य ने ट्रक के नीचे दम तोड़ दिया तो किसी को बेकाबू बस ने कुचल डाला. मातम और आक्रोश पनपा, लेकिन फिर सब कुछ पहले जैसा हो गया. न तो एक्सीडेंट करने वाले पकड़े गए, न ही एक्सीडेंट की रफ्तार मंदी पड़ी. सवाल है कि आखिर इतने लोगों को खोकर भी किसी ने कोई सबक क्यों नहीं लिया.
करियर से कत्ल तक
एक्सीडेंट के कई मामले तो ऐसे हैं जिनमें करियर की सुनहरी डगर पर यूथ चले थे लेकिन वे मुकाम तक पहुंचते, इससे पहले ही बेकाबू वाहनों ने उनका कत्ल कर डाला. शुरुआत गोल्डन एवेन्यू कॉलोनी की छवि अग्रवाल से करते हैं. बीसीए कंपलीट करने के बाद छवि का पुणे के एक प्रतिष्ठित संस्थान में एमबीए में एडमीशन हो गया था. लेकिन किस्मत उसके साथ नहीं थी. मां के साथ वह स्कूटी पर शॉपिंग के लिए निकली और पीछे से आए ट्रक ने दोनों को मौत की नींद सुला दिया. कल्याण नगर का शिखर राज अपने दोस्तों के साथ हरिद्वार गया था. वह इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था. रास्ते में हुए एक्सीडेंट ने घर के इकलौते चिराग को बुझा दिया. ईशांत शर्मा ग्रेटर नोएडा के एक इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग कर रहा था. मोहिद्दीनपुर चेकपोस्ट के पास उसकी बाइक टकराई और वह मौत की नींद सो गया.
मौत भी साथ
नीरज, दीपांशु और शुभम तीनों गहरे दोस्त थे. दोस्ती इतनी पक्की कि मौत भी इन्हें अलग नहीं कर सकी. तीनों बुलंदशहर के बाबू बनारसी दास कॉलेज से बीटेक कर रहे थे. तीनों मेरठ में नेहरू नगर निवासी अपने दोस्त मनीष चौधरी की बहन की शादी में आए थे. हादसा गत 28 नवंबर की रात ठीक जेल चुंगी पर हुआ. तीनों मारुति कार में सवार थे. जेल चुंगी पर सामने से आ रहा एक कैंटर अनियंत्रित होकर पलट गया और तीनों दोस्तों का अंत हो गया.
फैमिली पर कहर
पिछले दिनों रुड़की रोड पर हुए एक सड़क हादसे ने सभी के रोंगटे खड़े कर दिए थे. हरिद्वार से दिल्ली वापस लौट रही साहू फैमिली पर 12 अप्रैल की रात कहर बनकर टूटी. उड़ीसा के मूल निवासी संग्राम सिंह साहू अपने पिता, मां, पत्नी और बेटा-बेटी के साथ हरिद्वार से दिल्ली लौट रहे थे. सकौती के पास उनकी कार अज्ञात वाहन के पीछे जा घुसी. इस हादसे में साहू फैमिली के छह सदस्यों समेत सात की मौत हुई. सातवां शख्स कार चालक था.

ऑन लाइन फ्लर्ट रोकने की कवायद

JAKARTA (21 May, Agency): इंडोनेशिया में मुसलमान धर्मगुरुओं को एक नए तरह की चिंता सताने लगी है. यहां के धार्मिक गुरुओं का कहना है कि सोशल साइट्स के यूज करने से अवैध संबंधों को बढ़ावा मिलेगा. ऑरकुट और फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स जबर्दस्त पॉपुलर हैं और देश-दुनिया में अनगिनत लोग इसके मेम्बर हैं. दुनिया के विभिन्न देशों में लोग इन सोशल साइट्स के जरिए आपस में जुड़े हुए हैं. वहीं इंडोनेशिया में मुस्लिम धार्मिक लीडर्स ने इसके लिए कुछ नियम कायदे तय करने की डिमांड की है. ऐसे ही कुछ नियम तय करने के मकसद से दुनिया भर से करीब 700 धार्मिक लीडर व इमाम गुरुवार को इंडोनेशिया मे एकत्र हुए. ये लीडर चाहते हैं कि लोग ऑनलाइन फ्लर्ट या ऐसी दूसरी एक्टिविटीज से बचें जिनसे एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स में इजाफा होता है. धार्मिक लीडर्स द्वारा इस तरह की मांग किए जाने से एक नई तरह की बहस छिड़ने की काफी गुंजाइश है. वैसे इन साइट्स के दीवानों में यूथ्स की संख्या काफी है जो अपने दोस्तों से इसके जरिए संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं.

