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Tuesday, April 27, 2010

Robots Feature

रोबोट्स को इंसान की तरह काम करते फ्यूचर की कल्पना करना अब सच्चाई से अधिक दूर की सोच नहीं है. फिल्मों में आपने देखा होगा कि किस तरह से रोबोट्स हमें छोटे-छोटे कामों से मुक्ति दिलाकर बड़े कामों पर कंसनट्रेट करने का मौका देते हैं. कहीं पर यह रोबोट्स विलेन का रोल प्ले करते हैं और सारी इंसानियत के लिए ढेर सारी मुसीबतें पैदा करने लगते हैं.

यह कहा जा सकता है कि रोबोट्स इंसानों के सोचने और बिहेव करने के तरीके को चेंज करते हैं. एक हद तक ऐसा हो भी रहा है. बायोनिक लिम्ब्स और कॉकहीलर इम्प्लांट्स इंसान की कमियों को दूर कर उसे परफेक्टली फंक्शन करने का मौका दे रहे हैं. बोस्टन रेनिटल इम्प्लांट प्रोजेक्ट में तो साइंटिस्ट्स उस फार्मूले पर काम कर रहे हैं जिससे वह रोबोट के जरिए किसी ब्लाइंड की आंखों को रोशनी दे सकेंगे. यह सब कुछ रोबोटिक्स पर बेस्ड है और हमें बताता है कि किस तरह से इंसान इस मशीन पर डिपेंड होता जा रहा है.

केवल फिजिकल ही नहीं इमोशनल फील्ड पर भी रोबोट्स हमारी हेल्प कर सकते हैं. प्लिओ डायनासोर रोबोट ट्वाय इसका अच्छा एग्जांपल है. लोग इसे एक रियल पेट एनीमल समझते हैं. यह खुशी, डर, फ्रस्ट्रेशन और यहां तक कि दर्द का भी अहसास बखूबी कर सकता है.

इमोशनल लेवल पर रोबोट्स का एक यूज मेडिकल फील्ड में भी शुरू होने जा रहा है. हमारी इमोशनल स्टेट पर रिएक्ट कर सकने वाला रोबोट कठिन समय में हमारा साथी बन सकता है. मेडिकल फील्ड की बात करें तो मरीज के इमोशंस को फील कर यह रोबोट डॉक्टर्स को उस मरीज का बेहतर इलाज करने में हेल्प कर सकता है.

बच्चों में सोशल स्किल और रिस्पांसिबिलिटी डेवलप करने में भी रोबोट्स का यूज हो सकता है. हम रोबोट्स के जरिए कई सोशल हैबिट्स और अंडरस्टैंडिंग्स इनकलकेट कर सकते हैं. रोबोट्स के जरिए यह करना दूसरे तरीकों से कहीं ज्यादा आसान होगा.

मिलिट्री और पुलिस तो बॉम्ब डिटेक्शन के लिए आलरेडी रोबोट्स का यूज कर रहे हैं. इसके अलावा खतरनाक टास्क पर भी इनकी हेल्प ली जा रही है. आने वाले समय में इस इंडस्ट्री में इनका यूज और बढ़ने वाला है.

ऊपर डिस्क्राइब किए गए एग्जांपल्स से हमें पता चलता है कि हम किस तरह से रोबोट्स पर डिपेंड होते जा रहे हैं. वह हमारी जिंदगी को चेंज कर रहे हैं, लेकिन मिलियन डॉलर क्वेश्चन तो यही है कि हम उन्हें किस हद तक अपनी लाइफ में चेंज करने की परमिशन दे सकते हैं?

