स्क्रीनएजर्स को नेट का नशा

IT User

मोबाइल टीवी और अल्ट्रा मोबाइल पीसी अब हकीकत बन चुका है। टचस्क्रीन टेक्नोलॉजी के इस जमाने में स्क्रीनएजर्स नेट सर्फिग, मैसेजिंग और ऑनलाइन गेमिंग से अपना टाइम पास करने लगे हैं। दरअसल, टीनएज ऐसी उम्र होती है, जिसमें शारीरिक और मानसिक बदलाव बडी तेजी से होते रहते हैं। यही कारण है कि टीनएजर्स में तरह-तरह की चीजों को जानने की जिज्ञासा और उन्हें आजमाने की ललक होती है। सच तो यह है कि इस उम्र में जिस काम के लिए मना किया जाता है, वही करने की इनमें जिद पैदा हो जाती है। सवाल उठता है कि टेक्नोलॉजी के नुकसान से खुद को कैसे बचाएं टीनएजर्स?

फिलहाल बात करते हैं, एक ऐसी तकनीक की जिसका नशा टीनएजर्स में छाया हुआ है। जी हां, यह है - नेट का नशा। नेट सर्फिंग में पडने वाले टीनएजर्स का न सिर्फ अच्छा-खासा समय बर्बाद होता है, बल्कि उनका स्वास्थ्य भी इससे खराब होता है। हो भी क्यों नहीं? घंटों-घंटों एक ही जगह बैठे रहने से शरीर तो बिल्कुल जाम हो जाता है ना? बहरहाल, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि खुद को नई-नई जानकारियों से लैस करने में इंटरनेट से बहुत मदद मिलती है। तो फिर क्या किया जाए? समझदारी इसी में है कि कुछ सतर्कता बरतते हुए तकनीक का बेहतर ढंग से इस्तेमाल किया जाए।

चैटिंग या चीटिंग?

चैटिंग के जरिए नए-नए दोस्त बनाने की ललक में अक्सर चीटिंग होती है। इसके अलावा नेट सर्फिग करते वक्त कभी वायरस आ जाते हैं, तो कभी फालतू की ई-मेल बिन बुलाए मेहमान की तरह आ धमकती हैं।

अब सवाल उठता है कि कोई कैसे करे सेफ सर्फिग? सेफ सर्फिग इतना मुश्किल है नहीं, जितना कि यह लगता है।

कभी भी नेट को यूज करने बैठो, तो अपने पेरेंट्स या टीचर से एक बार जरूर पूछ लो।

अगर कोई तुम्हें फालतू की चीजें मेल करे, तो अपने पेरेंट्स या सीनियर को इसके बारे में जरूर बताओ। ऐसी मेल्स का कभी जवाब मत दो।

अनवांटेड मेल्स को रिसीव नहीं करने का तरीका उसी मेल के नीचे लिखा होता है।

अगर तुम चैट कर रहे हो, तो अपने निक नेम का इस्तेमाल करो। अपना असली नाम आमतौर पर नहीं बताना चाहिए।

अपने स्कूल और घर का एड्रेस भी अपने किसी नेट फे्रंड को मत बताओ, वह इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है।

अगर कोई तुम्हारी फोटोग्राफ मांगे, तो साफ मना कर दो।

चैट रूम में कोई तुम से अनाप-शनाप बातें कर रहा हो, तो फौरन चैट रूम से बाहर आ जाओ।

चैट रूम में किसी की बात का भरोसा न ही करो, तो अच्छा।

अगर चैट फ्रेंड तुम्हें कोई बात तुम्हारे पेरेंट्स से बताने को मना कर रहा है, तो समझो कि कोई गडबड है।

किसी अनजान व्यक्ति से मिली मेल्स को खोलने में सावधानी बरतो। अटैचमेंट्स को बिना जाने-समझे डाउनलोड मत करो, क्योंकि उनमें वायरस हो सकता है।

नेट फ्रेंड से पहली मुलाकात

आजकल नेट पर फ्रेंडशिप होने के बाद तुरंत मिलने की प्लानिंग बना ली जाती है। अव्वल तो ऐसी किसी भी योजना को बढावा नहीं देना चाहिए और यदि ऐसा करना भी हो, तो सावधान रहने की आवश्यकता है। मीटिंग तय करने से पहले तुम्हें इसके बारे में अपने पेरेंट्स को जरूर बता देना चाहिए। साथ ही, जब तुम मिलने जाओ, तो किसी दोस्त को अपने साथ ले जा सकते हो।

विशेषज्ञों की राय में मॉडर्न टेक्नोलॉजी जहां एक ओर स्टूडेंट्स कम्युनिटी को हर संभव मदद पहुंचाती है, वहीं इससे नुकसान का खतरा भी बराबर बना रहता है। ऐसे में टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल करने का हुनर रखने वाले ही चैंपियन कहलाते हैं। मॉडर्न टेक्नोलॉजी का फन के लिए उपयोग करने वालों का अंजाम अच्छा नहीं होता।

जेजे डेस्क

जी हां, यह है - नेट का नशा। नेट सर्फिंग में पड़ने वाले टीनएजर्स का न सिर्फ ,अच्छा-खासा समय बर्बाद होता है, बल्कि उनका स्वास्थ्य भी इससे खराब होता है। ,हो भी क्यों नहीं? घंटों-घंटों एक ही जगह बैठे रहने से शरीर तो बिल्कुल जाम ,हो जाता है ना?
स्क्रीनएजर्स को नेट का नशा स्क्रीनएजर्स को नेट का नशा Reviewed by Brajmohan Saini on 6:27 AM Rating: 5

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