New hope for heart patients

NEW DELHI (21 May, Agency): भारत में पहली बार हार्ट अटैक के ट्रीटमेंट के लिए पेशेंट के शरीर में लगे एक मेडिकल एक्वीपमेंट में उस सुपर प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया है जिसका इन्वेंशन अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने स्पेस यान के इन्सुलेशन के लिए किया था.
क्या है सुपर प्लास्टिक?
सुपर प्लास्टिक एटेन एबिलीटी कार्डिएक रीसिंगक्रोनाइजेशन थैरेपी (सीआरटी) के सेक्टर में सबसे पहली लीड है जो नासा इंजीनियरों द्वारा डेवलप किए गए इंसुलेशन मैटीरियल के इस्तेमाल से बनता है. यह पेसमेकर या सीआरटी से एनर्जी लेता है और हार्ट की मांसपेशियों को सप्लाई करता है जिससे वह पहले की तरह सामान्य रूप से काम करने लगती है.
एफडीए ने लगाई मोहर
एटेन एबिलीटी का डेवलेपमेंट मेडट्रानिक कंपनी द्वारा किया गया है और इसे हाल ही में अमेरिकी ऑर्गनाइजेशन एफडीए की मान्यता मिल गई है. मेडट्रानिक कंपनी सीरियस डीसिजेस से जूझते पेशेंट्स के लिए लाइफ टाइम सॉल्यूशन सर्विस देने के मामले में दुनिया में अग्रणी कंपनी है.
हार्ट पेशेंट्स होंगे खुश
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में इलेक्ट्रोफिजियो थैरेपी और इंटरवेंशनलिस्ट कार्डियोलाजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसलटेंट डॉ. बलवीर सिंह ने यह एक्वीपमेंट पेशेंट्स को लगाया है. डॉ.सिंह का मानना है कि पहली बार ऐसा हुआ है कि शरीर में लगाए जाने वाले इस प्रकार के किसी एक्वीपमेंट में नासा से प्राप्त टेक्निक का यूज किया गया. उन्होंने बताया कि दिल के ऐसे भाग के ट्रीटमेंट में आसानी होगी जहां अब तक पहुंचना कठिन होता है. इसका लाभ दुनिया भर के हार्ट पेशेंट्स को हो सकेगा. उन्होंने कहा कि हो सकता है यह महंगी हो लेकिन आसानी से मिलेगी.

