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Wednesday, April 29, 2009

जरा सावधान होने की जरूरत है

जरा तुम अपना हाथ देना.. पड़ोस की लपटें हमारे घर को घेर न लें, इसलिए जरा सावधान होने की जरूरत है. जिस बात का खतरा है, सोचो कि वो कल होगी जरख़ेज जमीनों में, बीमार फसल होगी. पाकिस्तान के मौजूदा हालात को बयां करने के लिए ये लाइनें बेहद सटीक हैं. कहते हैं पड़ोस में अगर आग लगी हो तो चैन से सोया नहीं जा सकता. गुरुवार से शुरू हुए अपोजिशन के लांग मार्च से पड़ोसी मुल्क में जबर्दस्त क्राइसिस उठ खड़ी हुई है. भले ही जरदारी सरकार जितनी सफाई दे कि वह थ्योरिटिकली ऐसे किसी डेमोक्रेटिक मूवमेंट के खिलाफ नहीं है, लेकिन वकीलों, इंटिलेक्चुअल्स और कॉमन पीपल के लांग मार्च को लेकर सरकार जितनी बेचैन है, उससे उनकी परेशानी समझी जा सकती है. सवाल उठता है कि आखिर कौन-सी बात है कि पाकिस्तान साठ साल में एक विभाजन देख चुका और अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. उसके हर प्रॉविंस में डिसिडेंट्स सिर उठा रहे हैं. ऊपर से तालिबान का ख़ौफ गंभीर चुनौती बना हुआ है. दरअसल, पाकिस्तान बनने के दौरान हुए फॉल्ट का आउटकम पड़ोसी देश की वर्तमान स्थिति में दिख रहा है. इंडियन और पाकिस्तानी डेमोक्रेटिक सिस्टम के अप्स और डाउंस के पीछे सबसे बेसिक फैक्टर है मिडिल क्लास. पिछले साठ साल के दौरान जिस तरीके से मिडिल क्लास इंडिया में स्ट्रांग (क्वांटिटेटिव और क्वालिटेटिव दोनों फ्रंट पर) हुआ, उसकी तुलना में पाकिस्तान में केवल दो क्लास अपर एंड लोअर ही इमर्ज कर पाए. या तो वहां बेपनाह गरीबी है या फिर जरदारी, भुट्टो और शरीफ फैमिली जैसे मिलिनेयर. लेकिन दोनों ध्रुवों को जोड़ने वाला कोई मिडिल क्लास वहां नहीं है. इस माहौल में नेबर कंट्री का अंदरूनी माहौल हमारे लिए भी चिंता का विषय है. कहीं पड़ोस की लपटें हमारे घर को घेर न लें, इसलिए जरा सावधान होने की जरूरत है. लाइफ की डिमांड थी हम बड़े हो गए, समझदार हो गए. बचपन को खूंटी पर टांगा और निकल पड़े दुनिया को फतेह करने. लेकिन कोई हर्ज नहीं है कभी-कभार खूंटी पर टंगे अपने बचपन को उतारकर फिर से पहन लेने में. जिंदगी को दो घड़ी उस तरह जी लेने में, जैसा हम चाहते हैं. Content makes poor men rich; discontentment makes rich men poor. - Benjamin Franklin दो ध्रुवों के बीच फासले मरने के बाद भी एसएमएस बहुत बढि़या कुत्ता था साहब. उस फोन कंपनी के इश्तिहार में तरह-तरह से मदद करता था सबकी. कभी किसी