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Tuesday, June 23, 2009

फास्ट फूड्स यमी-यमी!

फास्ट फूड यानी ऐसा भोजन, जिसे बहुत ही कम समय में तैयार किया जा सकता है। इस फूड्स की खासियत यह है कि इसे कभी-भी और कहीं-भी आसानी से परोसा भी जा सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि इतने यमी-यमी फूड्स की शुरुआत कहां से हुई है? दरअसल, फास्ट फूड खाने का प्रचलन सबसे पहले ग्रेट-ब्रिटेन में शुरू हुआ था। आओ सबसे पहले तुम्हें बताते हैं फास्ट फूड्स की कुछ रोचक बातें..

सैंडविच की कहानी

वर्ष 1762 में जॉन मोंटागु नाम का एक अंग्रेज व्यापारी हुआ करता था। उसे काम करने के दौरान अक्सर भूख लग जाती थी। वह सोचता था कि मुझे कुछ ऐसा खाने को मिले, जो हल्का-फुल्का और टेस्टी भी हो। एक दिन घर में बैठे-बैठे उसके दिमाग में यह योजना आई कि क्यों न भूने और सूखे मीट के छोटे-छोटे टुकडों को एक ब्रेड में लपेट कर खाया जाए? बस तैयार हो गई लाजवाब सैंडविच (फास्ट फूड)! ब्रिटेन से ही सैंडविच का स्वाद अन्य देशों में भी फैला। ंîअलग-अलग देशों ने अपने-अपने यहां प्रचलित स्वाद के अनुसार सैंडविच को मॉडीफाई कर खाना शुरू कर दिया। क्या तुम्हें पता है कि दुनिया भर में फास्ट फूड के रेस्टोरेंट सबसे अधिक यूनाइटेड किंगडम में ही हैं? दूसरे स्थान पर ऑस्ट्रेलिया और तीसरे स्थान पर है अमेरिका।

पिज्जा का इतिहास

हम सभी जानते हैं कि 19वीं शताब्दी में इटली से पिज्जे का स्वाद पूरी दुनिया में फैला। एक कहानी के अनुसार, पर्सिया के राजा डेरियस के सिपाहियों ने सबसे पहले पिज्जा बनाया था। सिपाहियों ने एक अलग प्रकार के ब्रेड के टुकडे पर कुछ चीज के टुकडे, कुछ जडी-बूटियां, प्याज-लहसुन की कतरनें आदि से रैप कर खाना शुरू किया। वास्तव में, ऑवन बेक्ड गोल ब्रेड के टुकडों को टमाटर, मॉजरेला चीज, टमाटो सॉस आदि से कवर कर मॉडर्न पिज्जा तैयार किया जाता है।

हो सकते हैं मोटू

अपोलो हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट डा. प्रेम नारायण दूबे के अनुसार, फास्ट फूड खाने में बहुत अच्छा जरूर लगता है, लेकिन ये न्यूट्रिशियस नहीं होते हैं। दरअसल, जाडे के दिनों में हमारी बॉडी की ऐक्टिविटीज कम हो जाती है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि फास्ट फूड में फैटी चीजें जैसे मैदा, तेल आदि अधिक मात्रा में होता है। इसलिए इन्हें खाने से हम बहुत अधिक कैलोरी गेन कर लेते हैं। दूसरी ओर, हमारी ऐक्टिविटी जैसे-खेलना-कूदना, घूमना आदि कम हो जाता है। इसलिए हम कैलोरी खर्च नहीं कर पाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि हम मोटे होने लगते हैं। बाद में यही मोटापा बच्चों में डायबिटीज, दिल से जुडी हुई बीमारी, तनाव आदि का कारण बनने लगता है। इस बात का कोई दबाव नहीं है कि आप फास्ट फूड खाना बिल्कुल छोड दें। रोज खाने में दूध-दही, दाल-चावल और एक फल जरूर लें। वीक-एंड पर आप अपना फेवॅरिट फास्ट फूड लें। अरे हां, यदि आप मोटू नहीं कहलाना चाहते हैं, तो रोजाना फास्ट फूड खाने से बचना चाहिए।

कैलोरी गेन अधिक

एक हेल्दी व्यक्ति के लिए दिन भर में लगभग दो हजार कैलोरीज की आवश्यकता पडती है। दरअसल, जब हम एक पिज्जा या बर्गर, ढेर सारे फ्राइज और एक बडा ग्लास कोल्ड ड्रिंक पीते हैं, तो हम एक बार में ही लगभग 1450 कैलोरीज ग्रहण कर लेते हैं। इससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि फास्ट फूड का सेवन कितना हानिकारक हो सकता है! जी.एम.मोदी हॉस्पिटल की डाइटीशियन शैरोन अरोडा के अनुसार, बच्चे यदि चाहें, तो ब्रेड के ऊपर पनीर, फ्रूट्स, सलाद, डिफरेंट सॉसेज आदि को डेकोरेट कर खा सकते हैं। यह भी उन्हें पिज्जा के समान ही डेलिशस लगेगा। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि यदि आप खूब फास्ट फूड खाएंगे, तो न केवल आप मोटे हो जाएंगे, बल्कि कुछ बीमारियों की चपेट में भी आप आ सकते हैं! साथ ही, आपकी पर्सनैल्टी पर भी इसका असर पडेगा। आपको क्लास में बच्चे मोटू-मोटू कहकर भी पुकार सकते हैं। दौड कर खेलने वाले खेल में आप हिस्सा ले ही नहीं सकते! तो दोस्तो, क्या आप तैयार हैं केवल सनडे को फास्ट फूड-डे बनाने के लिए?

स्मिता

बर्गर, पिज्जा, पेस्ट्री और चाउमीन! यमी-यमी! कितने डिलिशस फूड्स हैं ये। इन सभी फास्ट फूड्स का नाम लेते ही आपकी जुबान पर ये शब्द और मुंह में पानी आना लाजिमी है। यह सच है कि ये सभी टेस्टी फूड्स हैं। लेकिन दोस्तो, न केवल जाड़े में, बल्कि हमेशा थोड़ा संभलकर हमें इन्हें खाना चाहिए। क्यों?

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