रब ने बना दी गुड़िया से जोड़ी

KAUSHAMBI (21 May, Agency): कहते हैं कि जोड़ियांतो ऊपर वाला बनाकर भेजता है. तोऊपर वाले ने एक जोड़ी बहुत अनोखीबनाई. साठ साल के व्यक्ति की जोड़ीएक खिलौने वाली गुड़िया के साथबनाई. यकीन नहीं होता . आईये, हम बताते हैं आपको कि आखिरकारकैसे हुई यह अनोखी शादी.
हुआ यूं कि कौशांबी जिले के जहानपुरके रहने वाले साठ साल के अनमैरिडअम्रत लाल को किसी ने उलाहना दियाकि मरने के बाद अंत्येष्टि कौन करेगा. फिर क्या था अम्रत लाल को यह तानाबर्दाश्त नहीं हुआ. अब समस्या यह थीकि उम्र के ढलते इस पड़ाव में उनसेशादी कौन करे. फिर उनके दिमाग मेंआइडिया आया. उन्होंने बच्चों केखेलने वाली एक गुड़िया से शादी करनेका मन बनाया.
सारे रीति रिवाज निभाए
यह अनोखी शादी वास्तव में अनोखीथी. अम्रत लाल ने सारी रात विधिविधान से पंडित और नाई कीमौजूदगी मे विवाह संस्कार संपन्नकराया. उनके छोटे भाई ने लड़की केपिता की भूमिका निभाते हुएकन्यादान किया. भाई के बेटे ने लड़कीके भाई की रस्म अदा की औरयथाशक्ति दहेज भी दिया गया. विवाहकी रस्म खत्म होने पर गांव वालों कोबाकायदा डिनर कराया. पूरे गांववालोंने जमकर धमाल किया. इसी शुक्रवारको वर-वधू के साथ गंगा स्नान के बादश्री सत्य नारायण की कथा सुनने कानिश्चय भी किया है.
सुनते थे ताना
निर्धन तबके के अमृत लाल कानपुर मेंएक डेयरी में मात्र 1800 रुपए प्रतिमाह की नौकरी करते हैं. उनके चारभाई हैं जो नाती पोते वाले हैं. अमृतलाल अक्सर अपने छोटे भाई छोटेलाल के पास गांव आते थे. कुछ दिनपहले छोटे लाल की पत्नी ने उनकोउलाहना दिया तुम कुंआरे हो तोतुम्हारे मरने के बाद तुम्हारी अंत्येष्टिकोई नही करेगा. यह ताना ही अम्रतलाल के लिए तनाव का कारण बनाऔर हो गई गुड़िया से शादी.

1 दिन 11 जांबाज

NEW DELHI/KATHMANDU (21 May, Agency): गुरुवार का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक बन गया. इस दिन 11 भारतीयों ने माउंट एवरेस्ट को फतह किया और वहां तिरंगा लहरा दिया. इन भारतीयों की उपलब्धि के बीच नेपाल के अप्पा शेरपा ने भी गुरुवार को 8848 मीटर ऊंची चोटी पर 19वीं बार सफल चढ़ाई की.
एक कारनामा ये भी
दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी के रूप में शुमार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वालों में 19 वर्षीय मराठी युवती कृष्णा भी है. यह कारनामा करने वाली वह महाराष्ट्र की पहली महिला है. कृष्णा नेपाल के एशियन ट्रैकिंग दल में शामिल थीं.
दस का दम
कृष्णा के अलावा उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के 10 पर्वतारोही भी गुरुवार सुबह माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचे. इस दल में भी एक 24 वर्षीय महिला शामिल थी. इस दल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर जाकर एक अनोखा और साहस भरा कारानामा अंजाम दिया है.
नेपाली शेरपा को सलाम
इन भारतीय पर्वतारोहियों के बीच नेपाल के 49 वर्षीय अप्पा शेरपा ने एवरेस्ट पर 19वीं बार सफल चढ़ाई कर अपना ही रिकार्ड तोड़ा. याक चराने वाले एक गरीब व्यक्ति के पुत्र अप्पा शेरपा का यह अभियान पर्यावरण जागरूकता को समर्पित था. परिवार का पेट भरने के लिए महज 12 साल की उम्र में पोर्टर (पर्वतारोहियों का सामान ढोने वाला) बनने वाले अप्पा शेरपा अब दुनिया के महानतम पर्वतारोहियों में शुमार किए जाते हैं. उन्हें शुरू में काफी संघर्ष करना पड़ा था.
खास मकसद के लिए
अप्पा शेरपा शुरू में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ पाने में सफल नहीं हो सके थे. तीन बार नाकाम रहने के बाद 1980 में पहली दफा एवरेस्ट के शिखर को चूमा था. लोगों को अप्पा के एवरेस्ट पर पंहुचने का यह कारनामा याद रहेगा. गिनीज बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिका‌र्ड्स में दर्ज अप्पा शेरपा इस वर्ष खास मकसद से एवरेस्ट पर चढ़े. उनका यह अभियान प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के कारण मौसम चक्र में आ रहे बदलाव को रोकने के लिए अवेयरनेस फैलाने के प्रति समर्पित था. अप्पा नेपाली समयानुसार सुबह आठ बजे एवरेस्ट पर पहुंचे और वहां एक बैनर लहरा दिया. इस पर लिखा था, मौसम में बदलाव को रोको, हिमालय को जीने दो.