बच्ची को बैंडेज लाकर देता था. कभी बच्ची को होमवर्क कराने में मदद करता था. पर लगता है कि अब वह कुत्ता बर्खास्त सा हो गया, कम दिखता है. क्यों, क्योंकि वह एसएमएस नहीं कर पाता, इसलिए. अब तमाम मोबाइल कंपनियां-एसएमएस करो, अभियान चला रही हैं. जो एसएमएस ना कर पाये, वह बेकार है. धुआंधार एसएमएस ना करने वालों को मोबाइल कंपनियां क्या समझती हैं, समझे कि नहीं. बस बर्खास्त नहीं कर पातीं, यह अलग बात है. एक मोबाइल फोन कंपनी की सेल्सबाला ने बताया कि जी हम तो चाहते हैं कि जो प्रेमी, प्रेमिका की गोदी में सिर रखकर लेटा हुआ है, वह भी अपनी प्रेमिका को एसएमएस द्वारा ही सूचित करे कि तेरे दांतों में पालक फंसा हुआ है. पति-पत्‍‌नी झगड़े भी एसएमएस के जरिये करें, डिमांड हो, तो हम झगड़ा पैकेज निकाल सकते हैं. ढाई सौ गालियां मुफ्त, पांच सौ बहुत ही गंदे विशेषण एकैदम फ्री. झगड़ा पैकेज, कलीग के साथ रगड़ा पैकेज, सब कुछ एसएमएस के जरिये ही हो. तकरार, मारामार, प्यार सब कुछ एसएमएस के जरिये हो. भला हुआ जी अनारकली सलीम आकर निकल लिये पहले. वरना होता यूं कि अनारकली एसएमएस पर एसएमएस करती, फिर कुछ दिनों बाद मिलना ही छोड़ देती. पूछने पर बताती कि एसएमएस का बिल आया था 878973897398793 रुपये. पापा ने मोबाइल ही बंद करवा दिया. उस पुराने मोबाइल एसएमएस बिल चुकाने के लिए इन दिनों कॉल सेंटर में नौकरी कर रही हूं. मोबाइल विहीना अनारकली कॉल सेंटर पर नौकरी में मगन हो जाती. सलीम कॉल ही ना कर पाते. खैर, वो तो निकल गये. हम तो बचे रह गये हैं. जी आपके लिए स्टॉक एलर्ट पैकेज है. सारे शेयरों के भाव हम एसएमएस के जरिये ले सकते हैं-मोबाइल एसएमएस सेल्सबाला बता रही है. जी अब स्टॉक के भाव एलर्ट नहीं करते, उन्हें देखकर तो आत्महत्या करने की इच्छा करती है. मेरी क्या, बहुत इनवेस्टर्स की यही इच्छा करती है. ओके सामूहिक आत्महत्या डिस्कशन पैकेज हम ऑफर कर सकते हैं. सारे ऐसे शेयर डुबाऊ इनवेस्टर लोग ग्रुप बना लें. इस ग्रुप एसएमएस पर हम पचास परसेंट का डिस्काउंट दे सकते हैं. देखिये, हम यहां मर रहे हैं. आपको चिंता होनी चाहिए कि हमारी फैमिली का हमारे बाद क्या होगा, पर आप एसएमएस बेचने में जुटी हैं. फैमिली कंसर्न पैकेज भी हो सकता है. थोक में शोक संवेदना के लिए थोक एसएमएस पर पचास परसेंट डिस्काउंट दिया जा सकता है. मरने के बाद भी कोई एसएमएस से नहीं बच सकता. चलूं, कुत्ते से ही पूछ आऊं, बिना कुत्ता हुए, एसएमएस से कैसे बचा जा सकता है. n आलोक पुराणिक http://www.edit.inext.co.in/

