जरा सावधान होने की जरूरत है

जरा तुम अपना हाथ देना.. पड़ोस की लपटें हमारे घर को घेर न लें, इसलिए जरा सावधान होने की जरूरत है. जिस बात का खतरा है, सोचो कि वो कल होगी जरख़ेज जमीनों में, बीमार फसल होगी. पाकिस्तान के मौजूदा हालात को बयां करने के लिए ये लाइनें बेहद सटीक हैं. कहते हैं पड़ोस में अगर आग लगी हो तो चैन से सोया नहीं जा सकता. गुरुवार से शुरू हुए अपोजिशन के लांग मार्च से पड़ोसी मुल्क में जबर्दस्त क्राइसिस उठ खड़ी हुई है. भले ही जरदारी सरकार जितनी सफाई दे कि वह थ्योरिटिकली ऐसे किसी डेमोक्रेटिक मूवमेंट के खिलाफ नहीं है, लेकिन वकीलों, इंटिलेक्चुअल्स और कॉमन पीपल के लांग मार्च को लेकर सरकार जितनी बेचैन है, उससे उनकी परेशानी समझी जा सकती है. सवाल उठता है कि आखिर कौन-सी बात है कि पाकिस्तान साठ साल में एक विभाजन देख चुका और अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. उसके हर प्रॉविंस में डिसिडेंट्स सिर उठा रहे हैं. ऊपर से तालिबान का ख़ौफ गंभीर चुनौती बना हुआ है. दरअसल, पाकिस्तान बनने के दौरान हुए फॉल्ट का आउटकम पड़ोसी देश की वर्तमान स्थिति में दिख रहा है. इंडियन और पाकिस्तानी डेमोक्रेटिक सिस्टम के अप्स और डाउंस के पीछे सबसे बेसिक फैक्टर है मिडिल क्लास. पिछले साठ साल के दौरान जिस तरीके से मिडिल क्लास इंडिया में स्ट्रांग (क्वांटिटेटिव और क्वालिटेटिव दोनों फ्रंट पर) हुआ, उसकी तुलना में पाकिस्तान में केवल दो क्लास अपर एंड लोअर ही इमर्ज कर पाए. या तो वहां बेपनाह गरीबी है या फिर जरदारी, भुट्टो और शरीफ फैमिली जैसे मिलिनेयर. लेकिन दोनों ध्रुवों को जोड़ने वाला कोई मिडिल क्लास वहां नहीं है. इस माहौल में नेबर कंट्री का अंदरूनी माहौल हमारे लिए भी चिंता का विषय है. कहीं पड़ोस की लपटें हमारे घर को घेर न लें, इसलिए जरा सावधान होने की जरूरत है. लाइफ की डिमांड थी हम बड़े हो गए, समझदार हो गए. बचपन को खूंटी पर टांगा और निकल पड़े दुनिया को फतेह करने. लेकिन कोई हर्ज नहीं है कभी-कभार खूंटी पर टंगे अपने बचपन को उतारकर फिर से पहन लेने में. जिंदगी को दो घड़ी उस तरह जी लेने में, जैसा हम चाहते हैं. Content makes poor men rich; discontentment makes rich men poor. - Benjamin Franklin दो ध्रुवों के बीच फासले मरने के बाद भी एसएमएस बहुत बढि़या कुत्ता था साहब. उस फोन कंपनी के इश्तिहार में तरह-तरह से मदद करता था सबकी. कभी किसी बच्ची को बैंडेज लाकर देता था. कभी बच्ची को होमवर्क कराने में मदद करता था. पर लगता है कि अब वह कुत्ता बर्खास्त सा हो गया, कम दिखता है. क्यों, क्योंकि वह एसएमएस नहीं कर पाता, इसलिए. अब तमाम मोबाइल कंपनियां-एसएमएस करो, अभियान चला रही हैं. जो एसएमएस ना कर पाये, वह बेकार है. धुआंधार एसएमएस ना करने वालों को मोबाइल कंपनियां क्या समझती हैं, समझे कि नहीं. बस बर्खास्त नहीं कर पातीं, यह अलग बात है. एक मोबाइल फोन कंपनी की सेल्सबाला ने बताया कि जी हम तो चाहते हैं कि जो प्रेमी, प्रेमिका की गोदी में सिर रखकर लेटा हुआ है, वह भी अपनी प्रेमिका को एसएमएस द्वारा ही सूचित करे कि तेरे दांतों में पालक फंसा हुआ है. पति-पत्‍‌नी झगड़े भी एसएमएस के जरिये करें, डिमांड हो, तो हम झगड़ा पैकेज निकाल सकते हैं. ढाई सौ गालियां मुफ्त, पांच सौ बहुत ही गंदे विशेषण एकैदम फ्री. झगड़ा पैकेज, कलीग के साथ रगड़ा पैकेज, सब कुछ एसएमएस के जरिये ही हो. तकरार, मारामार, प्यार सब कुछ एसएमएस के जरिये हो. भला हुआ जी अनारकली सलीम आकर निकल लिये पहले. वरना होता यूं कि अनारकली एसएमएस पर एसएमएस करती, फिर कुछ दिनों बाद मिलना ही छोड़ देती. पूछने पर बताती कि एसएमएस का बिल आया था 878973897398793 रुपये. पापा ने मोबाइल ही बंद करवा दिया. उस पुराने मोबाइल एसएमएस बिल चुकाने के लिए इन दिनों कॉल सेंटर में नौकरी कर रही हूं. मोबाइल विहीना अनारकली कॉल सेंटर पर नौकरी में मगन हो जाती. सलीम कॉल ही ना कर पाते. खैर, वो तो निकल गये. हम तो बचे रह गये हैं. जी आपके लिए स्टॉक एलर्ट पैकेज है. सारे शेयरों के भाव हम एसएमएस के जरिये ले सकते हैं-मोबाइल एसएमएस सेल्सबाला बता रही है. जी अब स्टॉक के भाव एलर्ट नहीं करते, उन्हें देखकर तो आत्महत्या करने की इच्छा करती है. मेरी क्या, बहुत इनवेस्टर्स की यही इच्छा करती है. ओके सामूहिक आत्महत्या डिस्कशन पैकेज हम ऑफर कर सकते हैं. सारे ऐसे शेयर डुबाऊ इनवेस्टर लोग ग्रुप बना लें. इस ग्रुप एसएमएस पर हम पचास परसेंट का डिस्काउंट दे सकते हैं. देखिये, हम यहां मर रहे हैं. आपको चिंता होनी चाहिए कि हमारी फैमिली का हमारे बाद क्या होगा, पर आप एसएमएस बेचने में जुटी हैं. फैमिली कंसर्न पैकेज भी हो सकता है. थोक में शोक संवेदना के लिए थोक एसएमएस पर पचास परसेंट डिस्काउंट दिया जा सकता है. मरने के बाद भी कोई एसएमएस से नहीं बच सकता. चलूं, कुत्ते से ही पूछ आऊं, बिना कुत्ता हुए, एसएमएस से कैसे बचा जा सकता है. n आलोक पुराणिक http://www.edit.inext.co.in/
जरा सावधान होने की जरूरत है जरा सावधान होने की जरूरत है Reviewed by Brajmohan Saini on 3:19 PM Rating: 5

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