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Saturday, July 31, 2010

शहर की हर गली में मिलेगी डिंपी

KANPUR NEWS 30 July : सात फेरों के साथ राहुल महाजन और डिंपी ने जीवन भर साथ निभाने की कसमें खाई थी. उनकी ये कसमें चार महीनें में ही तार-तार हो गईं. राहुल महाजन ने डिंपी की इतनी पिटाई की कि वो घर छोड़ने को मजबूर हो गई. हालांकि वह फिर लौट आई. यह तो थी डिंपी की बात, लेकिन शहर में डिंपी जैसी कई लड़कियां हैं. इन लड़कियों ने घर छोड़ा नहीं बल्कि इन्हें घर से निकाल दिया गया या इतना मजबूर कर दिया गया कि वो घर छोड़ने को मजबूर हो गई.
वो मेरे स्टैंडर्ड की नहीं.
रतनलाल नगर के शोभराज केसवानी ने अपनी बेटी सारिका की शादी 13 दिसम्बर 2004 में बनारस के भरत छाबड़ा से की थी. बनारस में एकाउंट्स का काम करने वाले भरत ने शादी की पहली रात को ही सारिका की पिटाई की. इसके बाद भरत के लिए सारिका को पीटना रोज की बात हो गई. शादी के छह महीने भी नहीं बीते की भरत ने एक रात सारिका को मारपीटकर घर से निकाल दिया. उस समय सारिका के पास एक फूटी कौड़ी तक नहीं थी जिससे वो अपने घर वापस आ सकती या घर वालों को सूचना दे पाती.
रात में सड़क पर कराहती सारिका को देखकर भरत के कुछ पड़ोसी उसे घर तक छोड़ गए. सारिका के घर वालों ने कई बार भरत के घर वालों से बात करनी चाही पर वो बात करने को राजी नहीं हुए. उन्होंने डोमेस्टिक वॉइलेंस का मामला दर्ज कराया. सारिका अपनी ससुराल जाना चाहती है पर भरत का कहना है कि सारिका उसके और अपनी फैमली के स्टैंडर्ड की नहीं है. उसके घर के माली हालत इतनी अच्छी नहीं. पिता कब तक उसे रख सकेंगे. इसलिए वो कोर्ट में हर बार भरत से चीख-चीखकर घर ले जाने को कहती है.
शादी के चार साल बाद रंग बदला
किदवई नगर की मीनू की शादी चार साल पहले लखनऊ के आशीष से हुई थी. आशीष उस समय कम्पटीटिव एग्जाम्स की तैयारी कर रहा था. शादी के बाद उसका सलेक्शन आईआरएस में हो गया. ऑफीसर की पोस्ट मिलते ही आशीष ने अपना रंग बदला और मीनू को प्रताड़ित करना शुरु कर दिया. मीनू को प्रेगनेंट हुए दो महीने हुए थे. आशीष ने मीनू के पेट में इतनी जोर से लात मारी की उसका मिसकैरेज हो गया. मीनू की हालत बिगड़ते देख आशीष उसे जयपुर के एक हॉस्पिटल में एडमिट कराकर चला गया. दो दिनों बाद जब मीनू की हालत में सुधार हुआ तो उसने अपने घरवालों को सूचना दी. उसके पिता उसे लेकर घर आ गए. मीनू के पिता ने आशीष के खिलाफ मामला दर्ज कराया. लेकिन आजतक कुछ नहीं हो पाया. मीनू कहती है कि आशीष की तरफ से उसके घरवालों को आए दिन धमकियां मिलती है. वो चाहती है कि आशीष उसे अपना ले क्योंकि उसके मम्मी पापा के बाद वो दुनिया में अकेली हो जाएगी. पर आशीष उसे अपनाना नहीं चाहता. मीनू का आरोप है कि आशीष ने दूसरी शादी भी कर ली है.
ग्यारह साल तक टॉर्चर
शास्त्री नगर की सुमन की शादी रामबाबू से 12 साल पहले हुई थी. रामबाबू ने शादी के बाद से ही सुमन को पीटना शुरु कर दिया. रोज रात में रामबाबू शराब पीकर आता और सुमन को पीटता. यह सिलसिला रोज चलता रहा. इस दौरान उसे दो बेटे शिवम और शुभम हुए. बेटे एक-एक बूंद दूध के लिए रोते तो उससे देखा नहीं गया. उसने दूसरों के घरों में चौका-बर्तन शुरु किया. रामबाबू की प्रताड़ना कम नहीं हुई सुमन जब भी घरों में काम करके लौटती तो उसे सड़क पर ही पीटना शुरु कर देता. इसके बाद सुमन दोनों बेटों को लेकर मौसी के घर चली आई.
दर्ज हुआ मुकदमा
सुमन को स्वीपर की नौकरी मिल गई इस पर रामबाबू ने उसे इज्जत का हवाला देते हुए जमकर पीटा. इस बार सुमन ने उसके खिलाफ डोमेस्टिक वॉइलेंस का मुकदमा दर्ज करा दिया. पिछले आठ दिनों से सुमन का बीमार है. वह कई लोगों से उधार ले चुकी है. उसे लगता है कि उसके जीवन में सिर्फ संघर्ष ही लिखा है.