Save Childness

जहां एक तरफ यह सच है कि लाखों-करोड़ों रुपए खर्च करके भी बचपन लौटाया नहीं जा सकता, उसी तरह यह भी सच है कि बिना किसी मेहनत के भी हम अपने बचपन को बचा सकते हैं, अपने अंदर. बचपन यानी बात-बेबात, जोर-जोर से रोना और बिना वजह खिलखिला कर हंस देना. बिना नक्शा पास करवाए ही मिट्टी के महल बनाना और गुस्सा आते ही किसी बुलडोजर सी एक लात मारकर उसे गिराना. अचानक किसी चिड़िया को देखकर खुश हो जाना और उसे सबको दिखाना. गाय को डरते-डरते सहलाना, उसके करीब जाना. यह बचपन ही था, जब मैं खुली आंखों से सपने देखा करता था. वो बचपन ही था जब प्लेन हवा में उड़ता था और उस प्लेन का पायलेट मुंह से आवाज निकालते हुए जमीन पर खड़ा रहता था. एक चॉकलेट सी मीठी और छोटी दुनिया थी हमारी. सपनों पर लगाम लगा दी गई. मैं धीरे-धीरे बड़ा होने लगा, समझदार भी. समझदारी भरी इस दुनिया में सपने यथार्थ से टकराकर टूटने लगे. अब मैं सिर्फ सोती हुई आंखों से सपने देखता हूं. जिंदगी ने ढेर सारा स्ट्रेस दिया है, जिसके चलते खिलखिलाकर हंसना तो दूर मुस्कुराये हुए भी जमाना हो जाता है. कल एक बच्चे को मासूमियत से खिलखिलाता देख दिल को जो सुकून मिला उसे मैं बयान नहीं कर सकता. उसकी मासूम आंखें सीधे मेरी आत्मा को छू रही थीं. बच्चे हमें क्यों अच्छे लगते हैं? न उनके पास पैसा होता है, न पावर होती है. फिर भी हम उनकी तरफ क्यों खिंचे चले जाते हैं? क्योंकि उनके पास भोलापन होता है, सच्चाई होती है. यानी सच्चाई अब तक हमें अट्रैक्ट करती है. शरीर को रेज्युवेनेट करने के कई तरीके ईजाद हो चुके हैं, कई फेस पैक बन चुके हैं. पर क्या कीजिए जब ये आत्मा, ये स्पिरिट, बूढ़ी होने लगे, जिंदगी जीने की आस खोने लगे, थकने लगे? क्या कोई स्पिरिट को रेज्युवेनेट करने का पैक बना है? जी बिल्कुल बना है. घुटन भरे इस माहौल में नेचर इज द बेस्ट हीलर. नेचर के करीब जाइये. सच्ची चीजों के करीब जाइये. बच्चों सी सच्ची स्पिरिट किसी की नहीं होती. इसीलिए आइये बचा लें अपने भीतर का बच्चा. हमारी परेशानी यही है कि हम जिंदगी भर खुश रहना चाहते हैं, बच्चे बने रहना चाहते हैं. लेकिन हमसे हमारी खुशी छीनकर हमें बड़ा बना दिया जाता है. हम पर रिस्पांसिबिलिटी का बोझ डाल दिया जाता है. हम सिर्फ पेट के अंदर तक ही नहीं मां से जुड़े रहते हैं, बल्कि बाहर भी हम हमेशा मां के साये में रहना चाहते हैं. हम जान-बूझकर अपना बपचन कहीं छुपा देते हैं. वो बचपन नहीं हम खुद को खुद से छुपा रहे होते हैं. मेरे एक दोस्त ने एक दिन मुझसे कहा कि मैं दुनिया की भीड़ में खुद को खोना नहीं चाहता. बड़ी अजीब लेकिन सच्ची बात थी कि इस आपाधापी में हम खुद को कब खो देते हैं हमें पता ही नहीं चलता. पर अनजाने में कल उस बच्चे की मुस्कुराहट ने मुझे खुद से मिला दिया. मेरे अंदर के बचपन को उसके बचपन ने खोज निकला. मैं एक बार फिर दिल खोलकर मुस्कुराया. आइये फिर ढूंढें बच्चा बनने का एक मौका, फिर से उस टूटी हुई और थकी हुई आत्मा को रीचार्ज करने मौका. खुद बच्चों के साथ एक बच्चा बन जाने का मौका..खो जाए उनकी खिलखिलाहट में उनकी मासूमियत में. एक बार डूबकर देखिये उनके साथ, उनकी दुनिया में. सच मानिए वापस आने का मन ही नहीं करेगा. आज घर के सारे बिस्तर को फैला दें, किसी पुराने तकिये को फाड़कर बिखरा दें..अपनी बाहें फैलाएं और फिर से बच्चे बन जाएं. तैयार हो जाएं सर झुकाकर किसी की डांट खाने को. आइये बढ़ायें हाथ अपने बचपन की ओर..और उसे संभाल लें प्यार से.

