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Wednesday, May 12, 2010

Radar की नजरों से ओझल रहेगा mobile OT

देश के नाम अपनी जान तक कुर्बान करने करने का जज्बा रखने वाले सैनिकों के कुछ कर गुजरने में हमारे साइंटिस्ट भी पीछे नहीं. कानपुर स्थित डिफेंस मैटेरियल्स स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैबलिशमेंट (डीएमएसआरडीई) के रिसचर्स ने सैनिकों के लिए एक ऐसा मोबइल ऑपरेशन थियेटर बनाया है, जिसे तुरंत कहीं भी इंस्टॉल करके घायलों का बड़े से बड़ा ऑपरेशन तुरंत किया जा सकेगा. वहीं एंटीमाईक्रोनियल कपड़े का बना होने के कारण इस तंबू या टेंट जैसे ऑपरेशन थियेटर में वायरस या बैक्टीरिया भी घुस नहीं सकेंगे. वहीं दुश्मन के रडार या प्लेन भी इसे देख नहीं पाएंगे. ट्यूजडे को टेक्नॉलजी दिवस के मौके पर अपने किस्म के इस पहले मोबाइल ऑपरेशन थिएटर सहित आर्मी के लिए बने दूसरे प्रोडक्ट्स की एग्जीबीशन लगेगी. डीएमएसआरडीई में स्कूली बच्चे व अन्य लोग इन्हें देख सकेंगे. डीएमएसआरडीई के डायरेक्टर केयू भास्कर राव ने बताया कि इस टेंट ऑपरेशन थिएटर को महज एक पोल (खम्भे) पर क्रिएट किया गया है. इसे जंगल, पहाण, रेगिस्तान जैसी किसी भी जगह पर कुछ ही घंटों में खड़ा किया जा सकेगा. इस टेंट में ऑपरेशन थिएटर, अलग डाक्टर रुम तो होगा ही 10 से 15 पेशंट एक साथ रखे जा सकेंगे.
डीएमएसआरडीई के टेक्सटाइल डिवीजन के हेड डाक्टर अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि इस टेंट को बनाने में एंटीमाईक्रोनियल कपड़े का यूज किया है. वार्ता के दौरान एडीशनल डायरेक्टर डा. एमनसीम, डा. डीके सेतुआ, डा.रजनीश तिवारी मौजूद थे.

उनका नाम तो है, पर निशां कहीं नहीं..

आजादी की पहली लड़ाई के 10 मई को 153 साल पूरे होने के बावजूद शायद आजतक हम सब में संवेदना नहीं जागी. हम अपनी विरासत तक के प्रति अवेयर नहीं हैं. शायद यही वजह है कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नायक नानाराव के नाम पर जिस हिस्टोरिकल पार्क का नाम रखा गया, वहां उनकी एक अदद प्रतिमा तक नहीं लगी है.
नायक का ही नहीं पता
अंग्रेजों के जमाने में बीवीघर के नाम से जाना जाने वाले इस पार्क को आजादी के बाद ही नानाराव स्मारक पार्क से जाना जाता है. यहां रोजाना हजारों लोग सैर करने आते हैं. लेकिन किसी को आज तक यहां नानाराव नहीं दिखे. वाकई यकीन नही आता, लेकिन ये बात बिल्कुल सच है है कि यहां नानाराव की एक छोटी सी मूर्ति तक नहीं है, जो इस बात की गवाही दे कि इन्हीं के नाम पर पार्क का नाम रखा गया है. क्राइस्ट चर्च कॉलेज के हिस्ट्री डिपार्टमेंट के हेड डॉ. सर्वेश कुमार कहते हैं ये तो ऐसा है जैसे किसी फिल्म से मुख्य किरदार ही गायब हो.
सब हैं, केवल वही नहीं
इस पार्क में मणींद्र बनर्जी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, झांसी की रानी, मैनावती, मंगल पांडेय, तात्या टोपे, बाल गंगाधर तिलक से लेकर उस बरगद के पेड़ की याद भी बाकी है जिस पर अंग्रेजो ने आजादी की लड़ाई के योद्धाओं को फांसी पर लटका दिया था. 1857 के संग्राम के नायकों में से एक नानाराव की स्मृतियां सिर्फ पार्क के नाम के साथ ही जुड़ी हैं.