Underage driving का license है ?

Nupur Jaiswal : - स्टूडेंट्स पर स्कूल के बनाए रूल्स से कोई फर्क नहीं पड़ता. स्कूल में भले ही बाइक न लाने के इंस्ट्रक्शंस दिए जाते हों, वो करते अपनी मर्जी हैं. क्लास 8 में आते ही स्कूटी व 9 क्लास में स्पोर्ट्स लुक वाली बाइक्सस्टूडेंट्स का पैशन है.
कुछ ऐसा था हाल  Read Below More
स्कूल ओवर होते ही वहां का हाल कुछ और ही था. बाइक से एक नहीं बल्कि तीन-तीन स्टूडेंट्स राउंड लगा रहे थे, स्टंट भी कर रहे थे. कुछ बाइक में नंबर ही नहीं था.

क्या नाम है?
स्टूडेंट : हुजैफा
कौन सी क्लास में पढ़ते हो,क्या ऐज है?
स्टूडेंट-नाइंथ में पढ़ते हैं, ऐज 16 साल है.
 कब से बाइक ला रहे हो. स्कूल में चेकिंग नहीं होती, क्या तुम्हारे पास लाइसेंस है?
स्टूडेंट- लाइसेंस नहीं है. स्कूल में चेकिंग नही होती लेकिन कभी-कभी न लाने के इंस्ट्रक्शंस दिए जाते हैं. पिछले एक साल से बाइक ला रहे हैं.


क्या नाम है. कौन सी क्लास में पढ़ते हो?
स्टूडेंट- गोपाल माहेश्वरी, क्लास नाइंथ में पढ़ता हूं.
कितने साल से बाइक ला रहे हो?
स्टूडेंट- पिछले दो साल से बाइक ला रहे है.
स्कूल में चेकिंग होती है?
स्टूडेंट- कभी नहीं हुई, बाइक गेट के बाहर खड़ी होती है.


क्या नाम है. कौन सी क्लास में हो?
स्टूडेंट- अब्दुल्लाह नाम है. क्लास 8 में है.
अभी तो तुम्हारा लाइसेंस भी नहीं है, फिर कैसे बाइक ला रहे हो,ये क्या बाइक में नंबर भी नहीं है.
स्टूडेंट- मैं पिछले एक साल से बाइक ला रहा हूं. आज तक किसी ने नहीं रोका. लाइसेंस की क्या जरूरत. अब तो सभी चलाते है.

क्या नाम है. कौन सी क्लास में हो?
स्टूडेंट- जैद नाम है. क्लास टेंथ में पढ़ रहा हूं.
बाइक स्कूल में अंदर खड़ी करते हो या बाहर?
स्टूडेंट- चेकिंग होती है. लाइसेंस की जरूरत नहीं पड़ती. इसलिए गेट के बाहर ही खड़ी करते है. उसके लिए मना नहीं है.

क्या नाम है. कौन से वेहिकल से आते हो, स्कूल में लाइसेंस चेक होता है?
स्टूडेंट- प्रशांत भट्ट. बाइक से आते हैं. चेकिंग होती है.
च्छा लाइसेंस है, दिखाओ?
स्टूडेंट- हां, लाइसेंस है. लेकिन अभी लर्निग है इसको रिन्यू कराना है.

क्या नाम है. कौन सी क्लास में हो?
स्टूडेंट- पुलकित, क्लास 12 में है.
लाइसेंस है, तुम्हारी ऐज क्या है?
स्टूडेंट- 17 साल का हूं, मेरे पास फिलहाल लर्निग लाइसेंस ही है.
18 साल से पहले लाइसेंस कैसे
स्टूडेंट- लर्निग तो बन सकता है न.


Parests Should Ensure Rules Are Followed

सिटी में रूल्स की कोई वैल्यू नहीं है. सड़कों पर फरार्टा लगाते बाइक सवारों को देखकर तो यही कहा जा सकता है. वैसे कई टीन एजर्स ऐसे भी हैं जो बहुत सेफली ड्राइव करते हैं, लेकिन फिर भी हादसे होते हैं. ऐसे हादसों में कई बार उनकी जान तक चली जाती है. सिर्फ बाइक व कार ड्राइव करने वालों के साथ ही हादसे नहीं होते साइकिल से जाने वालों को भी भयानक हादसों का शिकार होना पड़ जाता है. सबसे पहले जरूरी है यहां के ट्रैफिक को कंट्रोल करना, किसी तरह की कोई स्पीड लिमिट न होने के चलते सभी अपनी रफ्तार से ड्राइव करते हैं. एक बाइक पर तीन-तीन लोग सवार होकर ट्रैवेल करते हैं, लेकिन उनको कोई नहीं रोकता यहां तक पुलिस भी नजर अंदाज कर देती है. कई बार चौराहों से ही पुलिस नदारत रहती है जिससे अक्सर ट्रैफिक जाम लग जाता है. ऐसे में कई बार मारपीट तक होने लगती है. अगर स्ट्रिक्ट रूल बन जाए और उसको फॉलो करना अनिवार्य कर दिया जाए तो कुछ हद तक यहां के हालात में सुधार हो सकता है. वहीं स्कूल में बाइक लेकर आने वाले स्टूडेंट्स पर स्कूल से ज्यादा पैरेंट्स को सख्ती करनी होगी. स्टूडेंट्स को भी समझना होगा कि तेज ड्राइव करना व रेस लगाने से उन्हीं की जान को खतरा है. अपनी सेफ्टी के लिए यही बेहतर है कि खुद ही अलर्ट हो जाए.