पाकिस्तान विफल देश बन सकता है

कुछ दिनों का मेहमान पाकिस्तान! NEW YORK (6 April, Agency): पाकिस्तान में बढ़ता टेररिज्म घातक रूप लेता जा रहा है. अगर यह इसी तरह चलता रहा तो पाकिस्तान अगले छह महीने के भीतर बिखर सकता है. यह आशंका गुरिल्ला युद्ध के एक सीनियर एक्सपर्ट ने जताई है. यह भयावह भविष्यवाणी शीर्ष अमेरिकी कमांडर जनरल डेविड एच पेट्रास के पूर्व सलाहकार डेविड किलकुलेन ने की है. विफल देश बन सकता है लास्ट वीक पेट्रास ने भी यही विचार व्यक्त किया था कि बढ़ते टेररिज्म के कारण पाकिस्तान विफल देश बन सकता है जो अल-कायदा और न्यूक्लियर वेपंस का गढ़ है. किलकुलेन का बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में टेररिस्ट अटैक्स बढ़ गए हैं और पाकिस्तान एवं वाशिंगटन में कुछ विश्लेषक भविष्यवाणी कर समय सीमा तय करने लगे हैं. भारत को दुश्मन न.1 मानते हैं न्यूयार्क टाइम्स ने प्रेसीडेंट ओबामा की पॉलिसी की सफलता पर संदेह जताया है जिसमें टेररिज्म को समाप्त करने के लिए पाक को भागीदार बनाया गया है. पाक भारत को अब भी दुश्मन नंबर एक मानते हैं. न्यूजपेपर ने लिखा है कि पाक सरकार ने अमेरिकी धन के कारण ओबामा की नीति का स्वागत किया है और पॉजिटिव चेंज बताकर इसे एप्रीसिएट किया है. इसने कहा कि ओबामा प्रशासन भले ही पाकिस्तानी लोगों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहा हो लेकिन जनता, पॉलिटिकल ग्रुप और आर्मी ने योजना को नकार दिया है. वह अल-कायदा और तालिबान को खतरा नहीं मानते जिसे वाशिंगटन साझा दुश्मन कहता है. आर्मी चीफ कियानी और प्रेसीडेंट जरदारी सहित कुछ लोग भले ही अमेरिका से सहमत हों लेकिन कम से कम आर्मी के लिए भारत ही बड़ी प्राथमिकता है. लड़ाई की बजाए समझौता हो टाइम्स ने कहा कि तेजी से बढ़ रहे इस्लामी चरमपंथ को हराने के लिए पाकिस्तान की प्राथमिकता में कैसे बदलाव लाया जाए इसके लिए ज्वाइंट चीफ आफ स्टाफ के अध्यक्ष माइक मुलेन और क्षेत्र के लिए विशेष दूत रिचर्ड हालब्रुक इसी हफ्ते पाकिस्तान जा रहे हैं. न्यूजपेपर ने कहा है कि हिंसा में बढ़ोतरी के बावजूद पाकिस्तानी लोगों का मानना है कि आतंकवादियों से लड़ाई के बजाए उनसे समझौता किया जाए. आर्मी के कुछ जवानों सहित कुछ लोग टेररिस्ट्स को अपना दुश्मन नहीं मानते हैं और उनके प्रति सहानुभूति रखते हैं.

