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Friday, May 22, 2009

पत्नी जैसा कहे वैसा करो

NEW DELHI (19 May, Agency): वैवाहिक जीवन में शांति चाहिए तो वाइफ जैसा कहे, वैसा ही करो. इस कथन से यूं तो लगभग सभी विवाहित पुरुष सहमत होंगे, लेकिन फिर भी कुछ न मानने वाले भी होंगे. मगर अब मान जाइए क्योंकि ये एडवाइस किसी वैवाहिक संस्था ने नहीं बल्कि देश की शीर्ष कोर्ट ने दी है. सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अगर सुखी रहना है तो वाइफ की मानिए.
जस्टिस मार्कडेय काटजू और दीपक वर्मा की अवकाश बेंच ने कहा कि बीवी जो बोलती है उसे सुनो नहीं तो आपके लिए प्रॉब्लम खड़ी हो जाएगी. क्योंकि यदि आपने उसकी बात नहीं सुनी तो आपको नतीजे भुगतने पड़ेंगे. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि हसबैंड को वाइफ का सुझाव स्वीकार करना ही होता है भले ही उसका कोई मतलब हो या नहीं.
.तो उधर सिर घुमा लो
बेंच ने आगे कहा कि यदि आपकी वाइफ कहती है सिर उधर घुमाओ तो उधर सिर घुमा लो. यदि वह सिर इधर घुमाने कहती है तो उसका अनुसरण करो. अन्यथा आपके लिए मुसीबत हो सकती है. हम सब इसके भुक्तभोगी हैं. ये दिलचस्प सुझाव कोर्ट ने एयरफोर्स अफसर दीपक कुमार के वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया.
दरअसल दीपक कुमार की मैरिज 17 साल पहले मनीषा से हुई थी, लेकिन मैरिज के कुछ ही दिनों बाद दोनों के मतभेद सामने आ गए. दीपक ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में डिवोर्स के लिए अर्जी दायर की, लेकिन मनीषा के विरोध पर ये रिजेक्ट हो गई. हालांकि दीपक की अपील पर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट की एकल जज पीठ ने न्यायिक अलगाव के निर्देश दे दिए. मनीषा ने इसके खिलाफ अपील की तो हाई कोर्ट ने न्यायिक अलगाव को डिवोर्स में तब्दील करने भी इजाजत दे दी. साथ ही दीपक को 10 लाख का मुआवजा देने के भी निर्देश दिए.
थोड़ा और इंतजार कीजिए
मनीषा ने इसके बाद शीर्ष कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठा दिया. कोर्ट में दीपक कुमार ने तर्क दिया था कि विवाह खत्म हो चुका है. मनीषा उनके और उनके फेमिली वालों के खिलाफ जाने कितने आपराधिक मामले दर्ज करवा चुकी है लेकिन फिर भी डिवोर्स के लिए राजी नहीं है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई को जुलाई के अंतिम सप्ताह तक के लिए टाल दिया. कोर्ट ने कहा कि जब आपने 17 साल तक इंतजार किया है तो थोड़ा और इंतजार कीजिए.

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