KESCO ने बनाया नया record

गर्मी व बारिश से निपटने के लिए केस्को की तैयारी की पोल खुल गई है. केवल जुलाई महीने में ही दो सौ ट्रांसफॉर्मर फुंक गए. केस्को की हिस्ट्री में कभी भी दो सौ ट्रांसफॉर्मर नहीं फुंके हैं. इतने अधिक ट्रांसफॉर्मर फुंकने से केस्को ऑफिसर्स के माथे पर चिंता की लकीरें उभरी हैं.
अब भगवान से प्रार्थना करो
ईश्वर से शुक्र मनाइए कि आपके इलाके का ट्रांसफॉर्मर अब डैमेज न हो. अगर ऐसा हुआ तो बिजली के साथ ड्रिकिंग वाटर क्राइसिस भी झेलनी पड़ेगी, क्योंकि केस्को के स्टॉक में ट्रांसफॉर्मर निल हो चुके हैं. सबसे अधिक डिमांड वाले 400 केवी के ट्रांसफॉर्मर भी गिनती के ही बचे हैं. जिस स्पीड में ट्रांसफॉर्मर्स का जलना जारी है, वह जबरदस्त बिजली संकट का साफ इशारा कर रहे हैं. केस्को के चीफ इंजीनियर केशवराम ने बताया कि डैमेज ट्रांसफॉर्मर के रिपेयर में तेजी लाई गई है. बारिश के कारण संख्या बढ़ी है. बावजूद इसके 24 घंटे के भीतर ट्रांसफॉर्मर बदले जा रहे हैं.

ATM में लगी आग, लाखों के नोट खाक

थर्सडे मिड नाइट गुमटी नंबर पांच में एक बैंक एटीएम से अचानक आग की लपटें उठने लगी. लपटों मे घिरा एटीएम पूरी तरह जलकर खाक हो गया और उसने रखी लाखों की रकम भी जल गई. आग लगने की वजह शार्ट-सर्किट से बतायी जा रही है.
अचानक उठीं लपटे
नजीराबाद के गुमटी नंबर पांच एरिया में बैंक आफ बड़ौदा के शाखा परिसर के एक एटीएम मशीन से थर्सडे रात दो बजे अचानक धुंआ निकलने लगा. अंदर सो रहे सेक्योरिटी गार्ड छेदीलाल के होश फाख्ता हो गए और उसने शोर मचाना शुरू कर दिया. लोग कुछ समझ पाते तबतक भीषण आग की लपटे उठने लगी और एटीएम मशीन राख हो गया. हादसे के वक्त एटीएम मशीन खाली था आग की लपटे थोड़ी दूरी पर मौजूद एक रेडीमेड शो रूम तक जा पहुंची. भीषण आग में शोरूम की एसी ने भी आग पकड़ ली. आधी रात मौके पर पहुंचे फायर आफिसर्स ने शार्ट-सर्किट की वजह से आग लगने की बात कही है. सूत्रों के मुताबिक एटीएम में तीन लाख से भी ज्यादा का कैश था. नकदी का कितना नुकसान हुआ इस बारे में बैंक प्रबंधन अभी नहीं बता पा रहा है. बैंक अधिकारियों का कहना हैं कि एटीएम मशीन काटने वाले लोग आ जाएंगे और उसे काटा जाएगा, तभी नुकसान हुई नगदी का सही आकलन लग पाएगा.

Thursday, July 15, 2010

राजनीति की नई स्टाइल

अपने प्रचार के लिए राजनेता क्या-क्या हथकंडे नहीं अपनाते. फिर चाहे वे महिला हों या पुरुष, लेकिन चेक गणराज्य में ऐसा कुछ हुआ है, जो अब तक कहीं नहीं देखा गया. यहां महिला सांसदों ने देश की राजनीति पर दबदबा दिखाने के लिए 2011 के कैलेंडर पर अपनी ग्लैमरस तस्वीरें छपवाई हैं. इस कैलेंडर में पब्लिक अफेयर्स पार्टी की चार महिला सांसदों की कम कपड़ों में उत्तेजक तस्वीरें छपी हैं. इन कैलेंडरों को बेचकर मिलने वाली रकम का इस्तेमाल चैरिटी के लिए किया जाएगा. वर्तमान में चेक संसद में महिला सांसदों की संख्या पिछले सभी चुनावों के मुकाबले सबसे ज्यादा है. इन सभी महिलाओं ने कम से कम दो फोटो खिंचवाए हैं. इन्हीं में से एक महिला सांसद लेंका एंड्रसोवा ने कहा कि हमने लोगों को आकर्षित करने के लिए ऐसा किया है. हम लोगों को बता देना चाहती हैं कि राजनीति में महिलाओं का दौर फिर से आ चुका है.
चेक संसद के निचले सदन की डिप्टी स्पीकर 32 वर्षीया कैट्रीना क्लासनोवा ने बैड पर सेक्सी तस्वीर खिंचवाई है. पब्लिक अफेयर पार्टी की 42 वर्षीया सांसद मार्केटा रीडोवा ने कहा कि राजनीति में महिलाओं का वर्चस्व बढ़ रहा है. लोगों को यह बताने में भी क्या बुराई है कि हमें सेक्सी दिखने में भी कोई डर नहीं लगता.