3 more arrested in Satyam fraud

HYDERABAD (6 April, Agency):
सबसे बड़े कॉरपोरेट फ्रॉड में फंसी देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी सत्यम घोटाले के सिलसिले में तीन और लोगों को अरेस्ट किया गया है. घोटाले की जांच कर रही है सीबीआई ने बीती रात सत्यम के तीन इंप्लाइज को अरेस्ट किया है. इसमें सत्यम का एक टॉप एग्जीक्यूटिव भी शामिल है. सीबीआई के डीआईजी वी वी लक्ष्मी नरायण ने बताया कि जिन लोगों को अरेस्ट किया गया है उनमें वाइस प्रेसीडेंट (फाइनेंस), जी गोपालकृष्ण समेत फाइनेंस डिपार्टमेंट से ही दो और लोग डी वेंकटपति राजू और श्री साइलम शामिल हैं. डीआईजी ने बताया कि इन इंप्लाइज ने फ्रॉड का पूरा मकैनिज्म तैयार किया है. ये लोग फर्जी बैंक स्टेटमेंट्स और बाकी डॉक्यूमेंट्स तैयार करते थे. आईसीआईए की दो मेंबर्स वाली हाई-पावर्ड टीम जब कंपनी के फार्मर सीएफओ वादलामणि से पूछताछ कर रही थी तब वदलामणि ने गोपालकृष्णन के नाम का जिक्र किया था. इन तीन गिरफ्तारियों को मिलाकर सत्यम घोटाला मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. सीबीआई ने तीनों को सोमवार को स्पेशल कोर्ट में पेश किया. कोर्ट ने इन आरोपियों को 10 दिनों की ज्यूडिशल कस्टडी में चंचलगुडा जेल भेज दिया है. श्रीनिवास सत्यम घोटाले के आरोपी हैं और राजू ब्रदर्स फार्मर चेयरमैन बी रामलिंगा राजू व फार्मर एमडी बी रामाराजू के साथ हैदराबाद स्थित चंचलगुडा सेंट्रल जेल में बंद हैं. इनके अलावा कंपनी की आडिटर रही दिग्गज एकाउंटिंग फर्म प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) बर्खास्त इंप्लाइज एस. गोपालकृष्णन व ताल्लुरी श्रीनिवास भी जेल में हैं. आईसीएआई के चेयमरैन उत्तम कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय टीम ने आरोपी वी श्रीनिवास से रविवार को पूछताछ की थी. इसमें कंपनी के इस फार्मर सीएफओ ने राजू ब्रदर्स को घोटाले का सूत्रधार बताते हुए हरकदम पर दोनों का साथ देने की बात मानी थी. पूछताछ में उसने हेराफेरी में राजू ब्रदर्स का साथ देने वाले रामकृष्ण समेत तीन नामों का भी खुलासा किया था. इसके बाद सीबीआई ने इन आरोपियों को अरेस्ट कर लिया. आईसीएआई की टीम ने पीडब्ल्यूसी के दोनों बर्खास्त इंप्लाइज से भी पूछताछ की. आईसीएआई की जांच टीम को श्रीनिवास ने बताया कि राजू ब्रदर्स पिछले चार-पांच सालों से कंपनी के अकाउंट्स में हेराफेरी को अंजाम दे रहे थे. खुद रामलिंगा राजू ने 7 हजार 800 के इस फ्रॉड का खुलासा करते हुए 7 जनवरी को चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था.