टीम इंडिया को बदलनी होगी आदत

टेस्ट क्रिकेट में इंडिया की ओर से सबसे ज्यादा विकेट झटकने वाले फॉर्मर कैप्टन अनिल कुंबले का मानना है कि टीम इंडिया को इंटरनेशनल क्रिकेट के हाई लेवल के एकॉर्डिग खुद को एडजस्ट करते हुए खेलने की आदत डालनी होगी. उन्होंने कहा कि इंडिया के पास धोनी, गंभीर, युवराज जैसे टॉप प्लेयर हैं जो किसी भी फार्मेट में खुद को ढालने की पूरी कैपेसिटी रखते हैं.
बॉलिंग को भी देनी होगी इंपॉर्टेस
कुंबले ने कहा कि इंटरनेशनल क्रिकेट में सफलता के लिए बेहद दबाव में खेलने की आदत होना जरूरी है और हर प्लेयर पर पर्सनल जिम्मेदारी होती है. यहां पर छोटी-छोटी गलतियां महंगी साबित हो सकती है. यह विडंबना है कि बैट्समेन से किसी भी कंडीशन में एडजस्ट होने की उम्मीद की जाती है. जहां तक बॉलिंग का सवाल है तो इंडिया के पास एक्सपर्ट बॉलर होना जरूरी है. कम से कम चार ऐसे बॉलर होने चाहिए जो भरोसेमंद हो और जो स्पिन या पेस बॉलिंग की बारीकियां समझते हो. इंडिया के पास फिलहाल तीन फुल टाइम बॉलर हैं और बाकी बॉलर पार्टटाइमर है. फ्यूचर में इंडिया को अपनी बॉलिंग पर उतना ही ध्यान देना होगा जितना कि बैटिंग पर दिया जाता है।

विश्वनाथन आनंद का ताज बरकरार

इंडियन चेस स्टार विश्वनाथन आनंद ने मंगलवार को लोकल प्लेयर वेसलिन टोपालोव को 12वीं और अंतिम बाजी में हराकर व‌र्ल्ड चेस चैंपियनशिप का खिताब बरकरार रखा. आनंद की यह जीत इसलिए भी इंपॉर्टेट है, क्योंकि वह अंतिम बाजी में काले मोहरों के साथ उतरे थे, जबकि दोनों प्लेयर्स के एक समान 5.5 प्वाइंट्स थे. आनंद ने 56 चाल तक चली बाजी में टोपालोव को नतमस्तक करके प्ले आफ की नौबत नहीं आने दी.

Registry कराना अब होगा आसान

अगर सबकुछ तयशुदा प्लानिंग के मुताबिक हुआ. तो अब मकान की रजिस्ट्री के लिए आपको स्टांप पेपर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके लिए कानपुर में ई-स्टैम्पिंग शुरु किये जाने की योजना है.
क्या है e-stamping?
ई-स्टैम्पिंग स्टांप पेपर का ही दूसरा विकल्प है. यह बिल्कुल पेपर-फ्री वर्किग जैसा होगा. इसमें मकान मालिक को रजिस्ट्री के लिए स्टांप पेपर नहीं लगाने होंगे. बल्कि, बैंक में रजिस्ट्री के लिए फंड जमा करना होगा. बदले में बैंक की तरफ से रसीद इश्यू की जाएगी. इस रसीद को प्लेन पेपर में रेवेन्यू स्टांप के साथ लगाकर रजिस्ट्री करवाई जा सकेगी.
रुकेगा फर्जीवाड़ा
ई-स्टैम्पिंग की मुख्य वजह, फर्जीवाड़ा रोकना है. मंहगी प्रॉपर्टी के केसेज में स्टांप पेपर की ज्यादा दरकार होती है. दूसरा, स्टांप वेंडर अधिकतम 15,000 रुपए के स्टांप ही बेच सकते हैं. ज्यादा कीमत के स्टांप ट्रेजरी से खरीदे जाते हैं. हालांकि, कुछ वेंडर्स 15,000 से ज्यादा कीमत के स्टांप खरीद कर बेच रहे हैं.
यूपी में सप्लाई
नासिक और हैदराबाद सिक्योरिटी प्रेस में अधिकतम 25,000 रुपए कीमत के स्टांप ही प्रिंट होते हैं. कानपुर से पूरी यूपी में स्टांप सप्लाई किये जाते हैं. इनमें फैजाबाद, गोरखपुर, आगरा, मेरठ, झांसी, मुरादाबाद, लखनऊ, बस्ती और कानपुर जोन शामिल हैं. मुख्य कोषाधिकारी जीएस कलसी ने बताया कि स्टांप पेपर का कागज और प्रिंटिंग काफी मंहगी है. ई-स्टैम्पिंग से सरकार को अरबों का फायदा होगा.

अभी गर्मी जरा कम है

आने वाले दिनों में चिलचिलाती गर्मी और गर्म हवा का सामना करने के लिए तैयार हो जाइए. ट्यूजडे के मौसम ने इसका संकेत भी दे दिया है. पारा 43 डिग्री के करीब पहुंच गया. पारा अभी अपने तेवर दिखाएगा.
इस महीने की शुरुआत से ही पारा नॉर्मल से भी कम चल रहा था. दो दिन पहले हवा की डायरेक्शन पश्चिमी होने से आसमान से बादल गायब हो गए. आसमान साफ होने से सुबह होते ही लोगों को तेज धूप का सामना करना पड़ रहा है. दोपहर में तो लोगों को सिर ही नहीं चेहरा तक ढक कर चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. रही सही कसर गर्म हवाएं पूरी कर रही है. सीएसए के मौसम विभागाध्यक्ष डा. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि इस वीक टेंपरेचर बढ़ने के आसार है. ट्यूज डे को दिन के तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है।


Consumer service होगी बेहतर

कमिश्नर के निर्देश के बाद केस्को सबस्टेशनों पर बिल जमा करने वालों को धूप और प्यास से बचाएगी. फिलहाल चार सबस्टेशन पर इसके लिए कार्य शुरु कर दिया गया है. केस्को के चीफ इंजीनियर केशवराम ने बताया कि गुमटी, गोविंदनगर सहित चार बिलिंग सेंटर्स पर कंज्यूमर्स के लिए टीनशेड, चेयर, ड्रिकिंग वाटर आदि के लिए कार्य शुरु हो गया है.