जब चाहें, सिलेंडर पाएं

अब आपको गैस सिलेंडर पाने के लिए इंतजार करने की जरुरत नहीं होगी. क्योकि पेट्रोलियम मिनिस्ट्री एक नई स्कीम शुरू करने जा रहा है जिसके तहत आपके बताए दिन और समय पर सिलेंडर की डिलीवरी होगी. फिलहाल इस सेवा की शुरुआत दिल्ली मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद और बंगलुरू में की जा रही है. अगले चरण में इस सेवा का विस्तार 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में किया जाएगा.
लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज
यह फ्री सर्विस नहीं है. इसके लिए टाइम भी फिक्स है अगर आप सुबह 8 बजे से लेकर 6 बजे के बीच अपने सिलेंडर की डिलीवरी चाहते हैं तो आपको 25 रुपए ज्यादा देने होंगे लेकिन अगर आप सुबह आठ से पहले या शाम के छह बजे के बाद सिलेंडर की डिलीवरी चाहते हैं तो आपको 50 रुपए ज्यादा देने होंगे. साथ ही अगर सिलेडंर की डिलीवरी तय समय पर नहीं होती तो कंपनी आपको 20 रुपये का की छूट भी देगी.
टाइम और डेट भी आपका
पहले सिलेंडर बुक कराने के दो या तीन दिन बाद डिलीवरी होती थी जिसके कारण उपभोक्ताओ को परेशानी का सामना करना होता था. कई बार सिलेंडर बुक कराने के डिलीवरी के समय उपभोक्ता घर पर नहीं होता था जिसके कारण सिलेंडर वापिस चला जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. आप सिलेंडर बुक कराते समय कंपनी के एजेंट को सिलेंडर डिलीवरी की डेट और टाइम बता कर डिलीवरी ले सकते है.

जंक फूड जेनरेशन

ब्रिटेन पहले ही वहां पर बच्चों में बढ़ते मोटापे से परेशान है. यहां पर 5 से 13 साल का हर तीसरा बच्चा मोटापे से परेशान है. इस बीच एक रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि यहां पर हर साल एक बच्चा भारी मात्रा में जंक फूड कंज्यूम करता है. इसको देखते हुए अगर इस जेनरेशन को जंक फूड जेनरेशन कहा जाए तो कोई भी अतिशयोक्ति नहीं होगी. हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि इस रिपोर्ट के बावजूद गवर्नमेंट उस वॉचडॉग को हटाने जा रही है जो पिछले एक दशक से जंक फूड कंपनीज को रेगुलेट करने का काम कर रही थी. 2000 में जब यह खबर आई थी कि बड़ी संख्या में लोग फूड बॉर्न डिजीज की वजह से मर गए.

उधर कुछ दिन पहले ही डॉक्टर्स ने कहा था कि इन फूड्स पर फैट टैक्स लगा देना चाहिए और पैकेट्स पर सिगरेट स्टाइल में वॉर्निग भी चस्पा होनी चाहिए कि किस फूड का ज्यादा सेवन नुकसान देह हो सकता है. बगल में दिए गए टेबल में दिखाया गया है बच्चे किस रूप में कितना जंक फूड खा रहे हैं.

खून नहीं पीता था ड्रैकुला

पश्चिमी जगत में सदियों से ड्रैकुला लोगों की जिज्ञासा का विषय रहा है. खून के प्यासे इस दरिंदे पर न जाने कितनी कहानियां, कितने किस्से गढ़े गए. उपन्यासों से लेकर फिल्मों तक, ड्रैकुला का डर लोगों को रोमांचित करता रहा. लगभग पांच पीढि़यां, तो ड्रैकुला की कहानियां सुनकर ही बड़ी हुई हैं. सिलसिला बदस्तूर जारी है. बच्चों को आज भी ड्रैकुला की कहानियां सुनाई जाती हैं. वह आज भी उपन्यासों और फिल्मों में अमर बना हुआ है. क्या है ड्रैकुला की सच्चाई?
ऑस्ट्रिया में लगी एक प्रदर्शनी ने इस रहस्य पर से पर्दा उठाने की कोशिश की है. इस प्रदर्शनी में वह सारे प्रमाण मौजूद हैं, जो ड्रैकुला के इतिहास को बयां करते हैं. ड्रैकुला पर केंद्रित इस विशेष प्रदर्शनी के आयोजक माग्रेट रॉक बताते हैं कि यह यह किस्सा 15वीं सदी से शुरू हुआ. 1456 से 1462 के मध्य वलीशिया (रोमानिया) में व्लाद तेपेस नाम का एक युवा शासक था, जो अपने विरोधियों के लिए बेहद क्रूर था. उसने लगभग 50 हजार लोगों को बुरी तरह मौत के घाट उतारा था. बस, यहीं से उसे लोगों ने व्लाद द इम्पेलर और व्लाद ड्रैकुला कहना शुरू कर दिया. इसके बाद वह खून के प्यासे दरिंदे के रूप में भय का पर्याय बना दिया गया. रॉक कहते हैं कि व्लाद अपने विरोधियों को बहुत बुरी मौत देता था, लेकिन वह खून नहीं पीता था. वह सभी के लिए क्रूर भी नहीं था. उसकी प्रजा उसे हीरो मानती थी.