11 डिजिट काहोगा मोबाइल नंबर

अब 11 डिजिट काहोगा मोबाइल नंबर!
NEW DELHI (4 April, Agency): डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकाम (डॉट) अब 11 डिजिट वाले मोबाइल नंबर पर विचार कर रहा है. ऑपरेटर्स के पास 10 डिजिट वाले मोबाइल नंबर की कमी पड़ जाने की संभावना को देखते हुए डॉट इस ऑप्शन पर विचार कर रहा है. डॉट के एक सीनियर ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि टेलीकाम सर्विस प्रोवाइडर्स और मोबाइल इस्तेमाल करने वालों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर नए नंबरों की जरूरत पड़गी. ऑफिसर ने बताया कि टेलीकाम इंजीनियरिंग सेंटर (डॉट की टेक्नीकल यूनिट) ने नए नंबर प्लान की सिफारिश की है. जिस पर अंतिम फैसले के लिए सरकार के पास भेज दिया गया है. बता दें कि डॉट साल 2003 में 30 साल के लिए नंबर प्लान लेकर आया था लेकिन मोबाइल सब्सक्राइबर्स की बढ़ती तादाद की वजह से इस पॉलिसी में बदलाव को मजबूर होना पड़ रहा है. ऑफिसर ने बताया कि इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है और अगले दो साल में लागू हो जाना चाहिए. टेलीकाम ऑपरेटर्स का कहना है कि नई पॉलिसी से कोई टेक्नीकल प्रॉब्लम नहीं आएगी. हर टेलीकाम ऑपरेटर को उसकी जरूरत के हिसाब से 6 महीने या एक साल के लिए मोबाइल नंबर की सीरीज दी जाती है. टेलीकाम ऑफिसर ने बताया कि चूंकि बदलाव सिर्फ सॉफ्टवेयर में होगा और इस वजह से अपग्रेडेशन में 1 महीने से ज्यादा टाइम नहीं लगेगा.

सीसीएस युनिवर्सिटी में टीचर्स की कमी

Continued from page 1 Wait till Vote

मार्च से 16 मई तक सात मई को 4आचार संहिता को लेकर अब तक कुल 67 नोटिस जारी 4नोटिस के बाद जवाब के साथ 91 हजार जुर्माना वसूला