अब नहीं पूछ सकोगे कितने आदमी थे

शोले के सांभा को कहा अलविदा


भारतीय फिल्म इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई मूवी शोले में सांभा का किरदार और आओ प्यार करें में संजीव कुमार के साथ लीड रोल निभाने वाले मैक मोहन का मंडे को निधन गया. ट्यूजडे को सिटी स्थित बुद्धा प्रोडक्शन ने बाल भवन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया. सभा में प्रोडक्शन मेम्बर्स के साथ अन्य लोगों ने भी दो मिनट का मौन रख उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. सन् 1964 में करियर की स्टार्टिग करने वाले मैक मोहन ने 175 से भी ज्यादा मूवीज में काम कर लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई थी. यही वजह है कि उनके निधन से सभी को दुख पहुंचा है.

Monday, May 10, 2010

नए सिरे से आंकी जाएगी महंगाई

सरकार होल सेल बेस्ड इंडेक्स को नए सिरे से तैयार कर रही है. इसमें मोबाइल फोन, बोतल बंद पीने का पानी, एलसीडी टीवी सहित 676 प्रोडक्ट्स शामिल होंगे. सोर्सेज के अनुसार नया इंडेक्स जून या जुलाई में जारी किया जा सकता है.
नई सिरीज में टाइपराइटर और वीसीआर जैसे आउटडेटेड प्रोडक्ट्स को शामिल नहीं किया जाएगा. नए इंडेक्स का बेस इयर 2004-05 होगा और इसमें 241 नए स्पेसीज शामिल होंगे. नए इंडेक्स से महंगाई के बारे में ज्यादा रियल तस्वीर सामने आएगी और उससे आम आदमी पर पड़ने वाले असर का बेहतर आकलन किया जा सकेगा. मौजूदा समय में जो होल सेल इंडेक्स है उसमें 435 प्रोडक्ट्स शामिल हैं. एक सीनियर अफसर ने बताया कि हम नए प्रोडक्ट्स के बेस पर तैयार इंडेक्स को अगले महीने या जुलाई में जारी करने की कोशिश कर रहे हैं. अधिकारी ने कहा कि मौजूदा सिरीज में कुछ पुराने प्रोडक्ट हैं. नई सिरीज में उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा. उसने कहा कि नए प्रोडक्ट्स पर बेस्ड महंगाई का आंकड़ा ज्यादा बेहतर स्थिति बताएगा.

Tuesday, May 4, 2010

AC बना रहा अस्थमा के -patient

अगर आप सोचते हैं कि शहर की धूल-धक्कड़ में बाहर नहीं निकलने से अस्थमा जैसी बीमारी से बच जाएंगे तो आप गलत हैं. सच तो ये है कि घर के अंदर एयर कंडीशनर की हवा भी आपको उतनी ही तेजी से अस्थमा दे सकती है जितना कि आउटडोर पॉल्यूशन. ये तथ्य एक संस्था द्वारा जारी सर्वे रिपोर्ट में सामने आए. रिपोर्ट में ये हैरतंगेज तथ्य मिला कि देशभर में कानपुर और बंगलुरू में अस्थमा के पेशेंट सबसे तेज गति से बढ़ रहे हैं.
सर्वे में हुआ खुलासा
4 मई को अस्थमा डे के मौके पर सिटी में कई संगठन और डॉक्टर्स अवेयरनेस प्रोग्राम करेंगे. इसकी जानकारी देने के लिए आर्गनाइज्ड प्रेस कांफ्रेंस में चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. एसके कटियार ने बताया कि पिछले साल आई आईसीएमआर की एक सर्वे रिपोर्ट में यह बताया गया था कि कानपुर और बंगलुरू में अस्थमा पेशेंट्स की संख्या अधिकतम है. ढाई परसेंट लोगों में अस्थमा पाया गया. यह सर्वे ढाई साल में बंगलुरू कानपुर, दिल्ली और चंडीगढ़ में कराया गया था.
एसी में लाईजन लॉ बैक्टीरिया
डॉ. कटियार के अनुसार सिटी में खुदी सड़कों से उड़ती धूल और स्मोकिंग से भी अस्थमा के पेशेंट बढ़ रहे हैं, पर एसी से निकलने वाली हवा में लाइजन लॉ बैक्टीरिया होते हैं. कूलिंग होने पर यह बैक्टीरिया और पनपता है. इससे भी अस्थमा होने का खतरा रहता है. इसमें भी सेन्ट्रलाइज्ड एसी इस मामले में ज्यादा हार्मफुल होता है. सिटी में हर साल 1 परसेंट नए लोग अस्थमा की चपेट में आते हैं. इस समय करीब 1.25 लाख लोग अस्थमा से पीड़ित हैं.