लक्ष्मी पर मेहरबान लक्ष्मीं

धन की देवी लक्ष्मी जिस पर एक बार मेहरबान हो जाएं, उसके वारे न्यारे कर देती हैं. कुछ ऐसा ही हाल इंडियन ओरिजिन के ब्रिटिश इंडस्ट्रियलिस्ट लक्ष्मी मित्तल का भी है. लक्ष्मी उन पर इस कदर मेहरबान हुई हैं कि वह लगातार छठे साल ब्रिटेन के धनकुबेरों की लिस्ट में टॉप पर बने हुए हैं. 2010 के लिए संडे टाइम्स रिच लिस्ट में 22.45 अरब पौंड नेटवर्थ के साथ लक्ष्मी मित्तल पहले पायदान पर हैं, जबकि इंडियन ओरिजिन के ही अनिल अग्रवाल 60 सीढ़ी चढकर 10वें पायदान पर पहुंच गए. अग्रवाल की कंपनी वेदांत रिसोर्सेज के शेयर्स का प्राइज बढ़ने से उनकी एस्सेट्स 60 करोड़ पौंड से बढ़कर 4.1 अरब पौंड हो गई. वहीं 55 करोड़ पौंड नेटवर्थ के साथ एनआरआई इंडस्ट्रियलिस्ट लार्ड स्वराज पाल 115वें पायदान पर हैं. संडे टाइम्स की इस लिस्ट में अरबपतियों की संख्या 2010 में बढ़कर 53 पहुंच गई जो इससे पहले 10 थी. लिस्ट में दूसरे पायदान पर रसियन इंडस्ट्रियलिस्ट रोमन अब्रामोविच है जिनकी नेटवर्थ 7.4 अरब पौंड है. संडे टाइम्स की इस लिस्ट में 1000 धनकुबेरों का धन 2010 में बढ़कर 335.5 अरब पौंड पहुंच गया जो 2009 के मुकाबले 77.26 अरब पौंड अधिक है

A bad effect of good thing

आर रेटेड फिल्में देखने से मना करना बच्चों पर उल्टा असर डाल सकता है. यह खुलासा हुआ है हाल ही में एक रिसर्च में. रिसर्चर्स ने अमेरिका में की गई अपनी स्टडी से रिजल्ट निकाला है कि पर्दे पर दिखाए जाने वाले एडल्ट प्रोग्राम देखने से रोकने पर बच्चों में शराब पीने की लत पड़ सकती है. इसके अलावा उनमें स्मोकिंग, कम एज में सेक्स या फिर एबनॉर्मल बिहैवियर की आशंका भी बढ़ सकती है.
महत्वपूर्ण पहलू की उपेक्षा
न्यू हैंपशायर स्थित हनोवर के डार्टमाउथ मेडिकल स्कूल में रिसर्च में पाया गया कि जिन बच्चों को ऐसी फिल्में नहीं देखने दी गई उनमें कम एज में शराब की लत पड़ने की आशंका अपने साथियों के कंपैरिजन में बढ़ गई. वहीं 17 साल की कम एज के जिन बच्चों को ऐसी फिल्में देखने नहीं मना किया गया उनके साथ ऐसी कोई प्रॉब्लम नहीं देखी गई. यह स्टडी जर्नल ऑफ स्टडीज ऑन अल्कोहल एंड ड्रग्स में पब्लिश हुई है. इसमें उस बात की ओर ध्यान दिलाया गया है जिसमें बच्चों को मीडिया के प्रभाव में आने से रोककर पैरेंट्स कीमत चुका रहे हैं. चीफ रिसर्चर डार्टमाउथ मेडिकल स्कूल के जेम्स डी सार्जेन्ट ने कहा कि हमें लगता है कि बच्चों की देखभाल का यह एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसकी उपेक्षा की जा रही है.

अतिथि तुम बिन बुलाए क्यों आए?

अतिथि को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन जब अतिथि बिना बुलाए आ जाए तो परेशानी का सबब बन जाता है. सानिया-शोएब के वलीमा में भी कुछ ऐसे ही अतिथि पहुंच गए और बेकाबू होते हालातों के चलते इस जोड़े को रिसेप्शन बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा. बिन बुलाए मेहमानों और सिक्योरिटी की बदइंतजामी ने सियालकोट में इंडियन टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा और पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक की शादी के रिसेप्शन का मजा बिगाड़ दिया.
सियालकोट हॉकी ग्राउंड में आयोजित शादी के रिसेप्शन में कई बिन बुलाए मेहमानों के आने से यह प्रोग्राम शोएब-सानिया और उनकी फैमिली के लिए नया सिर दर्द बन गया. पंजाब पुलिस द्वारा किए गए भारी सिक्योरिटी अरेंजमेंट और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन की कड़ी निगरानी से प्रोग्राम में दिक्कतें और बढ़ गईं. एक प्राइवेट चैनल की खबर के मुताबिक इस समारोह में शरीक होने के लिए इंडिया से आया सानिया का परिवार प्रोग्राम की बदइंतजामी से खफा होकर तय समय से पहले ही लाहौर चला गया. प्रोग्राम के चश्मदीदों ने कहा कि मंच पर बैठकर मेहमानों का सत्कार कर रहे शोएब और सानिया भी प्रोग्राम पूरा होने से पहले ही समारोह छोड़कर चले गए.