नो इंटरव्यू सीसीएस यूनिवर्सिटी टीचर्स की कमी का सामना कर रही है. लॉ और इंजीनियरिंग जैसी ब्रांच में सारा काम विजिटिंग फैकल्टी के जिम्मे चल रहा है. समस्या से उबरने के लिए यूनिवर्सिटी ने अब प्रयास शुरू किए तो आचार संहिता आडे़ आ गई. इस कारण लॉ और इंजीनियरिंग ब्रांच में टीचर्स के इंटरव्यू नहीं हो पाए. जबकि यूनिवर्सिटी चुनाव की घोषणा से पहले ही प्रक्रिया शुरू कर चुकी थी. प्रशासन की सक्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि ईसी की बैठक में कैंपस के कुछ टीचर्स को प्रमोशन दिए जाने की चर्चा उड़ी तो इसी बात पर प्रशासन ने यूनिवर्सिटी को आचार संहिता का हवाला देते हुए खबरदार कर दिया. इसके बाद यूनिवर्सिटी को अपने सारे कदम वापस खींचने पडे़. 24 हजार अटके अब बात बेसिक स्कूलों की. प्रदेश में इस समय 50 हजार बेसिक टीचर्स की भर्ती प्रक्रिया चल रही है. जनवरी में फार्म भरे गए. अब मार्च तक सभी डायट को मेरिट लिस्ट जारी कर मई तक ट्रेनिंग भी शुरू करनी थी. इस बीच चुनाव की घोषणा हो गई. इसलिए मेरिट लिस्ट अब मई अंत तक ही जारी हो पाएगी. इसी के साथ मेरठ डायट को प्राप्त 24,352 आवेदन अगले दो महीने के लिए ठंडे बस्ते में चले गए हैं. डायट प्रिंसिपल रमेश शर्मा मेरिट जारी नहीं कर पाने के लिए आचार संहिता की मजबूरी बयां कर रही हैं. यही नहीं प्राइमरी स्कूलों में शिक्षामित्रों की नियुक्ति भी इस चुनावी चपेट में आ गई है. इस वक्त जिले में शिक्षामित्रों के करीब 50 पद खाली हैं. इनके लिए मार्च में आवेदन मांगे जाने थे, उम्मीद थी कि मई-जून में ट्रेनिंग होने के बाद जुलाई में नया सत्र खुलने के साथ ही बंद पडे़ स्कूलों को टीचर्स नसीब हो पाएंगे. अब यह काम अक्टूबर से पहले होना संभव नहीं है. आचार संहिता का अंधेरा आचार संहिता दरअसल निकम्मेपन के लिए ढाल बनती जा रही है. इसकी मिसाल नगर निगम है. निगम में पहले ही 14 हजार स्ट्रीट लाइटों की कमी है. इस बीच निगम ने नई स्ट्रीट लाइट लगाना बंद कर दिया है. यहां के बाबुओं को डर है कि एक अदद स्ट्रीट लाइट चुनाव की भावना के खिलाफ होगी. अब यहां के बाबू रोजमर्रा के काम में भी आचार संहिता की आड़ ले रहे हैं, मसलन जन्म प्रमाण पत्र, पानी के नए कनेक्शन की फाइल आगे बढ़ाने में बाबुओं को आचार संहिता का डर सता रहा है. पावरलेस चुनाव पावर के लिए ही तो लड़ा जाता है. पर इस पावर गेम से पहले जनता को पावरलेस जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. पावर कार्पोरेशन अब नए कनेक्शन नहीं दे रहा है, क्योंकि विभाग के पास नए मीटर नहीं हैं. नए मीटर की खरीद चूंकि आचार संहिता का उल्लंघन माना जा सकता है, इसलिए विभाग ने हाथ बांध लिए हैं. बिना बिजली के आपकी गर्मी कैसे बीतेगी यह विभाग की चिंता नहीं है. नौचंदी पर नखरे चुनाव आचार संहिता को लेकर प्रशासन किस कदर लकीर पीट रहा है, इस बात का अंदाजा नौचंदी मेले को लेकर प्रशासन द्वारा किए जा रहे नखरों से जाहिर हो जाता है. उद्घाटन के दिन प्रशासन अंतिम समय तक कन्फ्यूज रहा. फिर लोकलाज के डर से उद्घाटन हुआ भी तो अब रोज-रोज के कार्यक्रमों में भी नोटिस जारी हो रहे हैं. इस समय सबका ध्यान चुनाव पर है. कोड ऑफ कंडक्ट का सख्ती से पालन कराया जा रहा है. हमारी कोशिश है कि पब्लिक के काम किसी तरह बाधित न हों. डीएम एवं जिला निर्वाचन अधिकारी

ऑनलाइन लव में टॉप पर इंडियंस

NEW DELHI (1 April, Agency): बात ऑनलाइन फ्रेंडशिप की हो या ऑनलाइन लव की, इंटरनेट के इंडियन यूजर्स अमेरिका और जापान से भी आगे हैं. यह बात सामने आई दुनिया भर में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले एक फ्रेश सर्वे से. इंटरनेट सिक्योरिटी फर्म साइमनटेक ने अपनी रिपोर्ट द नॉर्टन ऑनलाइन लिविंग में 12 देशों के 9000 एडल्ट और बच्चों पर सर्वे किया. इन देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, जापान, ब्राजील और भारत भी शामिल है. सर्वे में टॉप पर इंडियंस.