रॉक का मानना है कि कुछ यूरोपीय इतिहासकारों ने जानबूझकर या अनजाने में व्लाद को खून पीने वाला दरिंदा घोषित कर दिया और यह किस्सा सदियों के लिए अमर हो गया. आधुनिक जगत में सन 1897 में ड्रैकुला पर पहला उपन्यास लिखा गया. ब्राम स्टोकर के इस उपन्यास का शीर्षक ही ड्रैकुला था. इसके बाद न जाने कितने उपन्यास और कितनी ही फिल्में अब तक इस किरदार को जीवंत बनाए हुए हैं.

Tuesday, July 13, 2010

Save tigers before it’s too late

अगर हम यूं ही अनदेखी करते रहे, तो एक दिन आएगा जब धरती पर बाघ का नामोनिशान तक नहीं बचेगा. इंडोनेशियन फॉरेस्ट्री मिनिस्ट्री द्वारा रविवार को जारी की गई रिपोर्ट में सामने आया है कि पूरे व‌र्ल्ड में अब केवल 3200 बाघ ही बचे हैं.
बचीं छह प्रजातियां
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में बाघों की मात्र छह प्रजातियां बची हैं. सुमात्राई, बंगाल टाइगर, अमूरसी, इंडो-चाइनीज, दक्षिणी चीनी और मलेशियाई. यह रिपोर्ट सोमवार को यहां बाघ बचाओ अभियान के लिए सोमवार को हुई 13 देशों के सदस्यों की बैठक से एक दिन पहले जारी की गई.
तस्करी बनी अभिशाप
रिपोर्ट के अनुसार, बाघों के प्राकृतिक आवास नष्ट होने के कारण उनकी संख्या तेजी से घट रही है. गैर कानूनी तौर पर इनका शिकार और तस्करी भी किसी अभिशाप से कम नही है. लोग बाघों के रहने के स्थान जंगलों को उजाड़कर अपने रहने के ठिकाने बना रहे हैं. बाली में हुई बैठक का उद्घाटन इंडोनेशिया के वन मंत्री जुल्फिकार हसन ने किया. इस मुद्दे पर अगली बैठक इस साल सितंबर के महीने में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में 15 से 18 तारीख तक आयोजित होगी.

Demat matters a lot

What is Demat account
डीमैट अकाउंट को डीमैटरीयलाइज्ड अकाउंट कहते हैं. किसी भी इंडियन सिटिजन को सेबी में लिस्टेड स्टॉक्स के ट्रेडिंग के लिए डीमैट अकाउंट मेनटेन करना आवश्यक होता है. डीमैट अकाउंट में शेयर्स और सिक्यूरिटीज इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में रहते हैं. ट्रेडिंग के लिए ब्रोकर के पास रजिस्ट्रेशन के समय यह अकाउंट खोलना पड़ता है. इसके लिए पैन कार्ड होना जरूरी है, साथ में एक इंटरनेट पासवर्ड और ट्रांजैक्शन पासवर्ड होना चाहिए. एक बार ट्रांजैक्शन कंप्लीट होने के बाद शेयर्स की परचेजिंग और सेल अपने आप अकाउंट में मेनटेन होती रहती है.
How to open
आप डीमैट अकाउंट किसी बैंक, ब्रोकर्स और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन में ओपन कर सकते हैं. अगर बैंक में आपका सेविंग अकाउंट है तो डीमैट अकाउंट ओपन करने के लिए बैंक अट्रैक्टिव रेट ऑफर करते हैं. अगर आप स्टॉक्स की ट्रेडिंग ऑनलाइन करना चाहते हैं तो आपको एक डीपी और ट्रेडिंग अकाउंट उस ब्रोकर या फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट के पास खोलना होता है.
Who is DP
डीपी इनवेस्टर्स और डिपॉजिटरी के बीच मीडिएटर की तरह काम करता है. डीपी एक रेगुलर इंटरवल में आपको कई तरह की फैसिलिटी देते हैं. जैसे-आपके अकाउंट में कितने शेयर्स बैलेंस हैं, ट्राजैक्शंस, स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेड का इलेक्ट्रॉनिक सेटलमेंट और बैंक लोन के लिए शेयर्स गिरवी रखना. इसके लिए डीपी को मेंटिनेंस चार्ज देना पड़ता है.
Benefit to company
डीपॉजिटरी सिस्टम से न्यू इश्यूज की कॉस्ट कम की जा सकती है. इससे रजिस्ट्रार, ट्रांसफर एजेंट्स और कंपनी के सेक्रेटेरियल डिपॉर्टमेंट की इफिसियेंसी तेज होती है. यह कम्यूनिकेशन की बेटर फैसिलिटी प्रोवाइड करता है और शेयर होल्डर्स या इनवेस्टर्स को टाइमली सर्विस प्रोवाइड कराता है.
Benefit to investor
डिपॉजिटरी सिस्टम से फिजिकल सर्टिफिकेट लेने में आने वाला रिस्क कम होता है, जैसे-चोरी, फोर्जरी या डॉक्यूमेंट्स का फट जाना. यह ट्रांसफर सेटलमेंट को आसान बनाता है और रजिस्ट्रेशन में होने वाला डिले कम होता है. शेयर्स के सेल होने पर इससे हमें पेमेंट टाइमली मिल जाता है. इसके कारण शेयर ट्रांसफर पर स्टांप ड्यूटी भी नहीं देनी होती है. जो जनरल केस में 0.5 परसेंट है.
Benefit to brokers
ट्रेडिंग वॉल्यूम बढ़ने पर ब्रोकर्स को ज्यादा प्रॉफिट होता है. इससे फॉर्जरी के चांस कम होते हैं व ट्रेड और प्रॉफिट दोनों ही बढ़ते हैं. ट्रेडिंग और इनकम वॉल्यूम में जितनी बढत होती है उसमें उतना ही ज्यादा लाभ ब्रोकर्स को होता है.