DOUBLE FAYDAA

ज्यादातर बैंक चाहती हैं कि घर के सभी कोओनर्स को ज्वाइंटली होम लोन लेना चाहिए. इसके मुताबिक आप अपनी वाइफ और पैरेंट्स के साथ मिलकर ज्वाइंट होम लोन का फायदा उठा सकते हैं. कुछ बैंक्स इस टीम में भाइयों को भी शामिल होने की परमीशन देती हैं. हालांकि बहनों, दोस्तों और अनमैरीड कपल्स जो साथ में रहते हैं उन्हें ज्यादातर बैंक इस स्कीम का फायदा नहीं देते.

कमाल के ये चार

सिटी में प्रतिभाशालियों की कोई कमी नहीं है. वे देश-दुनिया की हर इंडस्ट्री में छाए हैं. अपनी प्रतिभा का झंडा हाल ही में सिटी के चार स्टूडेंट्स ने कुछ इस कदर बुलंद किया कि साफ्टवेयर बनाने वाली दुनिया की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट भी उनका लोहा मान गई. माइक्रोसॉफ्ट अब इन स्टूडेंट्स के साथ काम कर रही है.
थी गलती
करीब एक माह पहले माइक्रोसॉफ्ट अपना नया सॉफ्टवेयर अश्योर लांच करने वाली थी. कानपुर यूनिवर्सिटी में बीटेक फ‌र्स्ट इयर के स्टूडेंट्स अधोक्षज, गौरव सिंह और अंकुर वर्मा तथा बीफार्मा का स्टूडेंट अनुराग मिश्र को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इस सॉफ्टवेयर का गहनता से अध्ययन किया. उन्हें सॉफ्टवेयर में कई कमियां मिलीं. हालांकि यह कमियां छोटे लेवल की, लेकिन महत्वपूर्ण थीं. इन कमियों का एक नोट बनाकर इन स्टूडेंट्स ने एक मेल माइक्रोसॉफ्ट को भेजा. कंपनी ने जब इसकी जांच की तो बात सही निकली. इसके बाद कंपनी ने सॉफ्टवेयर की लांचिंग रोक दी.
दिया ऑफर
माइक्रोसॉफ्ट ने इन स्टूडेंट्स को मेल कर इन कमियों को बताने के लिए थैंक्यू बोला और उन्हें तीन ऑफर दिए. पहला इन स्टूडेंट्स के डेवलप किए गए सॉफ्टवेयर को बाजार में अपने नाम से लांच करना, जिसका इन स्टूडेंट्स को पेमेंट किया जाएगा. दूसरा टेक्निकल सपोर्ट और तीसरा कंपनी के सॉफ्टवेयर में बेहतरी के लिए सजेशन देना. इस ऑफर के बाद इन स्टूडेंट्स ने इंडियन डिजी लैब नामक एक कंपनी बनाई और काम शुरू कर दिया.
चार का चमत्कार
ये चारों स्टूडेंट्स अलग-अलग क्षेत्र में एक्सपर्ट हैं. अधोक्षज जहां सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में महारत रखता है, वहीं गौरव सिंह और अंकुर वर्मा कंप्यूटर की कोई भी सिक्योरिटी को तोड़ने में माहिर हैं. अनुराग मिश्र वेबसाइट डिजाइनिंग, वायरस बनाने और एंटी वायरस रिमूव करने में एक्सपर्ट है.
कंप्यूटर पर सिमटी दुनिया
कुछ नया करने का जुनून इन चारों में इस कदर छाया रहता है कि उनका अधिकतर समय कंप्यूटर पर ही गुजरता है. इन स्टूडेंट्स का कहना है कि वे खुद को साबित करना चाहते हैं. फ‌र्स्ट इयर का स्टूडेंट्स होने के कारण सीनियर उन्हें अक्सर अंडर एस्टिमेट करते थे. खुद को साबित करने के लिए ये खाना, पीना, सोना और घूमना भूलकर कंप्यूटर की दुनिया में खोए रहते हैं.
सॉफ्टवेयर सिटी बने
इन स्टूडेंट्स का सपना कानपुर का नाम फिर से इंटरनेशनल लेवल पर रोशन करने का है. इनका कहना है कि कानपुर कभी इंडस्ट्रियल सिटी हुआ करती थी. अब हम इसे सॉफ्टवेयर सिटी बनाना चाहते हैं. हम दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि इंडियन्स किसी से कम नहीं हैं. वे हर क्षेत्र में आगे हैं.