Saturday, April 18, 2009

FLYING CAR

FLYING CAR

LONDON (3 Nov, Agency): अगर आटोमोबाइल इंजीनियरों की बातों पर भरोसा करें तो वह दिन दूर नहीं जब फ्लाइंग कार यानी उड़ने वाली कार हकीकत की दुनिया में शामिल हो जाएगी.
मौलर इंटरनेशनल में एक टीम फ्लाइंग कार डेवलप करने के लिए काम कर रही है. इसे आटोवोलेन्टर नाम दिया गया है. यह फरारी 599 जीटीबी मॉडल पर आधारित होगी और टीम का दावा है कि यह अगले दो साल में बाजार में आ जाएगी.
आटोवोलेन्टर के जमीन पर 100 मील प्रति घंटा की स्पीड से दूरी तय करने की संभावना है. हवा में इसकी स्पीड 150 मील प्रति घंटा होगी. टीम के अनुसार आटोवोलेन्टर को इस प्रकार डिजायन किया जा रहा है कि वह आसानी से उड़ान भर सके. हवा में इसकी रेंज 75 मील और जमीन पर 150 मील रहने की संभावना है. चीफ डिजायनर ब्रूस काकिन्स ने कहा कि फ्लाइंग कार में हाइब्रिड इंजन होगा. इसके इंजन की क्षमता करीब 800 हार्स पॉवर होगी. यह पांच हजार फुट की ऊंचाई तक उड़ सकेगी. डेली टेलीग्राफ में पब्लिश एक रिपोर्ट के अनुसार फ्लाइंग कार में आठ पंखे लगे होंगे और हवा में यह हेलीकॉप्टर के समान काम कर सकेगी. कंपनी मौलर इंटरनेशनल ने फरारी के आकार के कारण इसका चयन किया. कंपनी के अनुसार फरारी 599 जीटीबी का आकार वैसा ही है जैसी हमारी जरूरत थी. इसके इस्तेमाल से परीक्षण में सहूलियत हुई. इसके अलावा इस मॉडल से परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता स्थापित करने में भी मदद मिली. काकिन्स के अनुसार शुरू में इस मॉडल को लेकर कुछ आशंकाएं थीं लेकिन जल्दी ही सभी संदेह दूर हो गए. इस कार की कीमत करीब पांच लाख पौंड रहने की संभावना है.

FLYING CAR

"FUTURE" "FLYING" "CAR"

LONDON (3 Nov, Agency): अगर आटोमोबाइल इंजीनियरों की बातों पर भरोसा करें तो वह दिन दूर नहीं जब फ्लाइंग कार यानी उड़ने वाली कार हकीकत की दुनिया में शामिल हो जाएगी.
मौलर इंटरनेशनल में एक टीम फ्लाइंग कार डेवलप करने के लिए काम कर रही है. इसे आटोवोलेन्टर नाम दिया गया है. यह फरारी 599 जीटीबी मॉडल पर आधारित होगी और टीम का दावा है कि यह अगले दो साल में बाजार में आ जाएगी.
आटोवोलेन्टर के जमीन पर 100 मील प्रति घंटा की स्पीड से दूरी तय करने की संभावना है. हवा में इसकी स्पीड 150 मील प्रति घंटा होगी. टीम के अनुसार आटोवोलेन्टर को इस प्रकार डिजायन किया जा रहा है कि वह आसानी से उड़ान भर सके. हवा में इसकी रेंज 75 मील और जमीन पर 150 मील रहने की संभावना है. चीफ डिजायनर ब्रूस काकिन्स ने कहा कि फ्लाइंग कार में हाइब्रिड इंजन होगा. इसके इंजन की क्षमता करीब 800 हार्स पॉवर होगी. यह पांच हजार फुट की ऊंचाई तक उड़ सकेगी. डेली टेलीग्राफ में पब्लिश एक रिपोर्ट के अनुसार फ्लाइंग कार में आठ पंखे लगे होंगे और हवा में यह हेलीकॉप्टर के समान काम कर सकेगी. कंपनी मौलर इंटरनेशनल ने फरारी के आकार के कारण इसका चयन किया. कंपनी के अनुसार फरारी 599 जीटीबी का आकार वैसा ही है जैसी हमारी जरूरत थी. इसके इस्तेमाल से परीक्षण में सहूलियत हुई. इसके अलावा इस मॉडल से परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता स्थापित करने में भी मदद मिली. काकिन्स के अनुसार शुरू में इस मॉडल को लेकर कुछ आशंकाएं थीं लेकिन जल्दी ही सभी संदेह दूर हो गए. इस कार की कीमत करीब पांच लाख पौंड रहने की संभावना है.