How do you respond?

कुछ लोग मुस्कुराते हुए आप से कांफिडेंटली मिलते हैं वहीं कुछ लोग अपनी खुद की बनाई परेशानियों में उलझे और दूसरों पर गुस्सा करते दिख जाते हैं. दरअसल इन दोनों तरह के लोगों के सामने सिचुएशन एक जैसी ही होती है लेकिन उनका रिएक्शन डिफरेंट होता है. अपने रिएक्शन के साथ ही ये तय कर लेते हैं कि आज का दिन उनके लिए सक्सेसफुल होने वाला है या स्ट्रेसफुल. आइए इसे एक एग्जाम्पल के जरिए समझते हैं. आप ऑफिस जाते हैं और आपका एक को-वर्कर आपको घूरता है और आपके गुड मॉर्निग का जवाब भी नहीं देता है. आप किस तरह रिस्पांड करेंगे?

क्या आपके दिमाग में कुछ ऐसे सवाल आ रहे हैं.....
4मैंने उसके साथ क्या गलत किया है?
4उसकी परेशानियों के लिए मैं ही जिम्मेदार हूं क्या? मेरे ही साथ उसने ऐसा बिहेव क्यों किया?
4वह मुझे पसंद क्यों नहीं करता? यहां मुझे कोई पसंद नहीं करता.
4ठीक है, मैं उससे दोबारा कभी बात करने नहीं जाऊंगा.
4ऑफिस के ऐसे दूसरे लोगों से भी दूर ही रहूंगा.
या फिर आप इस तरह से सोच रहे हैं..
4आप इसे पर्सनली नहीं लेंगे. यह समझेंगे वह खुद किसी परेशानी में भी हो सकता है.
4आपके अंदर कोई रिएक्शन नहीं होगा और आप कूल बने रहेंगे.
4को-वर्कर से बिना बातचीत के सीधे अपने काम में लग जाएंगे.
..आप इन दोनों में से खुद को किससे रिलेट कर रहे हैं ये पूरी तरह आप पर डिपेंड करता है. एक का रिजल्ट पॉजिटिव होगा और आपका दिन बेहतर साबित होगा वहीं दूसरा रिस्पांस पूरे दिन को स्ट्रेसफुल बना सकता है.

Situation+Thought =Response
नेक्स्ट टाइम जब इससे सिमिलर कोई सिचुएशन आए तो गहरी सांस लें और रियलाइज करें कि थॉट्स आपके कंट्रोल में
हैं. किसी भी सिचुएशन का आपके लिए कोई मतलब नहीं है जब तक कि आप उस पर रिएक्ट नहीं करते. रिएक्शन के बाद सिचुएशन पॉजिटिव हो सकती है, निगेटिव हो सकती है या ज्यों की त्यों बनी रह सकती है. हो सकता है कि आप सिचुएशन के कंट्रोल में आ जाएं और निगेटिव रिस्पांस देने लगें या खुद सिचुएशन को कंट्रोल में ले लें और पीसफुल तरीके से रिएक्ट करें.
We don’t respond automatically
लोग अक्सर सोचते हैं कि हमारे रिस्पॉन्स सडेनली और ऑटोमैटिकली होते हैं जिसमें हमारा कोई रोल नहीं होता. लेकिन ऐसा नहीं है. ये हमारे थॉट्स होते हैं जो हमारे रिस्पॉन्स को डिसाइड करते हैं. हम किस तरह सोचते हैं, यह पूरी तरह हमारे कंट्रोल में होता है. हम लोगों को नहीं बदल सकते लेकिन उनको लेकर अपने रिएक्शन बदल सकते हैं.

Compartment exam 15-16 को

यूपी बोर्ड के हाईस्कूल स्टूडेंट्स का कम्पार्टमेंट एग्जाम 15 व 16 जुलाई को ऑर्गेनाइज किया जाएगा. पहली बार हो रहे इस एग्जाम में 1691 स्टूडेंट्स शामिल होंगे. यूपी बोर्ड में इस बार से लागू किए गए कम्पार्टमेंट एग्जाम की तारीख घोषित कर दी गई है.
इस एग्जाम में 15 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स एलिजिबल थे. इसके बाद भी सिर्फ 1691 स्टूडेंट्स ने ही अप्लाई किया. अधिकारियों की मानें तो एग्जाम के बारे में कई स्टूडेंट्स को प्रॉपर जानकारी न होने से ऐसा हुआ है. मात्र 885 ब्वॉयज और 816 ग‌र्ल्स ही एग्जाम देंगे. डीआईओएस एसएस सिंह ने बताया कि ब्वॉयज का सेंटर बीएनएसडी इंटर कॉलेज चुन्नीगंज में रखा गया है, जबकि ग‌र्ल्स के लिए कैलाश नाथ बालिक इंटर कॉलेज माल रोड में व्यवस्था की गई है. एग्जाम सुबह साढ़े सात बजे से शुरू होगा. स्टूडेंट्स को नियत तारीख को सब्जेक्ट के अकॉर्डिग टाइम पर पहुंचना होगा. अभी तक जिसके एडमिट कार्ड नहीं पहुंचे हों, वो अपने एडमिट कार्ड जीआईसी चुन्नीगंज से कलेक्ट कर सकते हैं.

सिटी की टिया top six में पहुंची

सुनिधि चौहान को अपना ऑयडल मानने वाली सिटी की टिया अपनी बेहतरीन सिंगिंग की बदौलत इंडियन ऑयडल की टॉप सिक्स फाइनलिस्ट बन चुकी है. फिलवक्त वो मुम्बई में अपनी फैमिली के साथ सेटल है. टिया का सिटी से पुराना रिश्ता है.
Happy b’day to you
मानस विहार जेके कॉलोनी की टिया के फादर दिपन कुमार प्लेबैक सिंगर हैं और मदर कोलकाता यूनिर्वसिटी में टीचर हैं. दोनों बाहर रहते हैं, इसलिए टिया मुम्बई में सेटल हो गई. लेकिन बचपन बुआ के घर पर ही बीता. हाई स्कूल तक का एजूकेशन टिया ने किदवई नगर के सेंट थॉमस स्कूल से पूरी की. अपने फादर के ड्रीम को पूरा करने के लिए उसने इस कॉम्पटीशन में पार्टिसिपेट किया. टिया के बड़े भाई का कहना है कि इंडियन ऑयडल के प्लेटफॉर्म पर उसे अन्नू मलिक का बहुत सपोर्ट मिला. टिया का बर्थ डे आज वाकई खास होगा, इंडियल ऑयडल के प्लेटफार्म पर होगा सेलिब्रेशन.

स्वदेश की चाहत

पाकिस्तान में हिंदुओं को होने वाली मुश्किलों के मामले तो पहले भी आते रहे हैं, पर अब मामला और बिगड़ता जा रहा है. वहां हिंदुओं के साथ-साथ सिखों का भी फाइनेंशियल, रिलीजियस और सोशल एक्सप्लायटेशन हो रहा है. इनकी संख्या तकरीबन 15 से बीस लाख है. देश के विभाजन के समय यह लोग वहीं रह गए थे. अब ये वापस भारत आना चाहते हैं. वैसे पाकिस्तान से हिंदुओं और सिखों का पलायन पहले भी होता रहा है. वहां से बड़ी संख्या में आए ये लोग गुजरात, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, पंजाब, दिल्ली और अन्य राज्यों में अपने अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं. जालंधर में ऐसे तकरीबन दो सौ परिवार रहते हैं. उन्हें यहां रहते दस से पंद्रह साल हो गए हैं. वह भारत की नागरिकता दिए जाने की मांग कर रहे है. सीनियर बीजेपी लीडर और सांसद अविनाश राय खन्ना की अगुवाई में पार्टी ने एक कमेटी गठित की है. यह ऐसे लोगों की प्रॉब्लम्स दूर करने की कोशिश करेगी. खन्ना ने प्रत्येक विस्थापित परिवार को दो हजार रुपए दिए जाने की मांग पंजाब गवर्नमेंट से की है. बीजेपी इन लोगों को नागरिकता दिए जाने की भी मांग कर चुकी है. पाकिस्तान के पेशावर से 1998 में परिजनों सहित जालंधर आए सम्मख राम की बातों में दर्द साफ झलकता है.
कोई नहीं सुनता
सम्मख राम ने कहा कि वहां रह रहे लोगों को धार्मिक आजादी नहीं है. यही कारण है कि कराची और स्यालकोट के तकरीबन 15 से बीस लाख हिंदू और सिख पाकिस्तान छोड़ कर अपने मुल्क लौट आना हैं. कराची से अपना घर बार छोड़ कर यहां आए 70 साल के बिजनेसमैन मुल्कराज ने कहा गवर्नमेंट की शह पर वहां मंदिर और गुरुद्वारों को तोडा जाता है. उन्होंने कहा कि मेरे भाई का बिजनेस सिर्फ इसलिए बंद करा दिया है क्योंकि मैं यहां भारत में हूं. मुल्कराज ने कहा कि हिंदू और सिख वोट नहीं दे सकते. उनके लिए अलग से एक इसाई सांसद तय कर दिया जाता है, जो उनकी समस्याओं को सुनता है. स्यालकोट से यहां आए ठक्कर सपाल ने कहा कि हिंदुओं और सिखों के लिए वहां श्मशान तक नहीं है. जो हैं भी वह शहर से तकरीबन तीन से चार सौ किलोमीटर दूर. सम्मख कहते हैं कि हिंदुओं को तो छोड़िए जितनी आजादी हिंदुस्तान में मुसलमानों को हैं उतनी आजादी वहां (पाक में) के मुसलमानों को भी नहीं है.
ज्यादतियों की इंतेहा
वहां पर ज्यादतियों का आलम क्या है इसका अंदाजा इस घटना से लगाया जा सकता है कि वहां के सिंध प्रांत में एक हिंदू लड़के ने एक मस्जिद के बाहर लगे कूलर से पानी पी लिया. इस बात से नाराज प्रभावशाली कबायलियों ने हमले किए और अनेक हिंदू परिवारों को घरबार छोड़ कर भागना पड़ा.

पॉल बाबा की जय!

 फीफा व‌र्ल्ड कप का टाइटल तो स्पेन को मिला, पर पॉल ऑक्टोपस को कहीं ज्यादा सुर्खियां मिलीं. ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी की सभी प्रेडिक्शंस बिल्कुल सटीक साबित हुई हों. पॉल की सभी आठ प्रेडिक्शंस सच साबित हुई. पॉल के इस कमाल पर बॉलीवुड स्टार्स भी उस पर फिदा हो गए हैं. स्पेन की जीत के बाद बॉलीवुड के सितारों ने ट्वीट पर पॉल के लिए कुछ इस तरह ट्वीट्स कीं..
 Some Tweets on Twitter ---->>




Paulie Baba zindabad !! Didn’t kick a single ball and lifted WorldCup..
-Amitabh Bachchan

Paul proved more powerful than me. Congratulations Spain! Well done. A well deserved win. Dear Paul, aap purush nahi... Octopus ho.
-Aamir Khan
Why do I need to know paul’s predictions, I have john the octopus! He predicted rt from d start spain would win.They did! Yay!
-Bipasha Basu
And if all else fails, Paul deserves the golden boot.. All 8 of them.
-Mandira Bedi
So impressd with Pauls predictions tht i wanna bring him down 4 next yrs Ipl4,wil help 2 kno how Rajasthan Royals wil fare be4hand!;) ;)ha
- Shilpa Shetty
Octopus baba tusi great ho!! Congratulations spain you deserved to win!! Goodnight
-Yuvraj Singh
No Indian astrologer has yet managed a 100% track record like him. Congrats2Spain. Trivandrum is celebrating!

Real Rajneeti in Allahabad

कैबिनेट मिनिस्टर नंद गोपाल गुप्ता उर्फ नंदी अपने चंद समर्थकों के साथ घर से करीब पचास मीटर दूरी पर स्थित मंदिर में मत्था टेकने के लिए निकले थे. वह घर से निकल कर चंद कदम की दूरी ही तय कर पाए थे कि अचानक एक ब्लास्ट ने पूरे मोहल्ले को दहला दिया. ब्लास्ट सुनकर जब तक लोग मौके पर पहुंचते मंत्री के अलावा छह और लोग गंभीर रूप से जख्मी होकर स्पॉट पर गिर चुके थे. ब्लास्ट इतना जबर्दस्त था कि वहां खड़ी तीन अन्य गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए. आनन-फानन में सभी घायलों को जीवन ज्योति नर्सिग होम पहुंचाया गया. देर शाम तक तीन लोगों की हालत गंभीर बनी हुई थी. इस घटना से जिले ही नहीं प्रदेश के अफसरों को भी हिलाकर रख दिया है. कुछ ही घंटों के भीतर डीजीपी कर्मवीर सिंह और प्रमुख सचिव गृह फतेह बहादुर सिंह यहां पहुंच गए.
घायलों में एक रिपोर्टर भी
शहर दक्षिणी से बसपा के टिकट पर विधायक बनने वाले नंद गोपाल गुप्ता उर्फ नंदी सिटी के बहादुरगंज एरिया में रहते हैं. वह जब भी वह सिटी में होते हैं, सुबह मंदिर में दर्शन करने के बाद स्थानीय लोगों की प्रॉब्लम सुनते हैं. नहाने के बाद वह घर से बाहर निकले व मंदिर की तरफ बढ़े. नंदी घर से चंद कदम ही आगे बढ़े थे कि अचानक पास खड़ी बाइक में ब्लास्ट हो गया. एडीजी बृजलाल के मुताबिक नंदी के घर के समीप खड़ी एक मोपेड में एक्सप्लोसिव को फिट किया गया था.